बाल श्रमिकों की बढ़ती हुई संख्या चिंताजनक: डा0 अनिता भटनागर जैन

बाल श्रमिकों की बढ़ती हुई संख्या चिंताजनक: डा0 अनिता भटनागर जैन

बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन की राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक सम्पन्न

लखनऊ:प्रमुख सचिव श्रम  डा0 अनिता भटनागर जैन की अध्यक्षता में आज बापू भवन सभागार में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन की राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक सम्पन्न हुई।

बैठक में सामने आया कि गत महीनों में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बाल श्रमिकों के चिन्हांकन में अत्यधिक कमी आयी है। चिन्हित किये गये बाल श्रमिको का सम्पूर्ण विवरण बाल श्रम ट्रेकिंग सिस्टम के साफ्टवेयर पर अपलोड किये जाने के निर्देश पूर्व में दिये गये थे परन्तु संबंधित जिले इस संबंध में पूर्ण विवरण अपलोड नही कर रहे हैं जहाँ से अपलोडिंग हो रही है वहाँ से सिर्फ बाल श्रमिक का नाम, पता ही अपलोड हुआ है जबकि उसके शैक्षिक पुनर्वासन, परिवार के पुनर्वासन, क्षतिपूर्ति वसूली, अभियोजन दायर करने की स्थिति अपलोड नही हो रही हैं। 

बैठक में निर्देश दिये गये कि बाल श्रमिकों के चिन्हांकन एवं उनके पुनर्वासन हेतु जिलास्तर पर आगामी 16 से 20 फरवरी तक एक विशेष अभियान चलाया जाय। इसी प्रकार आगामी माह मई, सितम्बर, नवम्बर, 2016 व फरवरी 2017 में भी इसी प्रकार के विशेष अभियान पूरे प्रदेश में चलाये जायेंगे। मुख्य सचिव उ0प्र0 शासन के निर्देशानुसार चिन्हांकरण का अभियान प्रत्येक त्रैमास में जनपद स्तर पर चलाया जाना है। इस सम्बन्ध में सभी जिलो में गठित रेस्क्यू टीम्स को सक्रिय करने के निर्देश भी दिये गये हैं।

बैठक में बाल श्रमिकों की बढ़ती हुई संख्या पर चिन्ता व्यक्त की गयी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बाल श्रमिकों की संख्या-21.76 लाख पहुंच गयी है जबकि वर्ष 2001 में प्रदेश में बाल श्रमिकों की संख्या 19.27 लाख थी। जहाँ एक ओर पूरे देश में बाल श्रमिकों की संख्या में कमी आयी है वही उ0प्र0 में इसमें वृद्धि हुई है।

चिन्हांकित बाल श्रमिकों का आयु प्रमाण-पत्र 48 घण्टे के अन्दर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिये जाने की व्यवस्था है, परन्तु समीक्षा में यह पाया गया कि स्थानीय स्तर पर इस शासनादेश का अनुपालन में नही हो पा रहा है। इस योजना का प्रभावी अनुपालन एवं पी0एच0सी0/सी0एच0सी0 स्तर पर भी बाल श्रमिकों के आयु परीक्षण/प्रमाणीकरण की व्यवस्था किये जाने के निर्देश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिये गये। अभी बाल श्रमिकों के आय-प्रमाण पत्र बनाने में तीन-चार दिन लग रहे हैं। किन-किन सी0एच0सी0 में एक्सरे मशीने स्थापित है उसकी सूची 31 जनवरी तक प्रमुख सचिव श्रम को उपलब्ध कराने तथा 04 फरवरी तक चिकित्सा विभाग इस सम्बन्ध में अपने स्तर पर निर्देश जारी कर दें।

चिन्हित बाल श्रमिकों के शैक्षिक पुनर्वासन की समीक्षा में पाया गया कि इस वित्तीय वर्ष में कुल 212 बच्चों का शैक्षिक पुनर्वासन (विद्यालय में प्रवेश) कराया जा चुका है चिन्हांकित 1238 बच्चों का प्रवेश अभी नही हो पाया है। इस सम्बन्ध में बेसिक शिक्षा विभाग को कार्य योजना बनाने तथा अपने बी0आर0सी0/सी0आर0सी0 एजेण्डे में शामिल करने के निर्देश दिये गये हैं। लेकिन प्रवेशित बच्चों के संबंध में शिक्षा विभाग से पूर्ण सूचना प्राप्त नही हो पा रही है। बाल श्रमिकों के विद्यालयों में प्रेवश के उपरान्त उनकी विद्यालयों में निरन्तरता बनाये रखना तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराया जाना अत्यन्त आवश्यक है। अतः बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के विद्यालयों में प्रवेश के साथ ही कक्षा एवम् विद्यालय, जिसमें प्रवेश कराया गया है कि सूची श्रम विभाग को भी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश बैठक में उपस्थित बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिये गये। बैठक में यह भी बताया कि बहुत से स्कूलों द्वारा बाल श्रमिकों की फर्जी टी0सी0 जारी कर दी जा रही है जिसमें उनकी आयु बढ़ाकर दिखायी जाती है। ऐसे मामलों में संलिप्त स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही के भी निर्देश दिये गये। 

बाल श्रमिकों के परिवारों के आर्थिक पुनर्वासन हेतु चिन्हित बाल श्रमिक के परिवार के वयस्क बेरोजगार सदस्य को रोजगारपरक/आय-जनित कार्यक्रमों से आच्छादित किए जाने की समीक्षा में यह पाया गया कि जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स की नियमित बैठकें आयोजित नही की जा रही हैं।

प्रमुख सचिव ने श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जनपदों के जिलाधिकारियों/मुख्य विकास अधिकारियों से व्यक्तिगत सम्पर्क कर टास्क फोर्स की बैठकों का आयोजन करायें तथा नई योजनाओं के अध्ययन के निर्देश दिये गये जिनमें बाल श्रमिकों के परिवारों का पुनर्वासन कराया जा सके। इसके लिए उपश्रमायुक्त कानपुर/बरेली को नामित किया गया जो 05 फरवरी तक अपनी अध्यन रिपोर्ट शासन को सौपेंगे।

बैठक में कण्डीशनल कैश ट्रान्सफर योजना की भी व्यापक समीक्षा की गयी। उत्तर प्रदेश देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जो कि बाल-श्रमिकों के लिए इस योजना का संचालन कर रहा है। यह योजना प्रदेश के 10 जिलों कानपुर, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बुलन्द शहर, सोनभद्र, आजमगढ़ व फिरोजाबाद में संचालित की जा रही है। 

बैठक में यूनीसेफ सहायतित कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गयी। बैठक में उपस्थित यूनीसेफ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्ष 2015 में यूनीसेफ के सहयोग से जनगणना वर्ष 2011 का डेस्क रिव्यू, बाल श्रम उन्मूलन हेतु राज्य व जिला स्तरीय कार्य योजना को तैयार करने में सहयोग, बाल श्रम विषय 06 जिलों में आई0सी0पी0एस0 से संबंधित संस्थानों व अन्य विभागों (शिक्षा, महिला व बाल विकास, स्वास्थ्य, पुलिस व पंचायती राज) एवं अन्य स्टेकहोल्डरों का प्रशिक्षण कार्यक्रम, मिर्जापुर व सोनभद्र में माइग्रेशन से संबंधित अध्ययन एवं बाल श्रम के प्रति जन-जागरण व जनचेतना जागृत करने हेतु सोनभद्र, मिर्जापुर, जौनपुर व श्रावस्ती जनपदों में रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इसी प्रकार इस वर्ष वाराणसी में मई दिवस पर एक जनजागरण कार्यक्रम और बाल श्रम विषय पर विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त जिला श्रावस्ती, मिर्जापुर व सोनभद्र में एक जेन्डर सेन्सिटाइजेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित कराया गया है।

बैठक में बताया गया कि लखनऊ के एक किसी एक स्थान को चिन्हित कर यूनीसेफ के सहयोग से उसे बाल श्रमिक विहीन जोन बनाया जाना भी प्रस्तावित है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India