लन्दन में मोदी ने दुनिया से माँगा बराबरी का दर्जा

लन्दन में मोदी ने दुनिया से माँगा बराबरी का दर्जा

लंदन : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत दुनिया की मेहरबानी नहीं चाहता है बल्कि वह बराबरी चाहता है और पिछले 18 महीनों में यह शुभ संकेत सामने आने लगा है कि आज भारत से जो भी बात करता है वह बराबरी से बात करता है।

प्रधानमंत्री ने वेम्ब्ले स्टेडियम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और विशाल संख्या में भारतीय समुदाय के लोगों की उपस्थिति में कहा, ‘‘दुनिया को भारत ने अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। भारत दुनिया से महरबानी नहीं चाहता। भारत दुनिया से बराबरी चाहता है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले 18 महीने के अपने अनुभवों से मैं कह सकता हूं कि आज जो भी भारत से बात करता है, बराबरी से बात करता है। उल्लेखनीय है कि 18 महीने पहले मोदी के नेतृत्व में भारत में राजग सरकार सत्ता में आई थी।

मोदी ने कहा, ‘‘आज दुनिया का हर देश भारत से जुड़ना चाहता है लेकिन अब वह ‘विन.विन’ के फामूर्ले के साथ जुड़ना चाहता है। आगे बढ़ना चाहता है तो कदम से कदम मिलाकर बढ़ना चाहता है। और मैं इसे आने भविष्य के शुभ संकेत के रूप में देख रहा हूं।’’

उन्होंने कहा कि भारत ने जो गति और दिशा पकड़ी है, भारत और दुनिया के लोग बहुत जल्दी उसके फल को भी देखना शुरू कर देंगे।

उन्होंने कहा कि 12 साल पहले वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में यहां आए थे और आज प्रधानमंत्री के रूप में नयी जिम्मेदारी के साथ आए हैं।

मोदी ने कहा कि देशवासियों ने जो नयी जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरा करने के लिए मैं भरपूर कोशिश कर रहा हूं और मैं देशवासियों को यह विश्वास दिलाता हूं कि जो सपने आपने देखें हैं, हर हिन्दुस्तानी ने देखें हैं, उसे पूरा करने का समथ्र्य भारत में है।

भारत में गरीबी के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 18 महीने के अपने अनुभवों से मैं कह सकता हूं कि भारत को अब गरीबी में रहने का कोई कारण नहीं है। हमने बिना कारण गरीबी को पाल रखा है । आदतन हमें गरीबी को पुचकारने में मजा आने लग गया है।’’ उन्होंने कहा कि लेकिन सवा सौ करोड़ आबादी वाले जिस देश में 80 करोड़ लोग 35 साल से कम उम्र के हों, यानी जो देश जवानी से लबालब भरा हो, वह देश अब पीछे नहीं रह सकता है, वह विकास की इस यात्रा में रूक नहीं सकता।

इस अवसर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने मोदी की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ब्रिटेन में भारतीयों का बड़ा योगदान है और वह दिन दूर नहीं जब एक इंडियन ब्रिटिश, ब्रिटेन का प्रधानमंत्री होगा। मोदी के ‘अच्छे दिन..’ के नारे का जिक्र करते हुए कैमरन ने कहा कि किसी को भरोसा नहीं था कि एक चायवाला विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री हो सकता है। लेकिन उन्होंने ऐसा करके दिखाया। अच्छे दिन आने वाले है..उनकी यह जो दृष्टि है, मुझे पूरा विश्वास है कि अच्छे दिन जरूर आयेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत में बड़े पैमाने पर विविधिता उसकी आन, बान, शान और शक्ति है।’ उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर रहीम और कबीर की बातें हम सबको प्रेरणा देती हैं। सूफी परंपरा अगर बलवान हुई होती और इस्लाम में ही सूफी परंपरा का प्रभाव बढ़ा होता और जिसने भी सूफी परंपरा को समझा होता तब वह हाथ में बंदूक लेने का विचार नहीं करता।

भारत में विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां सौ भाषाएं, 1500 बोलियों और हजारों खानपान की पद्धतियां और सैकड़ों वेशभूषाएं हैं। इतनी सारी विविधताएं हैं लेकिन यह विविधता हमारी विशेषता भी है, और हमारी आन, बान, शान भी है और हमारी शक्ति भी है।

मोदी ने कहा कि यह भारतीय समुदाय ने सिखाया है कि विविधताओं के बीच भी सबसे साथ मिलकर जिया जाता है, अपनी परंपराओं को बचाते हुए, दूसरों को बिना खरोंच पहुंचाते हुए.. कैसे घुलमिलकर रहा जा सकता है, इसी से हिन्दुस्तान की सही पहचान बनती है।