सुलतानपुर: प्रिया मर्डर मिस्ट्री, सवालों का अम्बार

जल्द खुलासे के लिए एसपी ने गठित की टीम

आसिफ मिर्जा

सुलतानपुर। सदर विधानसभा के चोरमा गांव की प्रिया की बीते शनिवार की रात गला दबाकर हत्या को लेकर राजनैतिक गलियारे में भी हलचल मची है। महिला चार साल पहले से अपने साथ हुए गैंगरेप के मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रही थी। जिसमें बहुतेरे सवालों का अम्बार है। इन सवालों को देखने के बाद केवल विधायक को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालाकि एसपी ने घटना के खुलासे के लिए टीम गठित कर दिया है।

शनिवार की रात जयसिंहपुर थाने के चोरमा गांव के राजेंद्र सिंह की पुत्री प्रिया 20 (वर्ष) की घर से कुछ दूरी पर स्थित पंचायत भवन के पास शव मिला था। प्रिया देर शाम घर से शौच के लिए निकली थी। इस प्रकरण में पुलिस ने मृतका के पिता राजेंद्र सिंह की तहरीर पर विधायक अरुण वर्मा समेत अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। रविवार को देर शाम डीएम के निर्देश पर डाक्टरों के पैनल ने प्रिया का पोस्टमार्टम किया जहां हाईप्रोफाइल मामला होने के चलते पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी हुई। पोस्टमार्टम हाउस से जुड़े सूत्रों की मानें तो प्रिया की मौत का कारण उसकी गला दबाकर हुई हत्या बनी। उसके गले पर चोट के निशान के अलावा शरीर पर और कोई निशान नहीं पाया गया। जबकि बिसरा जांच के लिए भेजा गया है। शुरुआत से यदि बात की जाए तो पूरी कहानी में यदि पुलिसिया बयानात को किनारे करते हुए वादी और मृतका के अदालती बयान पर निगाह करें तो इसी में पेंच हैं।

मामले की कहानी अधिवक्ता की जुबानी, उठे सवाल’

फौजदारी के सीनियर अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा की मानें तो अदालत में 164 के अपने बयान में मृतका ने विधायक का नाम लिया था। लेकिन जिरह के दौरान पेज नम्बर 8, 9 व 10 पर दर्ज बयान में उसने विधायक को निर्दोष ठहराया था। यही नहीं अधिवक्ता श्री सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतका के पिता और वादी मुकदमा राजेंद्र सिंह ने भी अदालत में पक्ष में ही बयान दिया था। लेकिन हाल के महीनों में वादी मुकदमा ने अदालत से विधायक को आरोपी ठहराते हुए उन्हें तलब करने की अर्जी दिया। ’सवाल यह उठता है कि वादी और मृतका यदि दोनों की निगाह में विधायक आरोपी थे तो अदालत में एक बार बयान देकर बदला क्यों? यहीं पर मामला नहीं रुका अदालत ने वादी की सुनवाई करते हुए तारीख दिया। अधिवक्ता की मानें तो कई पेशी निकल गई और मृतका पेशी पर नहीं आई और 21 फरवरी को मामले में पेशी फिर थी लेकिन इससे पहले उसकी हत्या हो गई। दूसरा सवाल यह उठता है कि आखिर अपने साथ हुए जुल्म और उस इंसाफ की लड़ाई लड़ रही मृतका पेशी पर आने से क्यों कतराती रही? वो भी तब जब हाईप्रोफाइल मामले को गम्भीरता से लेते हुए उच्च अदालत ने मामले के शीघ्र निस्तारण का निर्देश दे रखा था।

इस चूक पर करें एक निगाह’

उधर पुलिस द्वारा मृतका की सुरक्षा हटा लेने का मुद्दा भी तूल पकडे हुए है। वैसे इसमें कहां चूक हुई है ये जांच में सामने आ ही जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जबकि मुकदमे की रंजिश चल रही थी तो ऐसे में परिजनों ने प्रिया को घर से अकेले ही क्यों निकलने दिया? जबकि शौचालय घर में मौजूद था। वहीं घर से लापता जो प्रिया परिजनों को घंटों ढूंढे नहीं मिली पुलिस को सूचना देने और पुलिस के आने के बाद घर से 100 मीटर की दूरी पर स्थित पंचायत भवन के पास प्रिया संदिग्ध अवस्था में पाई गई। आखिर इतने करीब मिली प्रिया की गला दबाकर हत्या होती है और चीख तक किसी को सुनाई नहीं देती है? इससे भी ज्यादा चैंकाने वाला सवाल ये कि जिस प्रिया की अपने इलाके के विधायक से इस तरह की रंजिश थी आखिर फिर क्यों महीनों से सुरक्षित जगह सुसराल को छोड़ मायके में पड़ी थी?

घर पर मचा कोहराम, 13 महीने की है एक बच्ची’

फिलहाल इंसाफ की लड़ाई लड़ रही मृतका की इंसाफ मिलने से पहले हत्या हो गई। लेकिन उसकी लाश घर पर पहुंचने के बाद कोहराम मच गया। आज उसका अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि मृतका अपने पीछे एक 13 महीने की मासूम को भी छोड़कर गई है जो अब पिता राहुल सिंह की गोद में है। 2013 में घटना के बाद 2014 में एक सामूहिक विवाह में प्रिया की शादी कोतवाली नगर के रामनगर निवासी राहुल सिंह के साथ हुई थी।

क्या कहना है एसपी का

एसपी पवन कुमार ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए सीओ की अगुवाई में टीम गठित की गई है। जयसिंहपुर एसओ का कहना है कि इस हत्याकांड मामले में संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।

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