भारत के निवारक स्वास्थ्य परितंत्र में लिक्विड वेपोराइज़र, कॉइल, एयरोसोल जैसे घरेलू कीटनाशकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, विशेष रूप से घरेलू स्तर पर, जहां वेक्टर-जनित बीमारियों से सुरक्षा अभी भी समान रूप से उपलब्ध नहीं है। गुरुवार को जारी, ईवाय और होम इन्सेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (एचआईसीए) की संयुक्त रिपोर्ट, “घरेलू कीटनाशकों के लिए जीएसटी को तर्कसंगत बनाना: सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्यता” में इस बात की पड़ताल की गई है कि मौजूदा 18% जीएसटी दर इन उत्पादों के उपयोग, किफायत और पहुंच को किस तरह प्रभावित करती है, विशेष रूप से कमज़ोर और उच्च-जोखिम वाली आबादी के बीच। साथ ही, इस रिपोर्ट में इस बात का भी मूल्यांकन किया गया है कि अन्य आवश्यक स्वच्छता उपाय और स्वास्थ्य-सुरक्षा उत्पादों की तरह ही इन उत्पादों पर भी टैक्स की दर को घटाकर 5% करने का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव हो सकता है। ईवाय–एचआईसीए रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि घरेलू कीटनाशक मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के खिलाफ ‘रक्षा की पहली पंक्ति’ के रूप में काम करते हैं, विशेष रूप से घरेलू स्तर पर, जहां ‘इनडोर रेसिडुअल स्प्रेइंग’ (घरों के अंदर कीटनाशक का छिड़काव) और मच्छरदानी जैसे बड़े पैमाने के उपायों को लागू करने में व्यावहारिक और व्यवहार-संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस महत्वपूर्ण निवारक भूमिका के बावजूद, इस श्रेणी के उत्पादों पर अभी भी 18% कर लगता है, जबकि सितंबर 2025 के बाद कई अन्य आवश्यक स्वास्थ्य और स्वच्छता उत्पादों पर जीएसटी दर को घटाकर 5% कर दिया गया था या इस कर को बिलकुल ही हटा दिया गया था। शहरी इलाकों में घरेलू कीटनाशकों की पहुंच 92–99% तक है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इनका उपयोग अभी भी सीमित है और यह 64–73% के बीच है। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण आबादी के लिए ये उत्पाद अभी भी बहुत किफायती नहीं हैं। ईवाय-एचआईसीए रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस अंतर का सबसे अधिक असर कम आय वाले और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है, जो वेक्टर-जनित बीमारियों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और इस वजह से वे गुणवत्ता-पूर्ण उत्पादों का लगातार उपयोग करने से वंचित रह सकते हैं। होम इन्सेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (एचआईसीए) के सचिव और निदेशक, जयंत देशपांडे ने जीएसटी राहत की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा, “लिक्विड वेपोराइज़र जैसे घरेलू कीटनाशक उत्पाद मलेरिया और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए ज़रूरी हैं। लेकिन इन उत्पादों पर अभी 18% कर लगता है, जिसकी वजह से ये उपभोक्ताओं के लिए किफायती नहीं रह जाते। साथ ही, गैर-कानूनी कारोबारी बगैर कर चुकाए और बिना किसी नियम-कानून के ऐसे उत्पाद बेचते हैं, जिससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों के लिए बाज़ार में बराबरी का माहौल नहीं रह जाता। जीएसटी में कमी से न केवल संगठित क्षेत्र को मदद मिलेगी, बल्कि ये ज़रूरी उत्पाद घरों तक ज़्यादा आसानी से पहुंच पाएंगे, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े परिणाम बेहतर होंगे।