अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक (UCBs) भारत के क्रेडिट इकोसिस्टम में अपनी स्थिति लगातार मज़बूत कर रहे हैं। उनके बैलेंस शीट में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है, और रिटेल तथा छोटे बिज़नेस, दोनों सेगमेंट में मांग लगातार बढ़ रही है।

नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NUCFDC) और ट्रांसयूनियन सिबिल के जॉइंट पब्लिकेशन, सहकार ट्रेंड्स के अनुसार सितंबर 2025 तक UCBs का आउटस्टैंडिंग क्रेडिट बैलेंस ₹3.4 लाख करोड़ रहा, जो पिछले पांच साल में लगभग 1.9 गुना बढ़ गया है।
हालांकि यूसीबी (UCBs) का कुल इंडस्ट्री क्रेडिट में हिस्सा अभी भी लगभग 1.8% के आसपास सीमित है, लेकिन आंकड़े संकेत देते हैं कि यह सेक्टर बदलती उधारकर्ता प्रोफाइल, प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों तथा नियामकीय अपेक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ट्रांसयूनियन सिबिल के MD एवं CEO, श्री भावेश जैन ने कहा, “UCBs भारत के व्यापक हिस्सों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं और बड़े शहरी केंद्रों से आगे बढ़कर अर्ध-शहरी और उभरते क्षेत्रों में घरों तथा छोटे व्यवसायों को फॉर्मल क्रेडिट उपलब्ध करा रहे हैं। कम्युनिटीज़ के नज़दीक होने के कारण, ये बैंक ऐसे ग्राहकों को लोन दे पाते हैं जहाँ लोकल कॉन्टेक्स्ट और रिश्ते मायने रखते हैं। इससे भारत के ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों को फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने में मदद मिल रही है। जैसे-जैसे ये बैंक रिटेल और छोटे व्यवसाय ऋण में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखते हुए वित्तीय पहुंच का विस्तार करना उनकी एक अहम भूमिका बनता जा रहा है, जिससे अधिक संतुलित और समावेशी आर्थिक भागीदारी को समर्थन मिलेगा।

NUCFDC के CEO, श्री प्रभात चतुर्वेदी ने कहा, “UCBs के बढ़ते क्रेडिट विस्तार से उधारकर्ताओं के मजबूत भरोसे का संकेत मिलता है, खासकर अर्ध-शहरी और उभरते क्षेत्रों में, जहां फॉर्मल क्रेडिट का आसानी से उपलब्ध होना बहुत ज़रूरी है। जैसे-जैसे ये बैंक अपने संचालन का दायरा बढ़ा रहे हैं, जिसे देखते हुए उन्हें अपनी इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी को मज़बूत करने, कामकाज के तरीके को बेहतर बनाने और मज़बूत गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार करने पर जोर देना होगा। इस बदलाव के दौरान UCBs का साथ देना ज़रूरी है, ताकि उनकी वृद्धि व्यापक वित्तीय भागीदारी और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता में सार्थक योगदान देती रहे।”

UCBs के लैंडिंग में आठ प्रोडक्ट्स का ज़्यादा योगदान
UCB की बैलेंस शीट में कमर्शियल लोन, हाउसिंग लोन, रिटेल बिज़नेस लोन, प्रॉपर्टी पर लोन, गोल्ड लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन और बैंक डिपॉज़िट पर लोन सबसे ज़्यादा हैं। सितंबर 2025 तक, UCBs के कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस में इन प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 83% थी, जिससे पता चलता है कि वे अभी भी कोलेटरल के बदले रिटेल लोन देने और छोटे बिजनेस को क्रेडिट उपलब्ध कराने पर ज़्यादा जोर दे रहे हैं।

UCBs में हाउसिंग लोन की औसत रकम ₹23 लाख के करीब है, जो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के ₹26 लाख के मुकाबले थोड़ी कम है। गोल्ड लोन की बात करें, तो UCBs के लिए औसत रकम ₹1.3 लाख है, जबकि PSU बैंकों के लिए यह ₹2.3 लाख है। इसके विपरीत, UCBs में कमर्शियल लोन की औसत रकम लगभग ₹50 लाख है, जो पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSUs) के ₹37 लाख से ज़्यादा है। वहीं, पर्सनल लोन के मामले में UCBs के लिए औसत रकम लगभग ₹4.7 है, जबकि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए यह ₹2 लाख है।
UCBs के लिए गोल्ड लोन विकास का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करते हैं
UCBs के कुल क्रेडिट पोर्टफोलियो में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी लगभग 5% है। भले ही वे इस सेगमेंट में PSU के बैंकों मुकाबले प्राइम से नीचे के ग्राहकों को ज़्यादा लोन देते हैं, फिर भी क्रेडिट प्रदर्शन संकेतकों में सुधार देखा गया है। बैलेंस-लेवल डिलिंक्वेंसी, जिसे 90 दिन या उससे अधिक बकाया राशि के आधार पर मापा जाता है, हाल के अवधियों में लगातार घटी है।

UCBs के पोर्टफोलियो में कमर्शियल लोन की हिस्सेदारी सबसे अधिक है
सितंबर 2025 तक, UCBs के कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस में कमर्शियल लोन की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है। एनक्वायरी-लेवल आंकड़े दर्शाते हैं कि सितंबर 2020 से सितंबर 2025 के दौरान UCBs में कमर्शियल लोन की मांग में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।

जून 2025 को खत्म हुए तीन महीनों के दौरान, इन्क्वायरी को लोन की मंजूरी में बदलने के मामले में UCBs ने PSU बैंकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन डिस्बर्समेंट की रफ़्तार थोड़ी धीमी रही, जहाँ PSU बैंकों ने मंजूरी के 15 दिनों के अंदर 61% लोन डिस्बर्स किए, वहीं UCBs केवल 45% लोन ही डिस्बर्स कर पाए। UCBs उन कंपनियों को ज़्यादा लोन देते हैं जिनका क्रेडिट एक्सपोज़र ₹1 करोड़ से ज़्यादा है। साथ ही उनके पास कम रिस्क वाले ग्राहक 49% हैं, जबकि मीडियम रिस्क वाले 45% और हाई रिस्क वाले ग्राहक केवल 6% हैं।1
मेट्रो और सेमी-अर्बन इलाकों में हाउसिंग लोन की बढ़ती मांग
UCBs के कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस में हाउसिंग लोन की हिस्सेदारी दूसरे नंबर पर है। हाउसिंग लोन की मांग लगातार स्थिर बनी हुई है और पिछले पांच सालों में UCBs ने इस क्षेत्र में दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की है। ये बैंक युवा ग्राहकों, महिलाओं और पहली बार लोन लेने वाले लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इसके अलावा, अर्बन और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में इसकी प्रगति दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा रही है।
हाउसिंग लोन के मामले में क्रेडिट परफॉर्मेंस काफी बेहतर हुआ है, और 90+ DPD बैलेंस वाले डिफॉल्ट की दर सितंबर 2024 के 3.2% के मुकाबले घटकर सितंबर 2025 में 2.8% हो गई है।

UCB से पर्सनल लोन लेने वालों की कस्टमर प्रोफ़ाइल बेहतर हुई है
हाल के समय में UCBs में पर्सनल लोन की मांग में काफी तेजी आई है। अगस्त 2025 को खत्म हुए तीन महीनों के दौरान, पर्सनल लोन इन्क्वायरी को लोन की मंजूरी में बदलने के मामले में NBFCs के 22% की तुलना में UCBs ने 39%, के साथ ज़्यादा कन्वर्ज़न रेट दर्ज किया। हालांकि, इनमें से सिर्फ़ 42% लोन ही पाँच दिनों के अंदर डिस्बर्स किए गए, जबकि NBFCs के लिए यह 68% था। इसके अलावा, UCBs के लिए पर्सनल लोन के बैलेंस-लेवल पर बकाया में लगातार सुधार हुआ है और यह हाल के समय में लगातार बेहतर बना हुआ है। पर्सनल लोन के मामले में बकाया (90+ DPD) सितंबर 2020 में लगभग 4.5% के मुकाबले सितंबर 2025 तक घटकर लगभग 2.1% हो गया।

UCBs के पास अपने क्रेडिट का दायरा बढ़ाने के अवसर
आंकड़े से पता चलता है कि पोर्टफोलियो को आगे बढ़ाने में UCBs के पास अब भी काफी अवसर है। मार्च 2025 तक, UCBs के लाइव रिटेल बॉरोअर्स की संख्या लगभग 30 लाख थी, जिनमें से कमर्शियल क्रेडिट फुटप्रिंट लगभग 1.7 लाख (लगभग 6%) था। अप्रैल से सितंबर 2025 के दौरान, तक़रीबन 3,000 उधारकर्ताओं ने पीएसयू बैंकों से नए कमर्शियल लोन प्राप्त किए। इन ऋणों की कुल स्वीकृत राशि लगभग ₹724 करोड़ रही, जिसमें से करीब ₹442 करोड़ कम और मध्यम जोखिम वाले उधारकर्ताओं को प्रदान किए गए।