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भागवत की शताब्दी कथा : खतरा, खतरा, खतरा!!!

(आलेख : राजेंद्र शर्मा) इस दशहरे से आरएसएस का शताब्दी वर्ष शुरू हो गया। इस मौके पर, आरएसएस के वर्तमान सरसंघचालक, मोहन भागवत के संबोधन से बहुत से लोगों ने अगर, शताब्दी
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गणतंत्र के अमृत काल की उपलब्धि : बदलना एक ‘अधिकार संपन्न नागरिक’ का ‘लाथार्थी प्रजा’ में!

(आलेख : सुभाष गाताडे) महाराष्ट्र और झारखंड राज्य के चुनावों का ऐलान हो चुका है। दोनों राज्यों में अगले माह के अंत तक नई सरकार का गठन होगा। वैसे इस ऐलान के ऐन पहले
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ये देश है या माफियाओं का राजनीतिक तंत्र?

(आलेख : महेंद्र मिश्र) माफिया केंद्र को चला रहा है या फिर केंद्र माफियाओं के सहारे चल रहा है, कुछ कह पाना मुश्किल है। देश और विदेश से सामने आयी दो सूचनाओं
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स्मार्ट बिजली मीटर परियोजना : हंगामा क्यूं है बरपा!

(आलेख : संजय पराते) दक्षिण मुंबई में बेस्ट (विद्युत वितरण कंपनी) ने स्मार्ट बिजली मीटर लगाने के काम को स्थगित कर दिया है। इस कंपनी के 10.8 लाख आवासीय और व्यवसायिक उपभोक्ता
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जम्मू-कश्मीर : मोदीशाही की हार

(आलेख : राजेन्द्र शर्मा) मंगलवार, 8 अक्टूबर को आये चुनाव के नतीजों में प्रकटत: मुकाबला एकदम बराबरी पर छूटा है। हरियाणा में 90 में से 48 सीटों के साथ भाजपा तीसरी बार
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चुनावी बांड की कहानी, निर्मला सीतारमण की परेशानी

(आलेख : राजेंद्र शर्मा) हाई कोर्ट के आदेश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके सह-आरोपी बनाए गए कर्नाटक के भाजपा के नेताओं तथा ईडी अधिकारियों ने बेशक राहत की सांस ली
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धर्मनिरपेक्षता : पश्चिमी या आधुनिक?

(आलेख : राम पुनियानी) भारत का स्वाधीनता संग्राम बहुलतावादी था और उसका लक्ष्य था धर्मनिरपेक्ष एवं प्रजातांत्रिक मूल्यों की स्थापना। यह हमारे संविधान की उद्देशिका से भी जाहिर है, जिसमें स्वतंत्रता, समानता
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शहादत हार नहीं है

सैयद रिजवान मुस्तफा – [email protected] इस दुनिया में जब भी जुल्म और अत्याचार का अंधकार फैलता है,जो इंसानियत को कुचलने का प्रयास करते हैं। तब एक आवाज़ उठती है जो उन सभी
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मायावती का उदास हाथी

मेहरू जाफर (मूल अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद: एस आर दारापुरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट) मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) एक उदास हाथी में तब्दील होने लगी है, जिसकी एक
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समाज के सांप्रदायीकरण की परियोजना है अग्निवीर योजना

(आलेख : सुभाष गाताडे) सत्य में अप्रत्याशित रूप से सामने आने की अद्भुत क्षमता होती है। ऐसा ही कुछ विवादास्पद ‘अग्निवीर योजना’ के साथ हुआ है — सेना में चार साल के