मूकदर्शक बने बैठे रहे केजरीवाल

मूकदर्शक बने बैठे रहे केजरीवाल

योगेन्द्र  यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में बयान की राष्ट्रीय परिषद से  जाने  पूरी घटना 

नई दिल्ली। आप की राष्ट्रीय परिषद से निकाले जाने के बाद योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने प्रेस कांफ्रेस कर पूरी बैठक की सिलसिलेवार जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह बैठक में हंगामा किया गया और उन्हें बोलने का मौका तक नहीं दिया गया। केजरीवाल बस मूकदर्शक बने बैठे रहे।

योगेंद्र ने कहा कि हम दुख और शर्मिंदगी के साथ बैठे हैं, आज हमें बड़ी शर्म महसूस हो रही है। हम न्यूनतम मर्यादा का भी पालन नहीं कर पाए। हम जिन्हें भ्रष्ट पार्टी बताते हैं, उनसे भी गया बीता व्यवहार किया। हम 6 लोगों ने चिट्ठी लिखी थी कि सुचारू रुप से मीटिंग हो, वोटिंग हो, वीडियोग्राफी हो, बातचीत कायदे से हो। हम मानकर चल रहे थे कि लोकपाल मौजूद रहेंगे। एडमिरल रामदास को हर मीटिंग में बुलाया गया है। कल उन्हें मैसेज आया कि आप मीटिंग में ना आएं। उन्हें कहा गया कि आपके आने से कनफ्रंटेशन हो सकता है। इस पर रामदास ने कहा मैं आया ही इस मीटिंग के लिए आया हूं।

योगेंद्र ने कहा कि जिस पार्टी की शुरुआत ही लोकपाल से हुई उसने ही अपने लोकपाल को नहीं बुलाया। आज हमें समझ आया कि वो क्यों नहीं चाहते थे कि उन्हें क्यों नहीं बुलाया गया। कापसहेड़ा के रिसोर्ट में बैठक बुलाई गई। लोगों को बस भर भरकर बुलाया गया ताकि नारे लगवाए जा सकें। उमेश यादव के खिलाफ नारों से मेरा स्वागत हुआ। मेरे साथ धक्कमुक्की हुई। मैं अंदर गया ताकि ये ना लगे कि मैं बहाने कर रहा हूं।

अरविंद केजरीवाल ने आधा घंटे तक भाषण दिया पर इसमें देश और पार्टी का कहीं जिक्र नहीं था। सिर्फ और सिर्फ आरोप लगाए गए। बैठक में सिर्फ दो लोगों का जिक्र किया गया। योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का नाम ले लेकर आरोप लगाए गए। जब उन्होंने एक वरिष्ठ नेता (शांति भूषण) पर उंगली उठाई तो उनके पीछे से 8-10 लोग खड़े हो गए और नारे लगाने लगे, गद्दारों को बाहर करो।

अरविंद भाई बस देखते रहे। हंगामा होता रहा। इसके बाद उन्होंने फिर भाषण शुरू किया। तब उन्होंने कहा कि मैं सभी पदों से इस्तीफा देता हूं इन्हें ही सब कुछ करने दो। रमजान चौधरी ने इसका विरोध किया और कहा कि इन दो लोगों को भी कुछ कहने दें। इस पर उनके साथ मारपीट हुई, उन्हें घसीटा गया। हमने कहा अरविंद जी ये क्या हो रहा है, आप रोकिए, लेकिन वह मूकदर्शक बने रहे।

वहीं प्रशांत ने कहा कि बैठक में कई गैर सदस्यों को भी बुलाया गया। हमने कल चिट्ठी लिखकर सही तरीके से बैठक का संचालन हो, लेकिन हमारी बात नहीं सुनी गई। बैठक का सभ्य संचालन तक नहीं हुआ। आंतरिक लोकपाल को तक आने से मना कर दिया गया। उन्हें कहा गया कि लोकपाल के तौर पर आपका कार्यकाल खत्म हो गया है। क्या हमने इसीलिए पार्टी बनाई थी कि इस तरह की गुंडागर्दी चलेगी।