अम्बेडकरनगर : पशु खा रहे पोषाहार, आंगनबाड़ी केन्द्रों की दशा में नहीं हो रहा सुधार

अम्बेडकरनगर : पशु खा रहे पोषाहार, आंगनबाड़ी केन्द्रों की दशा में नहीं हो रहा सुधार

अम्बेडकरनगर। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी बाल विकास एवं बाल पुष्टाहार योजना समूचे जनपद में औधे मुंह है। ज्यादातर केन्द्रों का संचालन महज कागजों में ही हो रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए आने वाले बाल पोषाहार की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहायिकाओं व मुख्य सेविकाओं एवं सीडीपीओ से लेकर अधिकारियों की मिली भगत से कालाबाजारी कर ली जा रही है। जिसके कारण बच्चों व गर्भवती महिलाओं में वितरित होने वाला पुष्टाहार पशुओं का आहार बन रहा हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा चलायी जा रही हाटकुक्ड व पुष्टाहार योजना जिले में पूरी तरह धराशायी होकर रह गयी है। विभागीय उच्चाधिकारियों की अनदेखी के कारण योजना औंधे मुंह है। हाटकुक्ड योजना के तहत बच्चों को गर्म भोजन व फल वितरण का प्रावधान है, लेकिन गर्म भोजन व फल की कौन कहे यहाँ बच्चों को सत्तू भी मयस्सर नहीं है। योजना के तहत समुचित एवं संतुलित भोजन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। जनपद में ज्यादातर आंगनबाड़ी केन्द्र कागज में ही संचालित हो रहे हैं।

यूं तो प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के अलावा विकास खण्ड स्तर पर मुख्य सेविकाओं की तैनाती की गयी है। एक एक मुख्य सेविका को कई कई न्यायपंचायतों का प्रभार भी सौंपा गया है। लेकिन सारी कवायद सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह जा रही है। बच्चों के पोषाहार को गांवों में पशुओं को खुलेआम खिलाते देखा जा सकता है। आखिर कालाबाजारी पर अंकुश लगे भी तो कैसे जब केन्द्रों की जमीनी हकीकत जानने व जांचने की जहमत विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी व सी.डी.पी.ओ. द्वारा ही नहीं उठायी जाती है। मुख्य सेविकाओं द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के रजिस्टरों का सत्यापन कर दिया जाता है। जिसके एवज में तयशुदा रकम भी इन मुख्य सेविकाओं एवं सीडीपीओ से लेकर विभाग के उच्चाधिकारियों तक पहुंच जाती है। जिले में ज्यादातर केन्द्रों का संचालन प्राथमिक विद्यालयों से ही होता है। लिहाजा प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को मिलने वाले मघ्यान्ह भोजन से इन बच्चों का भी काम चला लिया जाता है। इतना ही नहीं योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पुष्टाहार में भी लीपापोती की जा रही है। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर महिलाओं को न संतुलित भोजन मिल पा रहा है न ही पुष्टाहार।

बीते कुछ महीनों पूर्व जिले की आई.सी.डी.एस. के कार्यक्रम अधिकारी की हड़कम्पी कार्यशैली के मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित होने से प्रतीत होता था कि एकीकृत बाल विकास परियोजना में वर्षों से व्याप्त भ्रष्टाचार अब जिले से लगभग समाप्त हो जाएगा, जिसके लिए डी.पी.ओ. दुर्गेश प्रताप सिंह कृत संकल्प हैं। अक्टूबर 2014 में जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण करने वाले दुर्गेश प्रताप सिंह ने जिस तरह का ऐक्शन व स्टाइल दिखाना शुरू किया था वह महज एक खानापूर्ति थी, साथ ही अपने अधीनस्थों से पारम्परिक रूप से चली आ रही मासिक बंधी रकम में बढ़ोत्तरी किये जाने का एक ड्रामा भर ही था। हालांकि डी.पी. सिंह ने रेनबोन्यूज से कहा था कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन ही उनका प्रयास है और शासन द्वारा मिलने वाले धन का सदुपयोग होगा लेकिन उनके सभीं वक्तव्य हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं। सभी योजनाओं का संचालन मात्र कागजों तक ही सीमित है, कुछेक केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर मीडिया मैनेज करके अपने मनमाफिक खबरें छपवाकर प्रचार करवा लिया जाता है।

ईमानदार जिलाधिकारी आई.ए.एस. विवेक के बारे में यह खबर जोरों पर है कि आज-कल सरकारी विभागीय भ्रष्टाचार को खत्म करने की उन्होंने मुहिम चला रखी है। जिसके चलते कई विभागों के अधिकारी सकते में आ गये हैं। लोगों को यह उम्मीद बंधी है कि बाल विकास जैसी महत्वाकांक्षी सरकारी परियोजना में मची लूट व मनमानी पर भी जिलाधिकारी विवेक अंकुश लगाने की सोचेंगे। समय-समय पर रेनबोन्यूज जनहित में उन्हें और आई.सी.डी.एस. के विभागीय उच्चाधिकारियों को स्मरण दिलाता रहेगा इस उम्मीद के साथ कि इस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार व अनियमितता अवश्य ही दूर होगी।

रिपोर्ट- सत्यम सिंह

Uttar Pradesh, India