बाबा साहब देश के संविधान के शिल्पकार है: राज्यपाल

बाबा साहब देश के संविधान के शिल्पकार है: राज्यपाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक नेे आज बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा ‘बाबा साहेब अम्बेडकर का आधुनिक भारत के विकास में योगदान‘ विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो0 जी0 हरगोपाल नेशनल लाॅ स्कूल बंगलुरू, सुश्री अंजुबाला सांसद, कुलपति डाॅ0 आर0सी0 सोबती, डाॅ0 देवस्वरूप, प्रो0 पी0सी0 जैन, छात्र-छात्राओं सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

राज्यपाल ने सर्वप्रथम बाबा साहेब की 125वीं जयंती पर अपनी आदरांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर का अद्भुत व्यक्तित्व दूसरों को प्रेरणा देने वाला है। बाबा साहब ने देश को बहुत कुछ दिया है। वे प्रकाण्ड विद्वान, समाज सुधारक, संविधान विशेषज्ञ और मानवतावादी अर्थशास्त्री थे। उन्होंने कहा कि हमें अपना मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या हम बाबा साहब के विचारों के अनुरूप समाज के लिए कुछ कर रहे हैं। 

राज्यपाल ने कहा कि वास्तव में बाबा साहब देश के संविधान के शिल्पकार है। बाबा साहब ने संविधान सभा में राज्यपालों के दायित्व पर जो चर्चा की है उसको पढ़कर लगता है कि बाबा साहब ने जो चित्र बनाया था वह आज भी सही दिखता है, और उनकी दूरदर्शिता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि वे तीव्र बुद्धि और दूरदर्शी व्यक्तित्व के धनी थे। 

श्री नाईक ने कहा कि बाबा साहब में समानता के आधार पर सबको साथ लेकर चलने की क्षमता थी। समाज को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लोगों को शिक्षित करने का आग्रह किया। डा0 अम्बेडकर ने कालेज की स्थापना की तथा कानून की पढ़ाई के लिए सांयकालीन कक्षाओं की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि बाबा साहब का मानना था कि शिक्षा और संघर्ष के आधार पर समाज आगे बढ़ सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि डा0 अम्बेडकर राष्ट्र को सर्वोपरि मानते थे। वे छूआ-छूत के विरोधी थे। अस्पृश्यता के विषय को उन्होंने तर्क के साथ इस तरह जोड़ा कि सामने वाले को, सामाजिक न्याय कैसा हो उसके बारे में जानकारी हो सके। आजादी के बाद वे केन्द्र में मंत्री भी बने। बाबा साहब और डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्री परिषद में रहते हुए देश के लिए अद्भुत काम किया। वैचारिक मतभेद के कारण दोनों ने मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया था। बाबा साहब में अपने विचारों की प्रमाणिकता के साथ अडिग रहने की क्षमता सलाम करने योग्य है। उन्होंने कहा कि हमें बाबा साहब की इस क्षमता को व्यवहार में लाने का संकल्प लेना होगा। 

श्री नाईक ने कहा कि बाबा साहब के विचारों को सीमित न रखते हुए उसे समाज के बीच लाने की जरूरत है। जिस समाज से हम आते हैं उस समाज में भी उन्हीं विचारों को लेकर जायें। हमें अपने चरित्र और व्यवहार से ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जो बाबा साहब के विचारधारा के अनुरूप हो और जहाँ गरीब से गरीब आदमी भी समाज में समाधान के साथ रह सकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

संगोष्ठी में कुलपति प्रो0 आर0सी0 सोबती ने स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखें।

Lucknow, Uttar Pradesh, India