राजपथ पर पहली बार विदेशी फ़ौज की टुकड़ी

राजपथ पर पहली बार विदेशी फ़ौज की टुकड़ी

फ्रांस के सैन्‍य दस्‍ते ने लिया गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में हिस्सा

नई दिल्‍ली: देश में 67वां गणतंत्र दिवस मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। राजपथ से ऐतिहासिक लालकिले तक हर साल होने वाली परंपरागत गणतंत्र दिवस परेड में इस बार फ्रांस के सैनिकों के एक दस्ते को शामिल किया गया। यह पहला अवसर है, जब किसी विदेशी सैन्य टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में हिस्सा लिया।

परेड में फ्रांसिसी दस्ते का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल पॉल बरी कर रहे थे। फ्रांस के 76 सैनिकों का यह दस्ता उस देश के सबसे पुराने रेजिमेंटों में से एक है। राजपथ पर फ्रांस का दस्ता जब मार्च पास्ट करता हुआ गुजर रहा था तब सलामी मंच पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद मौजूद थे जो इस समारोह में मुख्य अतिथि थे।

लियोन स्थित 48 सदस्यीय ‘द म्यूजिक आफ द इंफैंट्री’ ने दो सैन्य धुने बजाईं और वहां उपस्थित लोगों ने उनका करतल ध्वनि से स्वागत किया। अफगानिस्तान में दो बार सेवा देने वाले बरी ने गणतंत्र दिवस समारोह के बारे में कहा कि राजपथ पर ऐसी एक महत्वपूर्ण परेड में हमारे सैनिकों का हिस्सा लेना गर्व और सम्मान की बात है। दिल्ली क्षेत्र के चीफ आफ स्टाफ मेजर जनरल राजेश सहाय ने कहा कि परेड एक नया आकार ले रही है और विदेशी दस्ते को इसमें शामिल करना नियमित बनाया जाना चाहिए। परेड में हिस्सा लेने वाला फ्रांस का दस्ता 35वें इंफैट्री रेजिमेंट का है जिसके 1604 में फ्रांस के लॉरेन में गठन हुआ था। इसे अब तक 12 युद्धक सम्मान मिल चुके हैं। यह पांचवा अवसर है जब फ्रांस के राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र समारोह में मुख्य अतिथि बने हैं। 

गौर हो कि पिछले हफ्ते राजस्थान के बीकानेर में शुरू हुए साझा सैन्य अभ्यास-शक्ति में हिस्सा लेने के लिए फ्रांसीसी सेना का एक टुकड़ी आई थी। इस टुकड़ी में फ्रांस की सेना के 56 जवान हैं। मेजर थिबौत डि लाकोस्ते इसका नेतृत्व कर रहे थे। इसी टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस पर फ्रांस का प्रतिनिधित्व किया। दरअसल दोनों मुल्कों के बीच रक्षा सहयोग में मजबूती तब आई थी जब पिछले साल अप्रैल, 2015 में पीएम मोदी ने पेरिस यात्रा की थी।

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