लखनऊ:  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा0 लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने आज सवाल किया कि घटनाओं पर कार्यवाही का भरोसा देते मुख्यमंत्री कार्यवाही क्या कर रहे है ? सरकार की हनक, धमक और इकवाल तो दिख नहीं रहा आखिर क्यों अखिलेश सरकार की कड़ी और कठोर कार्यवाही के आश्वासन के बावजूद अपराधी और अराजक तथ्यों के हौसले पस्त नहीं हो रहे है। सीतापुर के महमूदाबाद थाने में हुई घटना की न्याययिक जांच की मांग करते हुए डा0 बाजपेयी ने कहा कि थाने पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को हटाना चाहिए, साथ ही घटना की विस्तृत विवेचना हो।

डा0 बाजपेयी ने राज्य की कानून व्यवस्था पर हमलवर रूख अख्तियार करते हुए कहा कि हमीरपुर से लेकर सीतापुर तक की घटना में जिन पर नियंत्रण करने की जिम्मेदारी वहीं अरोपों की जद में थे। सीतापुर के महमूदाबाद में तो परिजन सीधे-सीधे अरोप लगा रहे है कि पुलिस ने जीनत के साथ दुराचार किया, हत्या करने के बाद घटना को खुदखुशी का रूप देने के लिए लाश को फंदे से लटका दिया।

डा0 बाजपेयी ने खुदखुशी की पुलिसिया थ्योरी पर सवाल करते हुए कहा कि पैर जमीन पर होंगे तो फंदे से कैसे मौत होगी ? फिर जब युवती को थाने लाया गया तो क्या लिखा-पढ़ी हुई महिला पुलिस बुलाई गई, नियम है कि धारा 160 के अंतर्गत किसी भी महिला को पूछताछ के लिए थाने या कही और नहीं बुलाया जायेगा फिर किस आधार पर पुलिस के आलाधिकारी पूछताछ की बयानबाजी कर रहे है।

डा0 बाजपेयी ने कहा कि समाचार पत्रों में जो चित्र प्रकाशित हुआ है उसमें पहला पैर मृतका का आगे है दूसरा पैर पीछे़, फंदे से लटकी युवती के पांव जमीन को छू रहे है फिर लटकते समय कैसे खिचाव पड़ा होगा और उसकी सांसे रूकी होगी।

डा0 बाजपेयी ने कहा कि हमीरपुर में भी मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेटी जांच की घोषणा की किन्तु जिलाधिकारी ने सीबीआई की जांच कराने की संस्तुति की हैं। बाराबंकी के कोठी प्रकरण में मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रेटी जांच की बात कही थी किन्तु जांच सीबीसीआईडी से हो रही है। यहां भी मुख्यमंत्री मजिस्ट्रेटी जांच की बात कर रहे है जिस तरह से प्रशासनिक अदूरर्शिता का परिचय देते हुए भीड़ नियत्रंण में नाकामयाब स्थानीय प्रशासन रहा है स्वाभाविक रूप से मजिस्ट्रेटी जांच में अपनी कमियों और नाकामियों को क्यों उजागर करेगा। जबकि इस पूरे घटनाक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारियों को भी चोटे आई है।