उत्तर प्रदेश

अल्लाह से हमारा रिश्ता मज़बूत होगा तो दुनिया की कोई ताक़त हमें मिटा नहीं सकती: मौलाना महफूजुर्रहमान क़ासमी

  • जमीअत उलमा कानपुर के महासचिव मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी की निगरानी में इज्लास मेराजुन्नबाी का आग़ाज़

कानपुर: जमीअत उलमा शहर कानपुर के ज़ेरे एहतमाम तीन दिवसीय इज्लास मेराजुन्नबी स0अ0व0 मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी की निगरानी और डा.हलीमुल्लाह खां की अध्यक्षता आयोजित हुआ। जिसके पहले जलसे से खिताब करते हुए बहराइच से तशरीफ लाये मौलाना मुफ्ती महफूजुर्रहमान क़ासमी ने कहा कि ईमान वालों के दुनिया मंे मुसीबतें आती रहती हैं, इन्ही मुसीबतों में अल्लाह आसानी का रास्ता निकाल देता है। मौजूदा समय में हमें अल्लाह से अपना रिश्ता मज़बूत करने की ज़रूरत है जब अल्लाह से हमारा रिश्ता मज़बूत रहेगा तो दुनिया की कोई ताक़त हमें मिटा नहीं सकती। इसलिये हम सब तय करें की अल्लाह से अपना रिश्ता मज़बूत करना है और अल्लाह के महबूब नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की एक एक अदा को अपने जीवन में उतार कर उसी के मुताबित जीवन व्यतीत करना है।

कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी के महासचिव मौलाना खलील अहमद मज़ाहिरी ने कहा अल्लाह की दी हुई नेमतों से सबसे क़ीमती नेमत दौलते ईमान और हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 का उम्मती(अनुयायी) होने का गौरव है। इस नेमत का शुक्र हम पूरी ज़िंदगी अदा करते रहें तो भी अदा नहीं हो सकता।
इज्लास मेराजुन्नबी के आयोजक जमीअत उलमा कानपुर के महासचिव मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने मौजूद लोगों से कहा कि अंतिम नबी हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 और आप स0अ0व0 के सारे साथी (सहाबा) पूरी उम्मत के लिये नमूना हैं , हम उनके नमूने को सामने रखकर उनकी ज़िंदगियों के मुताबिक अपनी ज़िदगियों को ढालने की कोशिश करें तो आज भी हमारे हालात बेहतर हो सकते हैं। अंत में मौलाना अब्दुल्लाह ने कहा कि मेराज की यात्रा में अपने पास बुलाकर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को जो मुक़ाम अल्लाह ने दिया उसके क्या क्या सबक़ हैं उनको इस जलसे के द्वारा लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इससे पूर्व क़ारी मुजीबुल्लाह इरफानी ने तिलावत कुरआन पाक से किया। मुफ्ती असदुद्दीन क़ासमी व मौलाना मुहम्मद अकरम जामई ने संचालन के कर्तव्यों को अदा किया। हाफिज़ मुहम्मद मसूद ने नात का नज़राना पेश किया। इस अवसर पर जमीअत उलमा कानपुर के अध्यक्ष डा0.हलीमुल्ला खां, मौलाना अन्सार अहमद जामई, मौलाना सईद खां क़ासमी, मौलाना अनीसुर्रहमान क़ासमी, मौलाना फरीदुद्दीन क़ासमी, क़ारी अब्दुल मुईद चैधरी, मुफ्ती इज़हार मुकर्रम क़ासमी, क़ारी मुहम्मद ग़जाली खां के अलावा सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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