ईरानी और जावड़ेकर ने केंद्रीय विद्यालयों में कराये कोटे से 25 गुना एडमिशन

ईरानी और जावड़ेकर ने केंद्रीय विद्यालयों में कराये कोटे से 25 गुना एडमिशन

नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्री के पास केंद्रीय विद्यालयों में एडमिशन सिफारिश के लिए सालाना 450 सीटें हैं। स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर ने तीन वर्षों में 35,685 सिफारिशें भेजी हैं। यह जानकारी एक RTI के तहत मिली है |

नयी दिल्ली। पिछले तीन वर्षों में, मानव संसाधन विकास मंत्रियों स्मृति ईरानी और प्रकाश जावड़ेकर ने विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों में कुल-मिलाकर 35,685 सीटों के एडमिशन लिए एचआरडी मंत्री के विशेषाधिकार वाली विशिष्ट सिफारिश की है। यह सालाना 450 के कोटे से 25 गुणा या कहें 2500 प्रतिशत अधिक है।

प्रतिष्ठित केंद्रीय विद्यालय का प्रबंधन करनेवाले बोर्ड ने मंत्री के प्रत्याशियों में से आधे का प्रवेश ले लिया है और बाकी को प्रवेश देने के लिए संघर्ष कर रहा है।यह जानकारी एक RTI के तहत मिली है |

ग़ौरतलब है कि केंद्रीय विद्यालयों का प्रबंधन करनेवाला संगठन केवीएस (केंद्रीय विद्यालय संगठन) एचआरडी मिनिस्टर के नियंत्रण में ही होता है। सालाना 450 का कोटा भी 2014 में ईरानी ने ही तय किया था, जब वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय देख रही थीं।

2015-16 में एचआरडी मिनिस्टर के तौर पर अपने पूरे अकादमिक सत्र में ईरानी ने ऐसे प्रवेश के लिए तय 450 सीटों के कोटे के मुकाबले 5,128 सिफारिशें कीं। इनमें से केंद्रीय विद्यालयों ने 3500 को प्रवेश दिया।

अगले वर्ष, 2016-17 में ईरानी ने 15,065 सीटों के लिए सिफारिश की, हालांकि उनका कोटा अभी भी 450 सीटों का ही था। इनमें से केंद्रीय विद्यालयों नें मंत्री की सिफारिश पर 8000 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया।

ईरानी से जुलाई 2016 में कार्यभार ग्रहण करने के बाद जावेड़कर ने 10 अक्टूबर 2017 तक अकादमिक सत्र 2017-18 के लिए 15,492 सीटों के लिए सिफारिश कीं, हालांकि उनका भी विशेषाधिकार 450 सीटों के लिए ही था। हालांकि, मंत्री की सिफारिशों पर होनेवाले प्रवेश का आंकड़ा अभी केंद्रीय विद्यालयों ने तैयार नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस वर्ष भी यह लगभग 8000 होने की उम्मीद है।

केंद्रीय विद्यालयों ने आरटीआइ के जवाब में लिखा है, ‘इन वर्षों (2015-16, 2016-17 और 2017-18 में अधिकृत से अधिक सिफारिशें हमें एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) से प्राप्त हुईं।’

सामान्यतः, केंद्रीय विद्यालय उन सभी को प्रवेश देने की कोशिश करता है, जिनकी सिफारिश मंत्री ने की हो। हालांकि, विद्यालय की क्षमता और वर्ग में विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए इन्हें भी एक बिंदु के बाद रुकना पड़ता है।

केंद्रीय विद्यालय के नियम कहते हैं कि 450 से अधिक की संख्या में सिफारिश आने पर केंद्रीय विद्यालयों के बोर्ड ऑफ गवर्नर को प्रवेशों की संस्तुति करनी होगी। पेंच हालांकि यह है कि बोर्ड की अध्यक्षता तो एचआरडी मिनिस्टर ही करते हैं।

इस मामले में ईरानी या जावड़ेकर ने पूछे गए प्रश्नों पर प्रतिक्रिया नहीं दी। केंद्रीय विद्यालयों के आयुक्त ने भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि हरेक बार कोटा की संख्या बढ़ने पर केवीएस ने मंत्री के कार्यालय को लाल झंडी दिखायी थी, हालांकि आरटीआइ के जवाब में केवीएस ने इस बिंदु पर कोई सूचना देने से इंकार कर दिया।

देश में 1100 से अधिक केंद्रीय विद्यालय हैं, जो केंद्रीय सरकार में पदस्थापित कर्मचारियों के बच्चों की स्कूलिंग का ख्याल रखते हैं, खासकर जिन कर्मियों की नौकरी स्थानांतरण वाली हो। इन विद्यालयों में हरेक वर्ष लगभग 1.5 लाख नए बच्चों का प्रवेश होता है, जिसमें से 1 लाख पहले वर्ग में प्रवेश लेते हैं।

एचआरडी मिनिस्टर के अलावा हरेक वर्ष सांसद भी 10 प्रवेश की सिफारिश कर सकते हैं और हरेक वर्ष लगभग 8000 प्रवेश सांसदों की सिफारिश से दिए जाते हैं।

एचआरडी मिनिस्टर के लिए ये विशिष्ट-वितरण व्यवस्था कभी 1975 में शुरू हुई थी। हालांकि, केवीएस ने कहा कि इसके पास पुराने प्रवेशों का रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन इसके मुताबिक 2014-15 से कोटा लगातार बढ़ ही रहा है।

केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए हमेशा से होड़ रही है और हरेक एचआरडी मिनिस्टर को प्रवेश के लिए अनुरोध के ढेर से जूझना पड़ता है। यूपीए-1 में एचआरडी मिनिस्टर रहे अर्जुन सिंह के समय तक यह विशेषाधिकार-कोटा 1000 प्रवेश तक था, जिसे उन्होंने बढ़ाकर 1200 कर दिया था।

अर्जुन सिंह के बाद आए कपिल सिब्बल ने पूरी तरह प्रतिभा आधारित प्रवेश की बात कर अपना कोटा ही समाप्त कर दिया था। सिब्बल के बाद आए पल्लम राजू के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कोटा को शुरू किए बगैर ही कुछ सिफारिशें की थीं।

जब 2014 में ईरानी ने मंत्रालय का पदभार संभाला, तो उन्होंने 450 प्रवेशों का कोटा निर्धारित किया, पर खुद ही उसको तोड़ती रहीं। जावेड़कर ने केंद्रीय विद्यालयों की व्यवस्था को सुधारने का दावा करते हुए भी ईरानी को पीछे छोड़ दिया।

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