दिल्ली:
भोपाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर दिए गए पीएम मोदी के बयान पर विपक्ष ने उन पर तंज कसा है. कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि वे बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, मणिपुर की स्थिति पर बात क्यों नहीं करते. 60 दिनों से मणिपुर जल रहा है, उन्होंने एक बार भी शांति की अपील नहीं की. इन सभी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं.

यूसीसी पर पीएम मोदी की टिप्पणी पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह समझने की जरूरत है कि अनुच्छेद 29 एक मौलिक अधिकार है, मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को यह समझ नहीं आया. संविधान में धर्मनिरपेक्षता की बात है. इस्लाम में शादी एक अनुबंध है, हिंदू धर्म में यह जन्म-जन्मांतर का अनुबंध है। क्या आप उन सबको मिला देंगे? वे भारत की विविधता को एक समस्या मानते हैं.

वहीं जेडीयू नेता के.सी. त्यागी ने कहा कि यह (समान नागरिक संहिता) एक ऐसा विषय है जिस पर सभी राजनीतिक दलों, सभी हितधारकों को बात करनी चाहिए…भाजपा केवल वोट बैंक की राजनीति करती है जिससे धार्मिक ध्रुवीकरण होता है। बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित विधि आयोग ने विचार करने के बाद दी गयी रिपोर्ट में समान नागरिक संहिता पर विचार नहीं किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस देश में इसकी जरूरत नहीं है.

कांग्रेस नेता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य आरिफ मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री को याद रखना चाहिए कि उन्होंने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान की शपथ ली है. देश के सभी वर्गों को संविधान पर भरोसा है और वे इसे बदलने नहीं देंगे।’

डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि सबसे पहले हिंदू धर्म में समान नागरिक संहिता लानी चाहिए. देश के किसी भी मंदिर में एससी/एसटी समेत सभी को पूजा करने की इजाजत मिलनी चाहिए. हम यूसीसी नहीं चाहते क्योंकि संविधान ने हर धर्म को सुरक्षा दी है.

बता दें कि पीएम मोदी ने भोपाल में पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा था कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के नाम पर लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है. दो कानूनों पर देश कैसे चल सकता है?