भारत ‘माता की जय’ राष्ट्रीय घोष है: मोहन भागवत

भारत ‘माता की जय’ राष्ट्रीय घोष है: मोहन भागवत

अहमदाबाद। ‘भारत माता की जय’ नारे पर छिड़े विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर बयान दिया है। अहमदाबाद में वर्ष प्रतिपदा उत्सव में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ में एक ही नारा चलता है ‘भारत माता की जय’। उन्होंने कहा कि भारत ‘माता की जय’ राष्ट्रीय घोष है। ऐसे में राष्ट्रीय घोष करने में भला क्या सोचना। सारे समाज को राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति के लिए तैयार करना है। यह हमें सामूहिक संकल्प लेना है।

भागवत ने कहा कि केवल संकल्प से काम नहीं होगा, हमें बदलना होगा। हम उपदेश से नहीं उदाहरण से समझाते है। संघ का प्रभाव बढ़ा है। उससे ज्यादा उसके प्रति विश्वास बढ़ा है। हमें राष्ट्रीयता का परिचय देना होगा। संघ में बोलने का काम नहीं है, काम का बोलना है। संघ के विचार हमने लोगों के सामने रखे हैं। यह हमें करना है। तभी हर एक के मुख से आवाज़ आएगी ‘भारत माता की जय’। उन्होंने कहा कि हम देश के लिए सब कुछ दे देंगे।

सर संघचालक ने स्वयंसेवक की खूबियां गिनाते हुए कहा कि जब भावनाएं भड़क जाती हैं तब भी स्वयंसेवक स्थिर रहता है। स्वयंसेवक स्वार्थवश नहीं बनता है। किसी मज़बूरी से स्वयंसेवक मत बनो। भय, स्वार्थ और मजबूरी से दूर रहे, उसी में संघ और स्वयंसेवक का भला है।

उन्होंने कहा कि भारत का नवोत्थान प्रतीक्षा कर रहा था और कर रहा है। भारत की आज़ादी को सुरक्षित रखना आज भी सबसे बड़ा सवाल है। हम सभी में दोष है। हम अगर संगठित नहीं हुए तो जो हमें मिला है, उसे सुरक्षित रखना मुश्किल होगा।

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