बजट से विपक्ष परेशान क्यों? जेटली

बजट से विपक्ष परेशान क्यों? जेटली

नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आम बजट पेश करने को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव किया है. अरुण जेटली ने इस बाबत विपक्षियों पर निशाना साधते हुए पूछा कि एक तरफ तो वे नोटबंदी को अलोकप्रिय फैसला बताते हैं, तो फिर वे इससे भयभीत क्यों हैं.

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं से कहा, 'ये वे राजनीतिक दल हैं, जो कहती हैं कि नोटबंदी की लोकप्रियता बहुत कम है. तो फिर वे आम बजट से डर क्यों रहे हैं?'

विधानसभा चुनावों के ठीक पहले केंद्रीय बजट पेश करने के विरोध में विपक्ष के तमाम दल गुरुवार को चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे. टीएमसी, सपा, बीएसपी, जेडीयू औऱ आरजेडी के नेता 11 बजे चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे.

जेटली से जब पूछा गया कि वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद मार्च में बजट पेश किया गया था, तो उन्होंने कहा, यह कोई हमेशा की प्रथा (जिसका पालन किया जाए) नहीं रही. वह कहते हैं, 'लोकसभा चुनावों से ठीक पहले अंतरिम चुनाव पेश किया जाता है. किसी ने उसे तो नहीं रोका. 2014 में भी आम चुनाव से कुछ ही दिनों पहले अंतरिम बजट पेश किया गया था. यह एक संवैधानिक जरूरत है.'

बता दें कि अगले वित्तवर्ष के पहले दिन से ही लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च शुरू करने को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने फरवरी के अंतिम दिन बजट पेश की वर्षों पुरानी प्रथा को खत्म कर इस साल 1 फरवरी को आम बजट पेश करने का फैसला किया है. वहीं चुनाव आयोग ने बुधवार को यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 4 फरवरी से चुनाव शुरू कराने का ऐलान किया है.

ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों ने 1 फरवरी को आम बजट पेश करने के फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और चुनाव आयोग में दस्तक दी. कांगेस, लेफ्ट, सपा और बसपा जैसी पार्टियों ने इस कदम को लेकर आपत्तियां जताई हैं. उनका मानना है कि इस बजट में लोकलुभावन घोषणाएं कर वोटरों को प्रभावित किया जा सकता है.

हालांकि अरुण जेटली का कहना है कि आम बजट को पहले पेश करने का एक मकसद विभिन्न मदों में खर्चे को जल्द शुरू करना है, क्योंकि इससे पहले के वर्षों में यह मानसूनी महीने के बाद ही शुरू हो पाता था. उन्होंने कहा, 'ये वास्तविक खर्चे आधा साल बीत जाने की बजाय मानसून शुरू से पहले अप्रैल में ही शुरू हो जाने चाहिए. केंद्र के इस कदम का असल मकसद यही है और हम उस पर अडिग हैं.'

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