यमन में शान्ति के लिए शिया-सुन्नी एक मंच पर आये

यमन में शान्ति के लिए शिया-सुन्नी एक मंच पर आये

नई दिल्ली: भारत एशिया सोलियडीरटी मंच की ओर से इंडिया इंटर नेशनल सेंटर में आज एक संवाददाता सम्मेलन यमन के मौजूदा हालात और विश्व समुदाय की जिम्मेदारी के विषय पर आयोजित हुआ जिसमें पूर्व सांसद राज्यसभा मोहम्मद अदीब, अहले बैत एसेमबली के अध्यक्ष मौलाना मोहसिन तक्वी इमामे मस्जिद संसद मौलाना मुहिब्बुल्लाह नदवी, सीरतु न्नबी अकादमी हैदराबाद के अध्यक्ष गुलाम समदानी अली नदवी और इस्लामिक विद्वान डॉ हफीज रहमान ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि यमन में तत्काल संघर्ष विराम होना चाहिए क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में आम लोगों का नरसंहार किसी भी रूप में सही नहीं है उन्होंने मुसलमानों को बांटने की साजिशों पर विस्तृत प्रकाश डाली और कहा कि दुश्मन हमें विभाजित करना चाहता है । समुदायों और मसलकों के नाम पर हमारे बीच घृणा फैलाना चाहता है। यमन युद्ध में इस तरह की बातें सामने आई हैं कि धार्मकि मतभेद का परिणाम है जबकि यह केवल साम्राज्यवादी शक्तियों और उनके उपकरण कार देशों की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ऐसे किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज करता है जो मुसलमानों को विभाजित और मुसलमानों को रुसवा करने की बात की जाए। मौलाना मुहिब्बुल्लाह नदवी ने  यमन में किसी भी प्रकार की बाहरी हस्तक्षेप ना स्वीकार्य करार देते हुए कहा कि वार्ता के जरिए समस्याओं को हल करना चाहिए, युद्ध किसी समस्या का समाधान कैसे हो सकता है जबकि लड़ाई और खून-खराबा खुद एक समस्या है। उन्होंने सऊदी शासकों की ओर वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बनाए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की उन्होंने सवाल उठाया कि जब म्यांमार और गाजा में मुसलमानों का नरसंहार हुआ तब सऊदी शासकों को मुसलमान क्यों याद नहीं आया कि आज एक कमजोर देश पर बमबारी शुरू कर दी है। अहले बैत एसेमबली के अध्यक्ष मौलाना मोहसिन तक्वी ने कहा कि सऊदी सरकार क्षेत्र के देशों के साथ बैठ कर यमन के हालात को बातचीत के जरिए समाधान कराए इसलिए कि पिछले 25 दिनों से जारी इस जंग में आम नागरिकों की बड़ी संख्या मै मौत हुई है जिसमें अक्सर मासूम बच्चे और महिलाएं हैं मौलाना मोहसिन तक्वी ने संयुक्त राष्ट्र को एक निष्क्रिय और बे उद्देश्य संस्था बताते हुए कहा कि इस संस्था की आत्मा निकल चुकी है और अब अपने मूल स्टैंड से हट चुका है और अमेरिका और इजरायल के हितों के लिए काम कर रहा हे।

.मोलाना सैयद गुलाम समदानी कादिरी ने भी हालात को बातचीत के जरिए हल करने पर जोर दिया उन्होंने कहा कि यमन में सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के हमले तुरंत बंद होना चाहिए वे पूरे मध्य पूर्व में जारी युद्ध के माहौल में चिंता व्यक्त कयाावर्कहा कि ऐसे हालात में क्षेत्र में एक और जंग लागू करना दुखद हे।

इंडो एशिया सोलियडरटी मंच के महासचिव डॉ हफीज रहमान ने इस समस्या को पश्चिमी मीडिया द्वारा मजहबी आधार पर पेश करने की निंदा करते हुए कहा कि मुसलमान वैश्विक बेहद कठिनाइयों का शिकार हैं, ऐसी स्थिति में अगर मजहबी घृणा को बढ़ावा मिला तो अधिक बदनामी का कारण होगा। कहा संयुक्त राष्ट्र यमन मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे ाोरसावदी हमलों को रकवाये और विश्व समुदाय को चाहिए कि यमन के युद्ध पीडतिों की अ मदाद भेजने की प्रक्रिया तेजी से शुरू किया जाए।

उन्होंने कहा कि इस युद्ध के छिड़ जाने के बादा अलकायेादा और दाइश जैसे आतंकी संगठन अधिक मजबूत हुई हैं और दक्षिण यमन में तो अल कब्जा ही कर लिया है ऐसे में जब आतंकवाद का नासूर पूरे इस्लामी जगत के लिए मुसीबत बना हुआ है कोई ऐसा कदम करना जिससे आतंकवादियों को बल मिले बिल्कुल सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि मंच द्वारा बहुत जल्दी एक बड़ी कांरस उलेमा, दानशोरान और राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों होते आयोजित की जाएगी।

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