आईसीडीएस सुपरवाइजर एसोसिएशन की पत्रकार वार्ता में नियम विरुद्ध स्थानातंरण का विरोध

लखनऊ
भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 देश में अभिव्यक्ति की आजादी देता है और संगठन बनाने और उसे चलाने का अधिकार देता है। कर्मचारी संगठन बुनियादी रूप से कर्मचारियों का जो गुस्सा और समस्या है उसे सूत्रबद्ध करते हैं और शासन प्रशासन के संज्ञान में लाते हैं, ताकि उनका समाधान हो सके और विभागीय कार्य शांति से पूर्ण होते रहे। लेकिन icds विभाग मौजूदा समय में इस शांति को भंग करने में लगा है। कर्मचारी आंदोलन का चौतरफा दमन किया जा रहा है। जानबूझ कर साजिश के तहत नियम विरुद्ध स्थानातंरण किए गए हैं यह कार्रवाई लोकतंत्र के लिए अशुभ है। ऐसी स्थिति में विभाग को दमनकारी नीति वापस लेनी चाहिए और आईसीडीएस में नियम विरुद्ध किए गए सुपरवाइजर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के ट्रांसफर को वापस लिया जाए। यदि विभाग इस दिशा में कार्यवाही नहीं करता तो मजबूरी में हमें 1 अगस्त से अनिश्चतकालीन घरना करना पड़ेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी विभाग की होगी। यह बातें प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में आईसीडीएस सुपरवाइजर्स एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष रेनू शुक्ला और महामंत्री शशिकांता ने कहीं।

उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से विभाग में सुपरवाइजर्स की पदोन्नती लम्बित है प्रभारी बनाकर सुपरवाइजर्स का शोषण किया जा रहा है और एसीपी का भी लाभ नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ट्रांसफर नीति में कहा गया कि पदाधिकारी बनने के 2 वर्ष की अवधि तक ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके सुपरवाइजर्स एसोसिएशन के प्रांतीय पदाधिकारियों समेत जिला स्तरीय पदाधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया। जबकि एक वर्ष पूर्व ही सुपरवाइजर एसोसिएशन का चुनाव हुआ है जिसके बारे में विभाग को पूर्व मे सूचना दी गई है। इतना ही नहीं विकलांग, बीमार और छोटे बच्चों की माताओं वाली सुपरवाइजरों का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी ट्रांसफर नीति के विरुद्ध है स्थानांतरण नीति में स्पष्ट उल्लेख है कि पूरे प्रदेश में जो एक ही स्थान पर सबसे ज्यादा समय से है उसका स्थानांतरण पहले किया जाए किंतु विभाग द्वारा ऐसा न करके मात्र लखनऊ और उसके आसपास के जिलों से स्थानांतरण किए गए और महज कर्मचारी नेताओं के उत्पीड़न के लिए की गई कार्यवाही है, जिसे वापस लिया जाना चाहिए। पिछले एक हफ्ते से पूरे प्रदेश की मुख्य सेविकाओं द्वारा काली पट्टी बांधकर सरकार का ध्यानाकर्षण कराया जा रहा है और मुख्यमंत्री जी के नाम ज्ञापन भी भेजे गए। लेकिन अभी तक विभाग ने हमारी मांगों के संदर्भ में कोई कार्यवाही नहीं की है इसलिए यह फैसला लिया गया है कि 1/8/2023 को लखनऊ में इंदिरा भवन पर अनिश्चितकालीन घरना किया जाएगा। उन्होंने सभी कर्मचारी संगठनों से दमनकारी नीतियों के विरुद्ध लोकतंत्र व शांति के लिए शुरू हो रहे सत्याग्रह आंदोलन का समर्थन करने और शामिल होने की अपील भी की।

उन्होंने कहा कि महिला उन्नति, समृद्धि और स्वावलंबन की बड़ी बातें प्रदेश में हो रही है। लेकिन महिलाओं के विभाग आईसीडीएस में न्यूनतम अधिकार भी शासन प्रशासन के द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्षों से सुपरवाइजर के एसीपी और पदोन्नति की मांग उठाई जा रही है लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। इसी तरह से विभाग की अन्य महिला कार्मिकों के न्यूनतम सवाल भी हल नहीं किए जा रहे हैं। परिणामतः महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। पत्रकार वार्ता में अर्चना वर्मा, ममता यादव, सुघा अग्निहोत्री, सुमन देवी, सरिता चैधरी, रश्मि सिंह, निरूपमा, संगीता उमराव, अनिता गौतम, स्मिता, सुधा मौर्या, शशी सिंह आदि पदाधिकारी शामिल रहे।