मध्यस्थता ने विवादों के समाधान में पूरे विश्व में महत्वपूर्ण छाप डाली है: न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर

मध्यस्थता ने विवादों के समाधान में पूरे विश्व में महत्वपूर्ण छाप डाली है: न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर

लखनऊ: मध्यस्थता एवं सुलह समझौता प्रोजेक्ट समिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान एवं गुजरात राज्यों के परिक्षेत्रीय सेमिनार का आयोजन ‘‘मध्यस्थता‘‘ विषय पर न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, गोमती नगर, लखनऊ में सर्वोच्च न्यायालय के  न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर  द्वारा आज आज न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के नवनिर्मित आडीटोरियम में न्यायमूर्ति आर0के0 अग्रवाल, न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, मुख्य न्यायमूर्ति डा0 डी0वाई0 चन्द्रचूड़, मुख्य न्यायाधिपति, उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/मुख्य संरक्षक, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, एवं  न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, वरिष्ठ न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय/कार्यपालक अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की सुलह समझौता समिति के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति  दिलीप गुप्ता एवं उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ की सुलह समझौता समिति के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति एस0 हसनैन एवं अन्य सम्मानित न्यायमूर्तिगण की गरिमामयी उपस्थिति में उद्घाटन किया गया।

कान्फ्रेन्स के उद्घाटन भाषण में न्यायमूर्ति मदन बी0 लोकुर, न्यायाधीश,  सर्वोच्च न्यायालय/सदस्य एम.सी.पी.सी. ने मध्यस्थता के प्रभाव के सम्बन्ध में अवगत कराया कि इस तथ्य में कोई संदेह नहीं है कि मध्यस्थता के सम्बन्ध में विवादों के समाधान में पूरे विश्व में एक महत्वपूर्ण छाप डाली है। वैकल्पिक विवाद समाधान पद्धति के रूप में मध्यस्थता सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 द्वारा प्राधिकार प्राप्त करती है और मध्यस्थता व्यय रहित, त्वरित निस्तारण पद्धति के रूप में अपना अलग स्थान ग्रहण कर रही है। 

उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में गठित एम.सी.पी.सी. वर्ष 2005 से लगातार मध्यस्थता को सर्वसामान्य द्वारा अपने विवादों के समाधान हेतु अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चला रहा है जिसके लिए नियमित रूप से इस प्रकार के क्षेत्रीय अधिवेशन आयोजित किए जा रहे है। उन्होंने  कहा कि मध्यस्थता की सफलता के लिए आवश्यक है कि हम सभी को अपनी मानसिकता में परिवर्तन करना होगा। उन्होंने अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है कि मध्यस्थता को बढ़ावा दिया जाना उनके व्यवसायिक हितों के कतई प्रतिकूल नहीं है बल्कि मध्यस्थता के आधार पर त्वरित निस्तारण होने की दशा में अधिकाधिक पक्षकार अपने वास्तविक विवादों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगें जिससे कि जनसामान्य का विश्वास भी न्यायिक व्यवस्था में बढ़ेगा। 

 कान्फ्रेन्स को सम्बोधित करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री आर0के0 अग्रवाल द्वारा मध्यस्थता के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया गया। मध्यस्थता के कम खर्चीली, त्वरित, जवाबदेह,  गोपनीय एवं अनौपचारिक आदि के होने के सम्बन्ध में भी प्रकाश डाला गया। मध्यस्थता की दशा में निपटारा होने में सौहार्दपूर्ण निपटारा होने का उल्लेख किया गया। उन्होंने अब्राहम लिंकन की पंक्तियों को उद्धत करते हुए मध्यस्थता को बढ़ावा देने का अनुरोध किया है। मध्यस्थता के उपरान्त पक्षकारों को व्यवहारिक प्रभावी निदान प्राप्त होता है। 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मा0 मुख्य न्यायमूर्ति डा0 डी0वाई0 चन्द्रचूड़़ ने उद्बोधन में उत्तर प्रदेश में प्रचलित न्यायालय आधारित मध्यस्थता व्यवस्था पर व्यापक दृष्टिपात करते हुए स्पष्ट किया कि मध्यस्थता एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षित मध्यस्थ विवाद के पक्षकारों के मध्य समाधान पर पहुंचने में सहायता करता है।  मध्यस्थ स्वयं कोई समाधान अथवा अधिनिर्णय अधिरोपित नहीं करता है वरन् ऐसा वातावरण तैयार करता है जिसमें विवाद के पक्षकार स्वयं अपनी शर्तो के अनुरूप विवाद का समाधान कर सकें। 

उन्होंने मध्यस्थता के विभिन्न विचारणीय पहलुओं का उल्लेख करते हुए संख्यात्मक नहीं वरन् गुणात्मक मध्यस्थता पर बल दिया है। मध्यस्थता की सफलता के लिए न सिर्फ मध्यस्थतों के प्रशिक्षण वरन् न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि प्रिलिटीगेशन मध्यस्थता के पूर्व विवाद विद्यमान न होने की दशा में भी डील मीडिएशन को बढ़ावा दिया जाए। वैकल्पिक विवाद प्रतितोष पद्धति के उपयुक्त विवाद प्रतितोष पद्धति में परिवर्तन के साथ ही वर्तमान में सौहार्दपूर्ण विवाद प्रतितोष पद्धति (।उपबंइसम क्पेचनजम त्मेवसनजपवद ैलेजमउद्ध के रूप में मध्यस्थ्ता महत्वपूर्ण स्थान ग्रहण कर रही है। 

हाईकोर्ट इलाहाबाद के माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति श्री राकेश तिवारी द्वारा सेमिनार में उपस्थित अतिथिगणों का नवाबों की नगरी लखनऊ में स्वागत करते हुए वर्तमान परिवेश में मध्यस्थता की भूमिका को रेखांकित किया गया।  उन्होंने मध्यस्थता की भावना को आत्मसात करने पर बल दिया है। सेमिनार के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश शासन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए न्याय विभाग, वित्त विभाग तथा प्रेस मीडिया एवं सूचना विभाग का विशेष आभार प्रकट किया है। 

सेमिनार में प्रतिभागी राज्यों में से गुजरात राज्य से माननीय न्यायमूर्ति श्री मुकेश आर0 शाह, राजस्थान राज्य से माननीय न्यायमूर्ति श्री अजय रस्तोगी एवं माननीय न्यायमूर्ति विनीत कोठारी, हिमाचल प्रदेश राज्य से माननीय न्यायमूर्ति श्री संजय करोल, मध्य प्रदेा राज्य से माननीय न्यायमूर्ति श्री सतीश चन्द्र शर्मा एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री शील नागू एवं दिल्ली राज्य से माननीय न्यायमूर्ति श्री जयन्त नाथ के साथ-साथ अधिवक्ता, मध्यस्थ तथा जनपदों में संचालित मध्यस्थता केन्द्रों के समन्वयकगण द्वारा भी प्रतिभागिता की गयी। 

कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति श्री दिलीप गुप्ता, न्यायाधीश, माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद/अध्यक्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय मध्यस्थता एवं सुलह समझौता समिति द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने  कान्फ्रेन्स में उपस्थित विभिन्न राज्यों के सम्मानित न्यायमूर्तिगण एवं माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उपस्थित न्यायमूर्तिगणों का विशेष आभार प्रकट किया है।

Lucknow, Uttar Pradesh, India