बिहार में हार राम मंदिर को भूलने का नतीजा: साधु-संत

बिहार में हार राम मंदिर को भूलने का नतीजा: साधु-संत

अयोध्या। दशकों से भाजपा की राजनीति का केंद्र बिंदु रही रामनगरी अयोध्या और यहां के साधु-संत बिहार चुनाव में भाजपा की करारी शिकस्त की वजह भाजपा का अपने मार्ग से भटकना मान रहे हैं। राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े अयोध्या के वरिष्ठ संतों ने चुनावी नतीजों के बाद भाजपा पर आरोप लगाया है कि हिंदुत्व के नाम पर केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा सरकार अयोध्या में राम मंदिर और भगवान राम को भूल गई, जिसके चलते पहले दिल्ली और फिर बिहार में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर अब भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा ने राम की उपेक्षा बंद नहीं की तो यूपी के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को ऐसे नतीजों का सामना करना पड़ सकता है।

राम मंदिर आन्दोलन के पुरोधा प्रतिवादी भयंकर स्वर्गीय परमहंस राम चन्द्र के शिष्य और दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास ने भाजपा कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद मूल मुद्दों से भटक गई है। इससे देश की जनता का विश्वास भाजपा से कम हो रहा है। अगर भाजपा को अपना खोया हुआ जनाधार वापस चाहिए तो उसे अपने मूल मुद्दों पर वापस आना होगा।

श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने भाजपा की हार पर मोदी का बचाव करते हुए कहा कि जीत पर बधाई सबको मिलती, इसलिए हार पर भी सबकी जि़म्मेदारी है। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो अयोध्या के साधु-संतों ने सभी से अयोध्या में मंदिर विवाद खत्म कर भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त करने की अपील की है।

भाजपा से सांसद रह चुके श्रीराम जन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास वेदांती ने मोदी को आड़े हाथों लेते हु कहा कि मोदी अपने मार्ग से भटक चुके हैं। देश की जनता ने उन्हें एक हिन्दू नेता के रूप में स्वीकार किया था, लेकिन उन्होंने सत्ता में आते ही मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति शुरू कर दी। उन्होंने कश्मीर के लिए तो 80 हजार करोड़ दे दिए, लेकिन अयोध्या और राम मंदिर को भूल गए। मोदी के रहते उम्मीद नहीं है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के विषय में कोई कदम उठाया जा सकेगा। अयोध्या और राम की उपेक्षा का फल भाजपा को बिहार में मिल गया है।

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