वादों के निस्तारण में मध्यस्थता के योगदान की अहम भूमिका: जस्टिस लोकुर

वादों के निस्तारण में मध्यस्थता के योगदान की अहम भूमिका: जस्टिस लोकुर

लखनऊ: मध्यस्थता एवं सुलह समझौता प्रोजेक्ट समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान एवं गुजरात राज्यों के परिक्षेत्रीय सेमिनार का आयोजन ‘‘मध्यस्थता‘‘ विषय पर न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ में किया गया। 

उक्त दो दिवसीय सेमिनार के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय ने समस्त प्रतिभागी राज्यों के मध्यस्थों, मध्यस्थता केन्द्रों के समन्वयकगण व अन्य उपस्थित अतिथियों का आह्वान किया है कि सकारात्मक सोच के साथ मध्यस्थता के प्रति लोगों को जागरूक किया जाय। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक उपयुक्त मामलें मध्यस्थता केन्द्रों को संदर्भित किये जायें। जनसामान्य की पहुॅच मध्यस्थता केन्द्रों पर सुनिश्चित हो जिससे कि वादकारियों के मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केन्द्रों के विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया जारी है। आपराधिक मामलों के भी उपयुक्त प्रकरणों को मध्यस्थता के लिए संदर्भित किया जा सकता है। 

श्री लोकुर ने कहा कि मध्यस्थता को सीमित न करके अत्यंत ही वृहद दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए जिससे कि उसके परिक्षेत्र को विस्तारित किया जा सके और अधिकाधिक लाभ जनसामान्य को प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही मध्यस्थता केन्द्रों के कम्प्यूटराइजेशन की कार्यवाही की जायेगी। मध्यस्थता केन्द्रों के लिए उपलब्ध आधारभूत ढांचे का सदुपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता का स्वर्णिम भविष्य है ।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री आर0के0 अग्रवाल ने कहा कि मध्यस्थता से वादों को हल करने में दोनों पक्षों में आपसी सौहार्द तथा आम सहमति से एकता, प्रेम, सुख-शान्ति मिलती है और वादकारियों को  चिंता से मुक्ति मिलती है।

न्यायमूर्ति डा0 डी0वाई0 चन्द्रचूड़, मुख्य न्यायाधिपति, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/मुख्य संरक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अपने उद्बोधन में रेखांकित किया गया कि सेमिनार का महत्व यह है कि मध्यस्थता के क्षेत्र में हम कहां पर हैं और किस प्रकार से मध्यस्थता को और अधिक प्रभावी किया जा सके इसके लिए सभी का निरन्तर प्रयास एवं योगदान आवश्यक है। 

उक्त दो दिवसीय सेमिनार में मध्यस्थता के समस्त पहलुओं, प्रबन्धन में कठिनाई, जागरूकता, विषमताएं कठिनाइयों, निदान आदि के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से विचार विमर्श किया गया। आज समापन सत्र में प्रतिभागी राज्यों की ओर से दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के द्वारा मध्यस्थता से संबंधित चुनौतियां एवं उनके निदान के संबंध में अपनी-अपनी प्रस्तुति दी गयी। 

उक्त सेमिनार के समापन के अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के  न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर, न्यायमूर्ति  आर0के0 अग्रवाल, न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय,  मुख्य न्यायमूर्ति डा0 डी0वाई0 चन्द्रचूड़, मुख्य न्यायाधिपति, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/मुख्य संरक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, एवं  न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, वरिष्ठ न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की सुलह समझौता समिति के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति  दिलीप गुप्ता एवं  उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ की सुलह समझौता समिति के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति एस0 हसनैन एवं अन्य सम्मानित न्यायमूर्तिगण उपस्थित रहे। 

Lucknow, Uttar Pradesh, India