राहुल ने जाना फ्लैट खरीदारों का दर्द

राहुल ने जाना फ्लैट खरीदारों का दर्द

रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण विधेयक को बताया Pro-Builder

नई दिल्ली : दिल्ली और एनसीआर में घर खरीदने वाले मध्यमवर्गीय लोगों का एक बहुत बड़ा तबका आज परेशान है। किसी को समय से फ्लैट नहीं मिला, तो किसी को उस रूप में नहीं मिला जिसका बिल्डर ने वादा किया था। लोग ईएमआई भी दे रहे हैं और मकान का किराया भी। एक तरह से फ्लैट खरीददारों पर दोहरी मार पड़ रही है। इन्हीं समस्याओं को लेकर आज दिल्ली-एनसीआर के फ्लैट खरीददारों से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मुलाकात की।

कांग्रेस मुख्यालय में आज मकान खरीददारों की बात सुनने के बाद राहुल ने मीडिया से कहा कि जमीन के लिए किसानों और आदिवासियों को दबाया जाता रहा है, लेकिन अब मध्यम वर्ग के लोगों को भी दबाया जा रहा है। मोदी सरकार पर एक और हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने उस पर रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण विधेयक के प्रावधानों को खरीददार समर्थक की बजाय बिल्डरों के हित में तोड़ने मरोड़ने का आरोप लगाया।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि आज फ्लैट खरीददारों से मिलने के बाद उन्हें समझ आया है कि केवल किसान और आदिवासी ही नहीं हैं, बल्कि मध्यम वर्ग का आदमी भी भूमि के मुद्दों पर पिस रहा है। फ्लैट खरीददारों के साथ खड़े होने का आश्वासन देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पारदर्शिता के अभाव के चलते फ्लैट खरीदने वालों को अधर में छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘उन्हें यह बताया गया था कि उन्हें एक तय दिन को फ्लैट मिल जाएंगे लेकिन सालों से उन्हें फ्लैट नहीं मिले। उन्हें बताया गया था कि फ्लैट का सुपर डुपर एरिया बहुत अधिक होगा लेकिन जो दिया गया है वह कुछ अलग है।’

राहुल गांधी ने कहा कि किसी को वादा किया गया था कि फ्लैट से अच्छा नजारा दिखेगा लेकिन फ्लैट मिलने के कुछ महीनों बाद एक नयी इमारत खड़ी हो गयी और नजारा नजरों से ओझल हो गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार उस विधेयक को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है जो कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के नियमन के लिए लेकर आयी थी।

राहुल गांधी ने कहा, ‘मुख्य कमी जो की गयी है वह यह कि यूपीए सरकार की बिल में पूरी तरह से पारदर्शिता थी। कारपेट एरिया जिस पर आप हस्ताक्षर करते हैं, वही आपको मिलेगा। उन्होंने इसे हल्का कर दिया और खरीददार हितैषी से इसे बिल्डर के हित में कर दिया।’ सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह जो किसानों और आदिवासियों के खिलाफ सरकार कर रही है, वही काम मध्यम वर्ग के खिलाफ कर रही है।’

राहुल गांधी ने कहा, ‘मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि जिस प्रकार मैं किसानों और आदिवासियों के साथ खड़ा रहा हूं उसी प्रकार उनके साथ भी रहूंगा।’ राहुल गांधी से मुलाकात करने वाली फ्लैट खरीददार सलोनी परूथी ने कहा कि उसने नोएडा में फ्लैट बुक करवाया था लेकिन तय समय सीमा बीते कई साल बीत चुके हैं और फ्लैट अभी तक नहीं मिला है। अपनी समस्या बताते हुए परूथी ने कहा कि उसे न केवल ईएमआई का इंतजाम करना पड़ता है बल्कि जिस मकान में वह रह रही हैं उसका किराया भी देना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘बिल्डर न तो कोई हर्जाना दे रहा है और न ही हमारी सुन रहा है।’ फ्लैट बुक कराने वाले अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें भारी दबाव झेलना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इन फ्लैटों में लगायी जिनके मिलने में सालों की देरी हो रही है।

पूर्व आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री और कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि उसने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लाए गए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण अधिनियम में 118 संशोधन किए हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक का मकसद खरीदारों का संरक्षण और समर्थन था लेकिन सरकार ने इन संशोधनों के जरिए इसे पूरी तरह पलट दिया है। माकन ने बताया कि खरीददारों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कारपेट एरिया जैसे शब्दों को ‘कुल उपयोग योग्य एरिया’ में परिभाषित किया गया था जिसमें दीवारें शामिल नहीं थीं लेकिन इसमें संशोधन कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि देरी संबंधी एक और प्रावधान में भी बिल्डरों के हित में संशोधन किया गया है।

उन्होंने बताया कि पहले वाले विधेयक के अनुसार, बिल्डर प्लान में कोई बदलाव नहीं कर सकते थे लेकिन अब इसमें जोड़ दिया गया है कि ‘मामूली फेरबदल’ की अनुमति है जबकि इस प्रावधान को परिभाषित नहीं किया गया है जिससे भ्रम पैदा हो रहा है। माकन ने कहा कि संप्रग सरकार राज्य सभा में इस विधेयक को लेकर आयी थी ताकि यह समाप्त नहीं हो और राहुल गांधी ने अब खरीददारों को भरोसा दिलाया है कि वह उनके हित के लिए लड़ेंगे।