अच्छे दिन आ चुके हैं: मोदी

अच्छे दिन आ चुके हैं: मोदी

नयी दिल्ली:  अच्छे दिनों को लेकर उनकी सरकार पर निशाना साधने वालों को आड़े हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि देश का बुरा वक्त बीत चुका है और अच्छे दिन आ गये हैं लेकिन कुछ लोग सरकार के कामों को धूमिल करने में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘यूनीवार्ता ’ के साथ साक्षात्कार में कहा , “ अच्छे दिन आ चुके हैं लेकिन कुछ लोग हमारे कामों को धूमिल करने में लगे हैं। ” उन्हाेंने कहा कि उनकी सरकार के आने से पहले देश बहुत बुरे दिनों से गुजर रहा था और हर रोज एक नया घोटाला सामने आ रहा था। प्रधानमंत्री ने कहा ,“सरकार सुन्न और देश हताश एवं निराश हो गया था। उन बुरे दिनों, बुरे कर्मों और बुरे कारनामों को याद किया जाए तो आपको लगेगा कि देश ने बुरे दिनों से मुक्ति पायी है।”

अपनी सरकार के एक साल के कामकाज पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अपने वादों पर हम खरे उतरे हैं। उन्होंने कहा ,“ हमने स्वच्छ, पारदर्शी और दक्ष सरकार दी है। मीडिया में प्रकाशित सर्वेक्षणों में भी पता चलता है कि लोगों ने हमारे एक साल के कामकाज को कमोबेश सराहा है।”   

विदेश यात्राओं के दौरान उनके बयानों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर श्री मोदी ने कहा,“ क्या कांग्रेस यह मानती है कि उसके स्कैम की देश के बाहर जानकारी नहीं थी, उन्हें शर्म स्कैम पर आनी चाहिए न कि उनके वर्णन पर।” उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में पूरे विश्व में भारत के प्रति निराशा का माहौल बन गया था। देश के प्रति इस नजरिये को बदलना जरूरी था। उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और दुनिया भर में जाकर भारत की शक्ति तथा संभावनाआें के बारे में संवाद करने का फैसला किया।

उन्होंने कहा ,“ मुझे इस बात का संतोष है कि विश्व में भारत की तरफ देखने का नजरिया बहुत ही सकारात्मक हुआ है । इस सफलता में हमारी सरकार की नीति, रणनीति और प्रयासों का तो योगदान है ही, साथ साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों का बड़ा योगदान है। ” उनका कहना था कि जनता ने तीस साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी और इससे निर्णायक सरकार की छवि बनी तथा इस वजह से दुनिया में विश्वास पैदा करने में आसानी हुई है।

श्री मोदी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं की साम्प्रदायिक टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव या उसके प्रति हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा“मैने पहले भी कहा है और इस बात को फिर कह रहा हूं कि किसी भी समुदाय के खिलाफ हिंसा या भेदभाव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बारे में मेरा रुख बिल्कुल साफ है कि सबका साथ, सबका विकास और मैं और मेरी सरकार इसी मंत्र पर चल रहे हैं।”

सरकार को कारपोरेट समर्थक तथा किसान और गरीब विरोधी बताने के विपक्ष के आरोप पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा ,“ जिन्होंने स्पेक्ट्रम और कोयला जैसे बेशकीमती प्राकृतिक संसाधन अपने चहेते उद्योगपतियों को कौड़ियों के भाव दे दिये उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है। ” उन्होंने कहा कि हर कोई जानता है कि 60 साल के कांग्रेस के शासन के बाद देश कहां खड़ा है , कांग्रेस गरीबों के नाम पर राजनीति करती रही लेकिन उसने वास्तव में उनके लिए क्या किया। देश में आज भी बड़े पैमाने पर गरीबी है।

श्री मोदी ने कहा,“ आपको उन्हीं लोगों से यह सवाल पूछना चाहिए कि यदि वे गरीबों के हितैषी थे तो देश में आज भी गरीबी क्यों है। गरीबी दूर करने से उन्हें किसने रोका था।” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने गरीबी के दुष्चक्र से लोगों को बाहर निकालने के लिए हर मोर्चे पर कदम उठाये हैं। इस संदर्भ में उन्होंने जन धन योजना, मुद्रा बैंक , मेक इन इंडिया , कौशल विकास , प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी , स्वच्छ भारत अभियान , महिलाओं को पुलिस में आरक्षण जैसे कदमों का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जिस संकल्प को लेकर चल रही है उससे 5-7 सालों में ही देश की तस्वीर बदल जायेगी। यही बात विपक्ष को विचलित कर रही है और उन्हें सोने नहीं दे रही है। इसीलिए वे हमारे कामों में बाधा डालने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। सरकार के अच्छी भावना के साथ उठाये गये कदमों को भी गरीब तथा किसान विरोधी कहा जा रहा है। लेकिन देश का गरीब और किसान समझदार है और हमारी नीयत तथा निष्ठा को समझता है।

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्ष के विरोध को ‘राजनीति से प्रेरित’ करार देते हुए श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार अभी भी सभी राजनीतिक दलों से इस विधेयक पर चर्चा और उनके सुझावों पर विचार करने को तैयार है। लेकिन उसके मुख्य उद्देश्यों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसमें सरकार को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन और सहयोग मिलेगा ।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी हितों को देखते हुए अचानक एक ऐसा कानून बनाया जो न किसानों के हित में था और न ही देश में विकास के हित में । इसकी खामियों के बावजूद किसानों के हित में भाजपा ने इसका समर्थन किया था। उनकी सरकार इन खामियों को दूर कर विधेयक लायी है जो किसानों तथा देश के दीर्घकालिक हितों में संतुलन कायम करता है।

 मेक इन इंडिया अभियान की आलोचना करने वालों को करारा जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह 80 करोड़ नौजवानों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। इसके चलते पिछले एक वर्ष में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 39 फीसदी बढा है। इसका प्रभाव देश से ज्यादा बाहर दिखता है। उन्होंने कहा “ फ्रांस , जर्मनी, कनाडा , चीन और कोरिया की यात्रा के दौरान मैंने जिनती बार मेक इन इंडिया बोला उससे ज्यादा वहां के उद्योगपति और उन देशों के राजनेता इसका इस्तेमाल कर रहे थे।” डिजिटल इंडिया का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि यह हमारी नसों में है और शीघ्र ही इसके परिणाम दूर सदूर गांवो मेें भी दिखेंगे।            

कृषि क्षेत्र की अनदेखी करने और कारपोरेट पर ज्यादा ध्यान देने के आरोपों को गलत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि की समस्या लंबे समय से चली आ रही है और दशकों के कुप्रबंधन के कारण यह स्थिति बनी है । उनकी सरकार ने इस क्षेत्र के लिए दीर्घावधि उपाय शुरू किये हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के विपरीत उनकी सरकार विश्व व्यापार संगठन में भी किसानों के हितों की रक्षा करने में सफल रही है। हाल की बेमाैसमी बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने में भी सरकार ने तत्परता से काम किया है।

पाकिस्तान के साथ संबंध बेहतर बनाने के सवाल पर श्री मोदी ने कहा कि इसमें सबसे बड़ी अडचन अशांति और हिंसा का माहौल है। उन्हाेंने कहा, “ पाकिस्तान से मात्र और मात्र एक ही उम्मीद है कि वह शांति और अहिंसा के मार्ग पर चले, बाकी कोई अडचन नहीं है। हिंसा का मार्ग न ही उनके लिये,न ही हमारे लिये लाभदायक है। गतिरोध टूटना चाहिये।

चीन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अपनी हाल की यात्रा के दौरान उन्होंने सीमा विवाद के बारे में भारत के दृष्टिकोण को बहुत स्पष्ट रूप से रखा। उनका कहना था कि भारत और चीन दोनों में विकास की क्षमता है और दोनों मिलकर गरीबी की समस्या का समाधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा ,“मैं और राष्ट्रपति शी जिनपिंग निजी तौर पर सहयोग और शांतिपूर्ण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

काले धन के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इसके लिए संसद में कठाेर कानून बनाया है। प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी एवं भ्रष्टाचार पर काबू करके काले धन की उत्पत्ति पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि 60 साल के संसदीय इतिहास में पिछला वर्ष अनूठा था कि संसद में काले धन पर लंबी चर्चा हुई। लोगों ने चर्चाओं में भारत के इस अभिशाप के बारे में बात करना शुरू किया।

 इस सवाल पर कि क्या सरकार और भाजपा के बीच तालमेल की कमी है श्री मोदी ने कहा कि दोनों में पूरा सामंजस्य है। सरकार पार्टी तथा देश के लोगों के साथ मिलजुल कर काम कर रही है ।

भाजपा नेताओं द्वारा धार्मिक भेदभाव की टिप्पणियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं की साम्प्रदायिक टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए आज कहा कि किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव या उसके प्रति हिंसा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

श्री मोदी ने कहा, “मैंने पहले भी कहा है और इस बात को फिर कह रहा हूं कि किसी भी समुदाय के खिलाफ हिंसा या भेदभाव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बारे में मेरा रुख बिल्कुल साफ है कि सबका साथ, सबका विकास और मैं और मेरी सरकार इसी मंत्र पर चल रहे हैं।”

इस सवाल के जवाब में कि वह पार्टी के उन तत्वों पर कैसे लगाम लगाएंगे जो साम्प्रदायिक आधार पर नफरत फैला रहे हैं, उन्होंने कहा, “कुछ दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियां की गयीं जो पूरी तरह गैरजरूरी थीं। हमारा संविधान देश के हर नागरिक को धार्मिक आजादी की गारंटी देता है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं हो सकता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार धर्म और जाति से ऊपर उठकर 125 करोड़ देशवासियों के विकास के प्रति पूरी तरह समर्पित है। देश में न केवल कानून बल्कि समाज के सामने भी हर धर्म बराबर है।

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