केजीएमयू शिक्षकों को मिलेंगे एसजीपीजीआई समान वेतन व भत्ते

केजीएमयू शिक्षकों को मिलेंगे एसजीपीजीआई समान वेतन व भत्ते

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। 

 मंत्रिपरिषद ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ (के.जी.एम.यू.) के शिक्षकों के वेतन एवं भत्ते एस.जी.पी.जी.आई. लखनऊ के समान किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत के.जी.एम.यू. के शैक्षिक पदों पर एस.जी.पी.जी.आई. से समानता के आधार पर प्रस्तावित पुनर्गठित ढांचा को स्वीकार कर लिया गया है। इसके क्रियान्वयन से के.जी.एम.यू. के समस्त शिक्षकों की वेतन विसंगतियां दूर होंगी तथा उनके वेतन व भत्ते एस.जी.पी.जी.आई. के समान हो जाएंगे। 

ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा के.जी.एम.यू. लखनऊ द्वारा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में किए गए विशेष योगदान तथा राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त ख्याति के दृष्टिगत के.जी.एम.यू. के समस्त शिक्षकों के वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए उनके वेतन एवं भत्ते एस.जी.पी.जी.आई. के समान करने की घोषणा की गई थी।यह निर्णय इसी क्रम में लिया गया है। 

कामधेनु डेयरी इकाईयों की स्थापना हेतु बैंक ऋण  पर 05 वर्ष तक ब्याज की प्रतिपूर्ति के प्रस्ताव को मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने कामधेनु डेयरी इकाईयों की स्थापना हेतु बैंक ऋण पर 05 वर्ष तक ब्याज की प्रतिपूर्ति के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

इसके तहत कामधेनु योजना में बैंक से लिए गए ऋण पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 05 वर्षाें तक ब्याज की प्रतिपूर्ति अधिकतम 32.82 लाख रुपये, मिनी कामधेनु योजना में 13.66 लाख रुपये तथा माइक्रो कामधेनु योजना में 7.29 लाख रुपये प्रति इकाई सरकार द्वारा की जाएगी। कामधेनु योजना में 05 वर्षाें में प्रति इकाई 211 लाख रुपये, मिनी कामधेनु योजना में 113.86 लाख रुपये तथा माइक्रो कामधेनु योजना में 58.90 लाख रुपये का लाभ लाभार्थियों को होने का अनुमान है।

मंत्रिपरिषद ने यह भी निर्णय लिया है कि सिर्फ गाय की डेयरी स्थापित करने तथा निर्धारित अवधि में यूनिट पूर्ण करने पर कामधेनु योजना के तहत 05 लाख रुपये, मिनी कामधेनु योजना में 2.5 लाख रुपये तथा माइक्रो कामधेनु योजना में 1.25 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिया जाएगा। 

(30.38 लाख रु0) लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में वहन करना होगा तथा 75 प्रतिशत (91.14 लाख रु0) बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त करना होगा। मिनी कामधेनु योजना (50 दुधारू पशुओं) में एक इकाई की पूर्ण लागत 50.58 लाख रुपये है। इकाई लागत का 25 प्रतिशत (12.64 लाख रु0) लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में वहन करना होगा तथा 75 प्रतिशत (37.94 लाख रु0) बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त करना होगा। इसी प्रकार माइक्रो कामधेनु योजना (25 दुधारू पशुओं) में एक इकाई की पूर्ण लागत 26.99 लाख रुपये है। इकाई लागत का 25 प्रतिशत (6.74 लाख रु0) लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में वहन करना होगा तथा 75 प्रतिशत (20.25 लाख रु0) बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त करना होगा।

नव संचालित मेडिकल काॅलेजों के समीप पी.पी.पी. माॅडल पर माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना को मंजूरी 

मंत्रिपरिषद ने नव संचालित एवं निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल काॅलेजों के परिसर में अथवा उसके समीप पी.पी.पी. माॅडल पर माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना/संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के नव स्थापित एवं निर्माणाधीन मेडिकल काॅलेजों में चिकित्सा शिक्षकों एवं कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए विभिन्न उपाए किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में नवस्थापित एवं निर्माणाधीन मेडिकल काॅलेज परिसर में अथवा उसके समीप सी.बी.एस.ई. से मान्यता प्राप्त गुणवत्तायुक्त माध्यमिक विद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया है। 

यह कार्य पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप माॅडल पर किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल काॅलेज परिसर में अथवा उसके समीप राज्य सरकार द्वारा सम्बन्धित संस्था को 02 एकड़ भूमि लीज पर निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी। विद्यालय का संचालन सी.बी.एस.ई. द्वारा मान्यता प्राप्त कर किया जाएगा तथा विद्यालय संचालकों का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा। उक्त समिति में सम्बन्धित मेडिकल काॅलेज के प्रधानाचार्य, मुख्य चिकित्साधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक सदस्य होंगे। 

विद्यालय में चिकित्सा शिक्षकों एवं मेडिकल काॅलेज के कर्मचारियों के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। इसमें कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ायी की व्यवस्था की जाएगी। इससे नवस्थापित मेडिकल काॅलेजों के चिकित्सा शिक्षकों तथा कर्मचारियों की तैनाती आकर्षक हो जाएगी। ऐसे विद्यालयों के लिए भूमि हेतु सम्यक धनराशि की व्यवस्था चिकित्सा शिक्षा विभाग के बजट में की जाएगी। 

अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 1,234 शिक्षकों के पद स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षकों के पदों के सृजन के सम्बन्ध में निदेशक उच्च शिक्षा, इलाहाबाद की संस्तुति के अनुसार 1,234 शिक्षकों के पदों को महाविद्यालय/विषयवार, कतिपय शर्ताें/प्रतिबन्धांे के अधीन, स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। 

ज्ञातव्य है कि रिट याचिका संख्या-4236/2014 वैभवमणि त्रिपाठी बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य तथा रिट याचिका संख्या-729/2012 डाॅ0 सुरेश कुमार पाण्डेय बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में गुणवत्तापरक शिक्षा की आवश्यकता के दृष्टिगत छात्रों की स्वीकृत संख्या के आधार पर प्रत्येक विषय का प्रत्येक सेक्शन में एक शिक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु यह निर्णय लिया गया है।

मंत्रिपरिषद ने 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियांे को संज्ञान में लिया 

मंत्रिपरिषद ने 14वें वित्त आयोग की संस्तुतियांे को संज्ञान में लिया है। ज्ञातव्य है कि 14वें केन्द्रीय वित्त आयोग का गठन जनवरी, 2013 में किया गया। आयोग द्वारा अपनी रिपोर्ट संस्तुतियों सहित श्री राष्ट्रपति को दिनांक 15 दिसम्बर, 2014 को प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट की कार्रवाई ज्ञापन सहित केन्द्र सरकार द्वारा दिनांक 24 फरवरी, 2015 को संसद में प्रस्तुत की गई। 

आयोग द्वारा यद्यपि राज्यों का विभाज्य पूर्ण में अंश 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया, परन्तु उत्तर प्रदेश के कर हिस्सेदारी में व्यापक कमी की गई है। विगत आयोग की तुलना में राज्य की कर में हिस्सेदारी 19.677 प्रतिशत से घटाकर 17.959 तथा सेवा कर मंे हिस्सेदारी 19.987 प्रतिशत से घटकर 18.205 प्रतिशत हो गई है। इसके अतिरिक्त 14वें वित्त आयोग द्वारा पूर्व आयोगों द्वारा राज्यों की विशिष्ट समस्याओं हेतु दिए जा रहे अनुदान को भी समाप्त कर दिया गया है। आयोग द्वारा प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को 35,776.56 करोड़ रुपये तथा नगर निकायों को 10,249.21 करोड़ रुपये की संस्तुति पंचाट अवधि वर्ष 2015-20 के लिए की गई है। 

आयोग द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) राजकोषीय परिवेश और वित्तीय समेकन रूपरेखा, जन सुविधाओं के मूल्य निर्धारण, पब्लिक सेक्टर उद्यमों और सरकारी व्यय प्रबन्धन प्रणाली संबंधी विषयों पर की गई संस्तुतियों के सन्दर्भ में भारत सरकार द्वारा कार्रवाई ज्ञापन में कहा गया है कि विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श कर इन सिफारिशों पर यथा समय निर्णय लिया जाएगा। 

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में  पदोन्नत कार्मिकों को पदावनत करने का प्रस्ताव मंज़ूर 

मंत्रिपरिषद ने उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 27 अप्रैल, 2012 के अनुपालन में उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गाें के लिए आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा-3(7) तथा उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली के नियम-8 (क) के अन्तर्गत परिणामी ज्येष्ठता का लाभ देकर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग मंे पदोन्नत कार्मिकों को पदावनत करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

ज्ञातव्य है कि सिविल अपील सं0-2608/2011 उ0प्र0 पावर कारपोरेशन लि0 बनाम राजेश कुमार व अन्य तथा उससे सहबद्ध सिंचाई विभाग की सिविल अपील सं0-2679/2011 उ0प्र0 राज्य व अन्य बनाम प्रेम कुमार सिंह व अन्य एवं अन्य संबद्ध अपीलों में मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय दिनांक 27 अप्रैल, 2012 में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3 (7) एवं उ0प्र0 सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली के नियम-8 (क) के प्रावधानों को अधिकारातीत ;न्सजतं टपतमेद्ध घोषित कर दिया गया है तथा यह निर्देश दिए गए हैं कि इन्दिरा साहनी के मामले में दिए गए फैसले की व्यवस्था ;क्पबजनउद्ध के आधार पर जो प्रोन्नतियां प्रदान की गई हैं एवं धारा-3 (7) एवं नियम-8 (क) के बगैर जो प्रोन्नतियां प्रदान की गई हैं, वह प्रभावित नहीं होंगी।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय दिनांक 27 अप्रैल, 2012 के अनुपालन हेतु मा0 उच्चतम न्यायालय में योजित अवमानना याचिका (सिविल) सं0-214/2013 अमर कुमार व अन्य बनाम मुख्य सचिव, उ0प्र0 शासन व अन्य के दृष्टिगत कार्मिक विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश दिनांक 30 मार्च, 2015 एवं उसके क्रम में प्रमुख अभियन्ता एवं विभागाध्यक्ष, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव के अनुसार सिंचाई विभाग में प्रोन्नति मंे आरक्षण तथा परिणामी ज्येष्ठता का लाभ प्राप्त कर दिनांक 28 अप्रैल, 2012 के पूर्व एवं दिनांक 15 नवम्बर, 1997 के बाद प्रोन्नत समूह-क के 64 अभियन्ताओं को पदावनत किए जाने तथा इसी प्रकार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अन्य संवर्गों में प्रोन्नत कार्मिकों के सम्बन्ध में निर्णय लिए जाने हेतु नियुक्ति प्राधिकारी को अधिकृत करने का निर्णय लिया गया है।

उ0प्र0 उप खनिज (परिहार) नियमावली-1963 के 38वां संशोधन अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने उ0प्र0 उप खनिज (परिहार) नियमावली-1963 के 38वें संशोधन को अनुमोदित कर दिया है। इस प्रकार नियमावली-1963 के नियम-8, नियम-12 व नियम-34 में प्रस्तावित संशोधनों को अनुमोदन प्राप्त हो गया है। 

इसके तहत नदी तल में अनन्य रूप से पाई जाने वाली उप खनिजों यथा बालू, मोरंग, बजरी, बोल्डर अथवा इनमें से कोई भी जो मिली जुली अवस्था में नदी तल में पाई जाती है के खनन पट्टों की अवधि 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किए जाने तथा वर्तमान में स्वीकृत उप खनिजों के खनन पट्टों की अवधि को राज्य सरकार द्वारा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने जैसे संशोधन शामिल हैं। इसी प्रकार नदी तल में मिश्रित अवस्था में पाए जाने वाले उप खनिजों की स्थिति को देखते हुए इनके पट्टों के द्वितीय नवीनीकरण के सम्बन्ध में विचार किए जाने सम्बन्धी संशोधन भी किए गए हैं, जिसके तहत द्वितीय नवीनीकरण इस शर्त के साथ किया जा सकता है कि पट्टाधारक वार्षिक धनराशि या अपरिहार्य भाटक की दुगनी धनराशि, वार्षिक धनराशि अथवा अपरिहार्य भाटक के रूप में भुगतान करेगा और द्वितीय नवीनीकरण की अवधि पट्टे की मूल अवधि से अधिक नहीं होगी। 

उ0प्र0 पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के कर्मियों को पुनरीक्षित ग्रेड वेतन स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के कर्मियों को पुनरीक्षित वेतन संरचना में वेतन बैण्ड एवं ग्रेड वेतन स्वीकृत कर दिया है। यह फैसला सार्वजनिक उपक्रमों/निगमों के कर्मियों को छठें केन्द्रीय वेतन आयोग के सन्दर्भ में गठित वेतन समिति-2008 के 7वें प्रतिवेदन की संस्तुतियांे पर लिए गए निर्णय तथा प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम विभाग की अध्यक्षता में गठित अधिकृत समिति की संस्तुतियों के क्रम में लिया गया है। 

ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम में 4 नियमित कर्मी कार्यरत हैं, जिन्हें यह लाभ अनुमन्य कराया जाएगा। इस निर्णय के फलस्वरूप आने वाले वित्तीय व्यय भार को निगम द्वारा अपने संसाधनों से वहन किया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर से कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं करायी जाएगी।  

Lucknow, Uttar Pradesh, India