मुशायरे ज़ौक़ शेरी की तरबियत का अहम मरकज़ हैं: युनुस

मुशायरे ज़ौक़ शेरी की तरबियत का अहम मरकज़ हैं: युनुस

उर्दू अकादमी, इरम कालेज के सहयोग से बच्चों का मुशायरा आयोजित

लखनऊ। बच्चों में तालीमी बेदारी और उर्दू की तरक्की के लिए इरम एजूकेशनल सोसाईटी हमेशा सरगर्म रही है चाहे वह हुकूमत की सतह से हो या फिर किसी तंजीम की तरफ से चलाई जा रही मुहिम हो। आज जो बच्चों का मुशायरा हो रहा है ये इसी की एक कडी है।

इन ख्यालात का इजहार इरम एजूकेशन सोसाइटी के तहत चलने वाले इरम इंटर कालेज और उर्दू अकादमी के तआवुन से मुश्तरका हुए वाले ‘‘बच्चों के मुशायरे वाके इरम कालेज के आडियोटोरियम में सोसाइटी के बानी व फाउन्डर मैनेजर डाक्टर ख्वाजा सैयद मोहम्मद यूनुस किया उन्होंने कहा कि इरम कालेज सिर्फ एक तालीमी इदारा ही नहीं बल्कि अपनी अदबी व सकाफती सरगर्मियों के अहम मरकज के तौर पर भी जाना जाता है इरम एजूकेशनल सोसाइटी ने उर्दू की तरक्की का बेडा उठाया है यही वजह है कि उर्दू अकादमी के मुशायरे की तजवीज पर हमने लब्बैक कहा। डा ख्वाजा यूनुस ने कहा कि हमने बच्चों के मुशायरे की इब्तेदा कर दी है अब इसको आगे बढाना की जिम्मेदारी उर्दू वालों की हैं उन्होंने कहा बेशक ऐसे मुशायरों से बच्चों में बेदारी पैदा होगी और मुशायरे क्या होते हैं उनको करीब से समझने का मौका मिलेगा। सिर्फ इतना ही नहीं उर्दू को समझने के लिए इससे अच्छा कोई फॉर्मूला नहीं हो सकता। ऐसे मुशायरों से बच्चों में दिलचस्पी पैदा होगी इनमें बेदारी आयेगी आज वह दूसरों का कलाम पढ रहे हैं कल वह खुद अपनी तखलीकात पेश करेंगे।

डा ख्वाजा यूनुस ने कहा मेरी दुआ है कि ये बच्चे आगे चलकर कौम व मिल्लत की खिदमत करेंगे और अपने कालेज असातिजा और वालिदैन का नाम रोशन करेंगे।

बच्चों के मुशायरे में चीफ गेस्ट की हैसियत से शिरकत करते हुए उर्दू अकादमी के चेयरमैन मिस्टर नवाज देवबंदी इरम इंटर कालेज के बच्चों के अलावा दीगर कालेज के बच्चों ने तरन्नुम और तहत दोनों में शेर पढ़ने का फन का शानदार मुजाहिरा किया और सामेईन से बेपनाह दाद व तहसीन वसूल की। जिस  तलबा और तालिबात ने इस मुशायरे में हिस्सा लिया उनमें शुमैला नसरीन, आरिफा, अब्दुल अमीन, खतीजा मंसूर, मोहम्मद सलीम शाहनुर्रहमान, हमनाजमील, पूजा कुमारी, फैज अनवारवी, अब्दुल्ला, आयशा जबीं, विष्णु थापा, मरय्यम, मोहम्मद आदिल, निशा अशरफ, राफिया सालेहीन, आलिया जौहरा, नूर बानो, इरफान महेंदी, फरहीन बानो, नजीरा खातून, समईन सिराज, समदीन अफसां, सीमा तौसीफ, रोशिना बानो, हदबिया, फरजाना, सद्दाम कुरैशी, उमहुदा, निधि सोनकर, समरा अनवार, तैयबा खातून, नाजमीन, जहीब आलम, अलीसा वगैरह ने अल्लामा इकबाल, गालिब, मोमिन, फिराक गोरखपुरी, नजीर अकबराबादी, मखदूम मोहिनुद्दीन, बशीर बद्र, नवाज देवबंदी, मुनव्वर राना, प्रवीन शाकिर, फैज अहमद फैज, डा. मंसूर हसन का कलाम पेश किया। बाज बच्चों ने अपने अशआर भी पेश किये। आखिर में तमाम शुरका मुशायरे को मेहमाने के दस्त मुबारक असनाद भी तकसीम की गयी। 

मुशायरे में मेहमाने खुसूसी की तौर पर उर्दू अकादमी के चेयरमेन नवाज देवबंदी, प्रोफेसर मलिक जादा मंजूर अहमद, उर्दू अकादमी के सेक्रेटरी फैजुर्रहमान, रिजवान अहमद साबिक डीजीपी, अनीस अंसारी साबिक वीसी ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती यूनिवर्सिटी और सै. वकार रिजवी ने शिरकत की। इस मौके पर उर्दू अकादमी के सेक्रेटरी को एजाज को नवाजते हुए इन्हें निशान यादगार पेश किया गया। प्रोफेसर शारिब रूदौलवी ने अपने सदारती खिताब में कहा कि इरम स्कूल ने आज एक नये किस्म के मुशायरे की बुनियाद रखी है। जो पहले  वाकई काबिलेकद्र हैं उससे तालिब इल्मों को शेरगोई और शेर फहमी की सलाहियत को पेश में मदद मिलेगी। पहले शोअरा को पढ़ना और शेर को समझना और उसकी कताअत करना भी निसाब का एक हिस्सा था। औजान व बजूर की समझ भी पैदा होती थी लेकिन आज तख्ती और औजान व बजूर की वकफियत से बहुत कम लोग वाकिफ होते हैं। हमारे यहां जब से उर्दू की तालीम कम होती गई जौके एक शायरी भी कम होता गया है अगर आप शेर को सही पढ़ने की सलाहियत रखते हैं तो शेर को समझने के लिए भी किसी उस्ताद की जरूरत भी नहीं रह जाती है। बस एक लुगद भी काफी है जो आप को मुश्किल लफ्जों के मानी समझाने में मदद दे सके। मुशायरा सिर्फ तफरीह की जगह नहीं है बल्कि जौक ए शायरी की तरबियत का एक अहम मरकज है।

डा. नवाज देवबंदी ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए उनके सलाहियतों को सराहा। उन्होंने किया उर्दू एकादमी ने बच्चों के मुशायरे का निजाम इसी लिए बनाया है कि बच्चों में शुरू से ही से उर्दू शेरो शायरी और उर्दू तहजीब की समझ पैदा हो जाये। क्योंकि उर्दू एक जबान नहीं है बलिक एक तहजीब है।

इस मुशायरे के बारे में प्रोफेसर मलिक जादा मंजूर अहमद ने कहा कि पहले हम लोग भी बैंतबाजी मुशायरों में दूसरे शोअरा के अशआर पढ़ा करते थे। और दूसरे शोअरा किरदार भी अदा करते थे आज वह जमाना याद आ गया बिला शुबहा यह अच्छी कोशिश है इसीलिए इस पर बच्चों की अदाएगी और तल्लफुज बहुत मुतास्सिरकुन है। मैं मुबारकबाद देता हूं उन बच्चों को भी और उन असातिजा को जिन्होंने तरबियत की है। मारूफ शायर इमरान अनवारवी ने कहा कि उर्दू जबान नशोनुमा और तलब में उर्दू की मोहब्बत पैदा करने का एक खूबसूरत अमल यह मुशायरा र्है।

प्रोग्राम के आखिर में कालेज की प्रिंसिपल मिसेज आरिफा सीमा खान ने कलमात तकसकुर्रर किये और कौमी तराने के साथ ही प्रोग्राम का इख्तिताम हुआ उससे पहले मुशायरे में आने वाले सभी मेहमानों का इस्तकबाल इरम मेडिकल कालेज के डायरेक्टर डा. रज़्मी यूनुस, ख्वाजा बज़्मी यूनुस, ख्वाजा फै़जी यूनुस,  ख्वाजा सैफी यूनुस, डा. तारिक हुसैन, मिस्टर आरिफ नगरामी ने किया। सभी डायरेक्टरों ने मुशायरे में आने वाले मेहमानों की गुलपोशी की। जबकि मुशायरे की निजामत के फरायज अजरा यासमीन ने अंजाम दिये।

मुशायरे में डा. हारून रशीद, मिस्टर हुसैन अमीन, मिस्टर इमरान अनवारवी, एचएम यासीन, मुशायरे में शिरकत करने वाले सभी कालेजों के प्रिंसिपल तलबा के सरपरस्तों के अलावा दीगर अफराद मौजूद थे।

Lucknow, Uttar Pradesh, India