नहीं रहा भारत का मिज़ाइल मैन

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शिलांग के अस्पताल में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का निधन

शिलांग: पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का अचानक बीमार पड़ने से निधन हो गया। 84 साल के कलाम एक समारोह में हिस्सा लेने शिलांग गए थे।

कलाम सोमवार शाम करीब 6:30 बजे आईआईएम में एक व्याख्यान के दौरान गिर गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक एम खारकरांग ने यह जानकारी दी।

शिलांग स्थित बेंथनी अस्पताल से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति को शाम सात बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन उनमें जीवन के लक्षण नहीं देखें जा रहे थे। डॉक्टर उन्हें तुरंत आईसीयू ले गए, लेकिन 45 मिनट की कोशिश के बावजूद उनमें कोई हलचल नहीं दिखी और शाम 7.45 डाक्टरों से उन्हें मृत घोषित कर दिया।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘भारत रत्न’ एपीजे अब्दुजल कलाम का जन्म एक नाविक के घर हुआ था। कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडू के रामेश्वरम में हुआ था। 1963 में कलाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान, इसरो से जुड़े। और सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल यानी SLV के प्रॉजेक्ट मिशन से जुड़े। कलाम ने अपनी मेहनत और बुद्धिमता से ना सिर्फ विज्ञान के क्षेत्र में प्रसिद्धि हासिल की और भारत के राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया। कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति थे।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और ‘भारत रत्न’ एपीजे अब्दुजल कलाम भारत में मिसाइल मैन के नाम से भी जाने जाते थे। 1962 में वे 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' में शामिल हुए। कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है। 1980 में कलाम ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। उन्हीं के प्रयासों की वजह से भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को डिजाइन किया। खास बात यह है कि इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया।

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