बिहार में नीतीश सरकार: सर्वे

बिहार में नीतीश सरकार: सर्वे

नई दिल्ली। बिहार में जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने जा रहा है, सर्वे में नीतीश कुमार और लालू यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया गया है। बिहार चुनाव पर इस सबसे बड़े सर्वे के मुताबिक, बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन दूसरे नंबर रहेगा और दोनों प्रतिद्विंदियों के बीच जीत का अंतर भी काफी बड़ा होने वाला है।

IBN7 और Axis द्वारा कराये गए चुनाव पूर्व सर्वे में बताया गया है कि 243 सीट वाली बिहार विधानसभा में जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को 137 ( ±8 ) सीट मिल सकती हैं। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 122 है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन (बीजेपी-एलजेपी-हम) को 95(±8 ) सीट मिल सकती हैं। सर्वे के मुताबिक, एसपी, बीएसपी, एनसीपी, एमआईएम को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ रहा है। यह सभी मिलकर 11 (±3 ) सीटें हासिल कर रहे हैं।

अगर इस चुनाव पूर्व सर्वे का निष्कर्ष सही साबित होता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में ही चुनाव मैदान में उतरे एनडीए को जोरदार चोट पहुंचेगी क्योंकि प्रधानमंत्री राज्य में बीजेपी के कैंपेन को भी लीड कर रहे हैं। यह वैसा ही है, जैसा वह पूर्व में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी कर चुके हैं।

सर्वे के मुताबिक, नीतीश कुमार की जेडीयू 69 ( ±5 ) सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। पार्टी ने 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। अगर ऐसा होता है तो 69 पर्सेंट का स्ट्राइक रेट काबिलेतारीफ होगा। लालू यादव की आरजेडी 100 में से 48 (±2 ) सीटों पर जीत हासिल करती दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा आश्चर्य कांग्रेस के लिए है, जिसके 40 में से 20 (±1 ) सीट जीतने के आसार दिखाई दे रहे हैं।

राज्य में बीजेपी 160 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सर्वे में उसके 82 ( ±5 ) सीट जीतने का अनुमान है। रामविलास पासवान की एलजेपी 2 (±1 ) सीटों पर जीतती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की ‘हम’ को 8 (±1 ) सीटें मिलने की बात सर्वे में सामने आई है। आरएलएसपी को 3 (±1 ) सीटें मिलती दिख रही हैं।

चुनाव पूर्व सर्वे में नीतीश कुमार और लालू यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया गया है। बिहार चुनाव पर इस सबसे बड़े सर्वे के मुताबिक, बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन दूसरे नंबर रहेगा और दोनों प्रतिद्विंदियों के बीच जीत का अंतर भी काफी बड़ा होने वाला है।

सर्वे में नीतीश कुमार और जेडीयू के नेतृत्व वाला गठबंधन 46% वोट पर कब्जा जमा रहा है, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के हिस्से में सिर्फ 38% वोट जा रहा है। गठबंधन के भीतर की बात करें तो जेडीयू के पास 26% वोट जा रहे हैं तो 15% वोट आरजेडी के खाते में जा रहा है, वहीं कांग्रेस 5% वोट पर कब्जा जमा रही है।

बीजेपी को 29% वोट मिलने का अनुमान है। एलजेपी को सिर्फ 4% और हम को 3% वोट मिलने के आसार सर्वे में दिखाई दे रहे हैं। बिहार चुनाव में एसपी, बीएसपी और एनसीपी का थर्ड फ्रंट सिर्फ 1% वोट को अपने पाले में करता दिख रहा है। अन्य दल 13% वोट हासिल कर सकते हैं।

जेडीयू-अरजेडी-कांग्रेस गठबंधन को 72% मुस्लिम वोट, 67% यादव वोट, 53% कुर्मी/कोइरी वोट, 31% ओबीसी और अन्य वोट, 42% एससी/एसटी वोट और 14% ऊंची जाति के वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले BJP-LJP-HAM गठबंधन को 10% मुस्लिम वोट, 21% यादव वोट, 36% कुर्मी/कोइरी, 53% ओबीसी और अन्य वोट, 38% एससी/एसटी और 73% ऊंची जाति के वोट मिल सकते हैं। अन्य को 18% मुस्लिम वोट, 12% यादव, 11% कुर्मी/कोइरी, 16% ओबीसी और अन्य, 20% एससी/एसटी और 13% ऊंची जाति के वोट मिल सकते हैं।

सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 10 हजार से कम कमाने वाले आय वर्ग का 36% वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। 10 हजार से 20 हजार महीना कमाने वाले आय वर्ग का 38 फीसदी और महीने में 20 हजार से ज्यादा कमाने वाले आय वर्ग का 40 फीसदी वोट बीजेपी गठबंधन को मिल सकता है।

जेडीयू गठबंधन 10 हजार से कम कमाने वाले आय वर्ग का 49%, 10 हजार से 20 हजार कमाने वाले आय वर्ग का 48% और 20 हजार से ज्यादा कमाने वाले आय वर्ग का 41% वोट हासिल कर सकता है।

अन्य दल 10 हजार से कम कमाने वाले आय वर्ग का 15%, 10 हजार से 20 हजार कमाने वाले आय वर्ग का 14% और 20 हजार से ज्यादा कमाने वाले आय वर्ग का 19% वोट हासिल करते दिखाई दे रहे हैं।

18 से 25 साल की उम्र के 40%, 26 से 35 साल की उम्र के 39%, 36 से 50 साल की उम्र के 38% और 50 साल से ऊपर आयु के 35% वोट बीजेपी गठबंधन के हिस्से में आता दिखाई दे रहा है।

वहीं, 18 से 25 साल वाले आयु वर्ग का 46%, 26 से 35 साल की उम्र के 46%, 36 से 50 साल की उम्र के 46% और 50 साल की उम्र से ज्यादा आयु वर्ग का 45% वोट महागठबंधन के पक्ष में आने की बात सर्वे से सामने आ रही है। यह दिखाता है कि हर आयु वर्ग में जेडीयू गठबंधन आगे है।

18 से 25 आयु वर्ग का 14%, 26 से 35 आयु वर्ग के 15%, 36 से 50 आयु वर्ग के 16% और 50 की उम्र से ज्यादा के 20% वोट अन्य के खाते में जा सकते हैं।

सर्वे में शामिल हुए सभी लोगों में से 43% ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की पहली पसंद बताया। बीजेपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी 33% लोगों की पसंद बने। इस रेस में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी शामिल हैं, उन्हें 6% लोगों ने अपनी पहली पसंद बताया। वहीं, पूर्व सीएम जीतनरान मांझी को 4%, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को 3%, अन्य को 6% ने पसंद बताया। 5 फीसदी लोग ऐसे भी थे, जिनकी कोई पसंद नहीं थी।

सर्वे में शामिल हुए 38% लोगों ने चुनाव में विकास को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। 13% लोगों के लिए महंगाई, बिजली और सड़क, 10% लोगों ने शिक्षा, 8% लोगों ने रोजगार, 6% ने सुधार, 3% ने अपराध, 4% ने करप्शन, 2% ने खेती, 2% ने अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं और सिर्फ एक फीसदी ने शौचालय को मुद्दा बताया।

आखिर आप किस आधार पर वोट करेंगे? इस सवाल के के जवाब में 40% लोगों ने राज्य सरकार के कामकाज को आधार बताया। 36% लोगों के लिए केंद्र सरकार का प्रदर्शन अहम था। 12% लोगों के लिए स्थानीय एमएलए का प्रदर्शन मायने रखता है, जबकि 12% लोगों ने इस सवाल पर कोई जवाब ही नहीं दिया।

52% वोटर्स ने जवाब दिया कि उनके लिए नीतीश मॉडल मोदी मॉडल से बेहतर है जबकि 48 फीसदी ने मोदी मॉडल को अपनी पहली पसंद बताया।

जवाब देने वाले 45% लोगों की राय थी कि नीतीश कुमार उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरे हैं। 17 फीसदी ने  कहा कि कांग्रेस को अपनी उम्मीदों पर खरा बताया जबकि 38 फीसदी ने यह महसूस किया कि कांग्रेस उनकी अपेक्षा पर सही नहीं उतर सकी।

एलजेपी सांसद और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को बिहार के सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर 33 फीसदी मत मिले। लालू के बेटे तेजस्वी 22 फीसदी मत के साथ उनके पीछे रहे। लालू यादव की बेटी मीसा भारती को 5 फीसदी मत मिले। राहुल गांधी को 18 फीसदी, शाहनवाज हुसैन को 19 फीसदी और पप्पू यादव को 3 फीसदी लोगों ने सबसे लोकप्रिय नेता बताया।

सर्वे के मुताबिक, हैदराबाद के सांसद और एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी का बिहार की राजनीति में प्रवेश कोई बड़ा बदलाव लेकर नहीं आया। 52 फीसदी लोगों ने माना कि इसका कोई असर नहीं होने वाला है जबकि सिर्फ 6 फीसदी ने इसका असर होने की बात कही। 42 फीसदी ऐसे भी थे जिन्होंने किसी भी तरह की संभावना जताने से ही इनकार कर दिया।

65 लोगों की टीम ने 24576 लोगों से बात की, जिसके आधार पर चुनावी नतीजों से पहले यह पूर्वानुमान लगाया गया है।