डॉन छोटा राजन

डॉन छोटा राजन

इसी 18 अक्टूबर को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दो दशक से फरार अंडरवर्ल्ड डॉन राजेंद्र सदाशिप निखालजे उर्फ छोटा राजन को इंडोनेशियाई पुलिस ने बाली में दबोच लिया। खबर है कि उसने सरेंडर किया है जबकि छोटा राजन का कहना है कि उसने आत्मसमर्पण नहीं किया है बल्कि वह अपनी जान बचाने के लिए महफूज जगह तलाश रहा है। ऐसे में भारत उसको सबसे सुरक्षित नजर आया और उसने बड़े ही नाटकीय ढ़ग से अपने को गिरफ्तार करवा दिया। अब एक नई बात सामने निकलकर आ रही है कि छोटा राजन को 15 दिन पहले ही हिरासत में ले लिया गया था। खुफिया एजेंसियों ने छोटा राजन को इस बात के लिए मनाया कि संभावित हमले से बचने के लिए अब सरेंडर करने में ही उसकी भलाई है। राजन जानता था कि छोटा शकील सिडनी में उसकी हत्या करने की फिराक में था। ऑस्ट्रेलिया ने राजन को ट्रैक करने के लिए भारत से संपर्क किया। उसकी गिरफ्तारी के लिए बाली को चुना गया जिसकी भनक दाऊद तक को नहीं लगने दी गई। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उसकी गिरफ्तारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ किसी ‘डील’ का नतीजा है। वह पिछले छह माह से सुरक्षित पनाह को लेकर कई भारतीय पुलिस अफसरों के संपर्क में था और पिछले सात साल से सिडनी में रह रहा था। इसकी जानकारी भारत की खुफिया एजेंसियों को भी थी। विदेशों में भारतीय एजेंसियों और अपने पुराने आका दाऊद इब्राहिम से बचता फिर रहा छोटा राजन आखिरी समय में अपने शहर मुंबई में रहना चाहता है। उसका कहना है कि अब वह गैंगस्टर की जिंदगी से मुक्त होना चाहता है और सभी आरोपों के मुकदमों का सामना कर सजा काटने को भी तैयार है। 

दाऊद का राइट हैंड छोटा शकील की वजह से छोटा राजन पकड़ा गया है। उसके गुर्गों ने छोटा राजन के फिजी वाले ठिकाने खोज लिए थे और इसी वजह से उसे भागना पड़ा।

अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की गिरफ्तारी के तौर-तरीकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन यह एक बड़ी कामयाबी है। इस ऑपरेशन को भारत, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया तीनों देशों की एजेंसियों ने मिलकर अंजाम दिया है। इससे अंडरवर्ल्ड गिरोहों को कड़ा संदेश जाएगा। इंडोनेशिया के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है फिर भी उम्मीद है कि राजन को भारत लाने में कोई खास अड़चन नहीं आएगी। छोटा राजन के कमजोर पड़ने की खबरें पिछले वर्षों में आई हैं। उसका अपना गिरोह बिखर गया है, डी कंपनी की ओर से उस पर कई हमले भी हुए थे और वह गंभीर रूप से बीमार चल रहा था।

 1970 के दशक में सिनेमा के टिकटों की ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली जैसे गोरखधंधे से अपने काले करियर की शुरुआत करने वाले छोटा राजन के खिलाफ अकेले मुंबई में ही हत्या, अपहरण, सट्टेबाजी और जबरन वसूली के 72 से अधिक मामले हैं, जिनमें 20 हत्या, 15 मकोका, एक पोटा और 4 मामले टाडा के तहत दर्ज किए गए हैं।   

छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई को लगने लगा है कि उसके जरिए दाऊद और टाइगर मेमन के बारे में पुख्ता जानकारियां हासिल हो सकेंगी। अब भारत छोटा राजन के सहारे मोस्ट वांटेड आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम तक पहुंचने का प्रयास करेगा और पाकिस्तान पर और अधिक दबाव बनाने में भी सफल होगा।

छोटा राजन

महाराष्ट्र के सतारा जिले का मूल निवासी 55 वर्षीय छोटा राजन के अपराध जगत की दिलचस्प कहानी है। उसका जन्म 1956 में एक दलित परिवार में हुआ था। उसके पिता बीएमसी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे। उसके अपराध जगत की कहानी डान राजन नायर उर्फ बड़ा राजन से मुलाकात के बाद शुरू हुई। उसने धीरे-धीरे बड़ा राजन से बिजनेस की बारीकियां सीखी और फिर चोरी और शराब तस्करी जैसे काम करने लगा। उन दिनों मुंबई में अंडरवर्ल्ड की बड़ी धाक थी। उस दौर में दाऊद इब्राहिम का उतना नाम नहीं था लेकिन अरुण गवली, करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे लोगों की मुंबई में तूती बोलती थी। हाजी मस्तान की मौत के बाद दाऊद इब्राहिम ने उसकी कमान संभाली। दाऊद और करीम लाला के वारिसों में गैंगवार छिड़ गयी। इसी गैंगवार में बड़ा राजन की मौत हो गई। 80 के दशक में बड़ा राजन का नाम मुंबई के अपराध जगत में काफी चर्चित हुआ करता था और उसका गैंग चोरी-चकारी और शराब तस्करी के धंधे में लिप्त था। छोटा राजन को बचपन से ही दादागीरी का शौक था इसलिए वह जल्द ही बुरी संगत में आ गया। बड़ा राजन को जब राजेंद्र निखालजे की दिलेरी की बातें पता चली तो उसने निखालजे को सिनेमा के टिकट की दलाली के साथ ही सोने की तस्करी के धंधे से जोड़ दिया। इसके साथ ही उसे घाटकोपर और चेंबूर में गिरोह की जिम्मेदारी भी सौंप दी।

जिद्दी है छोटा राजन

छोटा राजन शाॅर्प शूटर और जिद्दी किस्म का इंसान रहा है। उसका एक विडियो सामने आया है जिसमें उसने कहा कि वह दाऊद इब्राहिम या किसीे दूसरे गैंगों से डरता नहीं है। 1989 में वह दुबई में दाऊद के भाई नूरा की शादी में गया था लेकिन भारत नहीं लौटा। राजन की पत्नी सुजाता निखालजे अपनी तीन बेटियों के साथ मुंबई में ही रहती है। राजन की बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है और छोटी बेटी स्नातक में पढ़ रही है।

डॉन छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद उसका विश्वस्त सहयोगी विकी मल्होत्रा धंधे की बागडोर संभाल सकता है। मल्होत्रा लगभग 20 साल से छोटा राजन का सबसे विश्वस्त सहयोगी बना हुआ है। मल्होत्रा को साल 2005 में दिल्ली के अशोका होटल के बाहर से गिरफ्तार किया गया था लेकिन 2010 में उसे जमानत मिल गई। मुम्बई बम धमाके में पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की दाऊद इब्राहिम से सांठगांठ की पुष्टि के बाद राजन 1996 में डी-कंपनी से अलग हो गया और दाऊद अंडरवर्ल्ड डॉन से आतंकवादी की श्रेणी में आ गया। राजन बैंकाक से अपने अंडरवर्ल्ड गतिविधियों को अंजाम देने लगा। भारतीय एजेंसियां दाऊद को खत्म करने में राजन की मदद ले रही थी लेकिन 2000 में दाऊद ने बैंकाक के अस्पताल में भर्ती राजन पर जानलेवा हमला करवाया। राजन बच गया लेकिन उसने दाऊद के साथ अघोषित करार किया कि वह डी-कंपनी के खिलाफ भारतीय एजेंसियों की मदद नहीं करेगा।

शूटरों का नेटवर्क 

छोटा राजन अपने शूटरों से नेट या वाट्सऐप कॉलिंग से संपर्क करता था। उसका निर्देश मिलते ही उसके शूटर एक्टिव हो जाते थे। उसका नंबर ट्रेस न हो पाने से उसके दुश्मनों को जल्दी उसकी भनक नहीं लग पाती थी, इसीलिए वह विदेशों में रहकर भी पूरी दुनियां में अपनी गतिविधियां आसानी से संचालित करता था। विदेश में मौजूदगी की जानकारी होने के बाद डी-कंपनी के सरगना दाऊद ने अपने खास कारिंदे छोटा शकील को छोटा राजन की घेराबंदी की जिम्मेदारी सौंपी थी। डी-कंपनी छोटा राजन को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानती है। वह हर वक्त उस पर अटैक करने की रणनीति तैयार करता रहता है लेकिन छोटा राजन भी सतर्क है और बचता फिर रहा है।

यूपी से शूटरों की सप्लाई 

छोटा राजन गैंग को देश भर में वारदात के लिए शूटरों की सप्लाई यूपी से होती है। बरेली जेल में बंद माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव का पूर्वांचल के शूटरों का पूरा नेटवर्क छोटा राजन इस्तेमाल करता है। इलाहाबाद का राजेश यादव छोटा राजन गैंग के लिए शूटरों के रिक्रूटमेंट का काम संभालता है। मुंबई के चर्चित काला घोड़ा शूटआउट और फरीद तनासा हत्याकांड में राजेश यादव और जफर मुबारक के नाम आए थे। जफर मुबारक जेल में बंद खान मुबारक का सगा भाई है। हाल ही में व्यापारी के सिर पर बोतल रखकर गोली चलाने व धमकी का विडियो जारी करने को लेकर खान मुबारक चर्चा में आया था।

डॉन छोटा राजन भले ही यूपी में किसी मामले में वांटेड नहीं है लेकिन उसके गिरोह के गुर्गे यहां सक्रिय जरूर हैं। छोटा राजन इनका इस्तेमाल मुंबई, पुणे समेत कई जगहों पर वारदातों में कर चुका है। उसके खिलाफ यहां कोई केस दर्ज नहीं है लेकिल वह सीबीआई द्वारा वांटेड है।

यूपी के अंबेडकरनगर का खान मुबारक और उसका भाई जफर मुबारक उसके सक्रिय सदस्य हैं। जफर मुबारक अपने एक अन्य साथी खेता सराय, जौनपुर निवासी ओसामा के साथ छोटा राजन के लिए मुंबई में हत्या करने गया था। छोटा राजन ने अपने ही खास साथी फरीद तनासा की हत्या कराई थी। राजन को सूचना मिली थी कि तनासा उसके विरुद्ध जा रहा है। इस हत्याकांड में जिन शूटरों का इस्तेमाल हुआ, उनमें अमावा खुर्द, सरपतहा जौनपुर के रवि प्रकाश सिंह, सुल्तानपुर के पंकज सिंह, अंबेडकरनगर के निखिल सिंह और सरायमीर, आजमगढ़ के शाकिब शामिल थे। इन सबके खिलाफ मुंबई में मुकदमे दर्ज हैं।

30 से ज्यादा शूटर गिरफ्तार

यूपी में छोटा राजन गैंग के अब तक 30 से ज्यादा शूटर गिरफ्तार हो चुके हैं। यूपी में उसका सबसे खास आदमी झूंसी का राजेश यादव और धूमनगंज का बच्चा पासी है। बच्चा पासी सभासद रह चुका है। इलाहाबाद के ही राजापुर का फैज उर्फ मास्टर भी छोटा राजन के नजदीकियों में से एक है। फैज बम बनाने में माहिर है। जनवरी 2009 में एसटीएफ ने कमर सईद और नईम अख्तर और नवंबर 2012 में बलरामपुर निवासी जहांगीर नामक शूटर को गिरफ्तार किया था। इन शूटरों ने छोटा राजन और अरुण गवली के लोगों के साथ मिलकर मुंबई में एक दर्जन से ज्यादा हत्याएं की हैं। फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी की हत्या के लिए छोटा राजन गैंग के एजाज लकड़वाला को यूपी के शूटर मुहैया कराए गए थे। बस्ती, मऊ, कौशांबी, चित्रकूट, आजमगढ़, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, सीतापुर, आजमगढ़ और जौनपुर में उसके गुर्गे हैं और इन जिलों से ही शूटर रिक्रूटमेंट का काम होता है।

पुजारी गैंग की तलाश शुरू

यूपी पुलिस और एसटीएफ हेमंत पुजारी गैंग के गुर्गों की तलाश मेें जुट गई है। दरअसल हेमंत पुजारी के अलग गैंग बनाने पर छोटा राजन गिरोह के कुछ गुर्गे उससे जुड़ गए थे। इसलिए जांच एजेंसियों ने छोटा राजन गिरोह में रह चुके हेमंत पुजारी के गुर्गों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। अभी तक जो चिह्नित किए गए हैं, उनमें यूपी के संत कबीरनगर जिले के इंद्रजीत चैधरी, सतीश चैधरी व दिलीप चैधरी, बस्ती के नरेंद्र उर्फ टीपू व योगेंद्र शर्मा, गोरखपुर पजावा का आफताब, पंकज सिंह, सतीश पांडेय व दिलीप चैधरी के नाम शामिल हैं। अंदेशा है कि छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद हेमंत पुजारी गैंग और भी अधिक सक्रिय हो सकता है। छोटा राजन गिरोह का एक और गुर्गा रंजीत उर्फ पप्पू निषाद पर भी एसटीएफ की नजर है। रंजीत और शाकिब दो ऐसे गुर्गे हैं, जो बिहार के मुंगेर जिले से असलहे मंगाकर इसकी आपूर्ति करते थे। अवैध असलहों की आपूर्ति गिरोह के लगभग सभी गुर्गों को हो चुकी है। छोटा राजन अपने साथियों से कभी-कभी काम लेता है जबकि हेमंत पुजारी गिरोह लगातार आपराधिक वारदात में लिप्त रहा है। भाड़े पर कत्ल से लेकर अपहरण व वसूली तक के जरायम में यह गिरोह लिप्त है। पूर्व में भी एसटीएफ हेमंत पुजारी गिरोह के कई गुर्गों को ऐसे ही आरोपों में गिरफ्तार कर चुकी है।

राजन का तैयार हो रहा है डोजियर 

केंद्र सरकार के निर्देश पर मुंबई पुलिस ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का डोजियर तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसमेें उसके काले कारनामों का पूरा ब्योरा होगा। इंडोनेशिया पुलिस को उसकी ही भाषा में छोटा राजन का डोजियर सौंपा जा सकता है। इस लिए मराठी से इंडोनेशिया भाषा में अनुवाद किया जा रहा है।

सिरदर्द बना राजन

मुंबई पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। कई पार्टियों में उसके हमदर्द हैं। उसकी गिरफ्तारी महाराष्ट्र के कई नेताओं और पुलिसवालों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। राजन का भाई दीपक निखालजे भी आरपीआई का नेता है। दीपक का दावा है कि वह राजन के संपर्क में नहीं है लेकिन हर शख्स जानता है कि भाई के भाऊ का घर कहां है। दीपक का कारोबार उसके भाई छोटा राजन के नाम पर ही फलफूल रहा है। वह फिल्म निर्माता भी है।

जेलों की कड़ी सुरक्षा  

 यूपी की जेलों में भी खलबली मच हुई है। कई जेलों में डॉन के साथी बंद हैं। लिहाजा जेलों का सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है। छोटा राजन के भारत लाए जाने की कवायद शुरू होते ही यूपी में फैले उसके नेटवर्क की गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों ने भी नजर गड़ा दी है। 

बोहरा कमेटी की रिपोर्ट 

छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने वोहरा कमेटी की रिपोर्ट संसद में रखने की वकालत की है। उनका कहना है कि देश को यह जानने का अधिकार है कि कौन षड्यंत्रकारी है और अंडरवर्ल्ड के पीछे कौन हैं। इस बारे में देश को बताया जाना चाहिए। राजनेताओं और अंडरवर्ल्ड के बीच सांठगांठ के बारे में वोहरा कमेटी ने 90 के शुरुआती दशक में रिपोर्ट सौंपी थी। ’’

 -दिलीप कुमार सिन्हा

वरिष्ठ पत्रकार