india's dughter के जवाब में united kingdom's daughter

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नई दिल्ली। निर्भया कांड को लेकर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर केंद्र सरकार ने बैन लगाया लेकिन बीबीसी ने इस बैन को ठेंगा दिखाते हुए डॉक्यूमेंट्री प्रसारित कर दी। यूट्यूब पर भी इस डॉक्यूमेंट्री को अपलोड कर दिया गया जिसे भारत सहित दुनिया भर में देखा गया। कई लोग जहां इस डॉक्यूमेंट्री पर बैन के खिलाफ हैं तो कई ऐसे भी हैं जो इसे बीबीसी द्वारा भारत की गलत छवि पेश करने की कोशिश के तहत देखते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं हरविंदर सिंह जिन्होंने बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री के जवाब में एक वीडियो यूट्यूब पर पोस्ट किया है और इसे नाम दिया है ‘यूनाइटेड किंगडम्स डॉटर’

इस वीडियो के बारे में हरविंदर लिखते हैं कि ये बीबीसी को जवाब है कि बेटियां सिर्फ बेटियां होती हैं, वे भारतीय या ब्रिटिश नहीं होतीं। हरविंदर ने ये वीडियो इस बात के सबूत के तौर पर पोस्ट किया है कि भारत ही नहीं ब्रिटेन में भी रेप की भयावह स्थिति है लेकिन बीबीसी इसे मुद्दा नहीं बनाता। वीडियो 9 मार्च को पोस्ट किया गया था और अब तक उसे तकरीबन पांच हजार लोग देख चुके हैं।

इस वीडियो की शुरुआत कुछ तथ्यों के साथ होती है। ये बताया जाता है कि दुनिया में सबसे ज्यादा रेप वाले देशों में यूके पांचवें नंबर पर है। यूके की 10 फीसदी महिलाएं स्वीकारती हैं कि उनका यौन शोषण हुआ। आंकड़ों के मुताबिक यूके में हर रोज 250 महिलाओं से रेप होता है। ये आंकड़े हकीकत में और ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि तमाम महिलाएं इसकी शिकायत तक नहीं करतीं। एक तिहाई ब्रिटिश पुरुष मानते हैं कि रेप के लिए महिलाएं ही जिम्मेदार हैं।

यूके में रेप के केवल 10 फीसदी मामलों में ही सजा हो पाती है। हालांकि महिलाएं रेप का एक सीमा के बाद विरोध नहीं करतीं इसलिए रेप के बाद हत्या के आंकड़े कम हैं। वीडियो में ब्रिटेन की सामाजिक स्थिति पर भी तंज कसा गया है ये बताकर कि यहां 41 फीसदी शादियां 20 साल में ही टूट जाती हैं। 11 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है जबकि 65 साल के अधिक उम्र के 31 फीसदी लोग ओल्ड एज होम में रहते हैं।

इसके बाद वीडियो में एक रेप पीड़िता का इंटरव्यू दिखाया जाता है। क्रिसमस की रात इस महिला के साथ निर्भया जैसी ही दरिंदगी को अंजाम दिया गया। रेप और मारपीट की शिकार खून से लथपथ ये युवती सड़कों पर हर किसी से मदद मांगती रही लेकिन कोई आगे नहीं आया। बाद में सड़क पर बेहोशी की हालत से उसे पुलिस ने उठाया और अस्पताल पहुंचाया।

इस महिला के रेपिस्ट को बाद में सजा तो हो गई लेकिन इसकी कानूनी प्रक्रिया भी काफी जटिल थी जिसने पीड़िता को और ज्यादा तोड़ दिया। कोर्ट में उससे तमाम ऊलजलूल सवाल पूछे गए। उसे पीड़िता की बजाय गवाह के रूप में पेश किया गया और उस खूंखार दरिंदे से आमना-सामना कराया गया। अपनी कहानी बताते हुए इस पीड़िता ने ब्रिटेन में रेप, उसके बाद पीड़िता के साथ बर्ताव और कानूनी प्रक्रिया की कलई खोलकर रख दी।

वीडियो के दूसरे पार्ट में बीबीसी के ही शो फ्री स्पीच का एक हिस्सा दिखाया गया है। फ्री स्पीच में चर्चा का विषय था इंग्लैंड और वेल्स में बढ़ती रेप की घटनाएं और उनके कारण। चर्चा में शामिल एक संपादक महोदय लगभग वही बातें कहते नजर आए जो निर्भया को लेकर बनी डॉक्यूमेंट्री में रेपिस्टों के वकील कह रहे थे। यही नहीं वहां मौजूद और भी कई लोग संपादक की इस बात में हां में हां मिला रहे हैं कि रेप के लिए दरअसल वहां रह रहे मुस्लिम जिम्मेदार हैं।

परिचर्चा में ये बात भी निकलकर सामने आई कि ब्रिटेन में भी एक बड़ा वर्ग ये मानता है कि रेप के लिए महिलाओं के कपड़े, उनका व्यवहार ज्यादा जिम्मेदार होता है। परिचर्चा में आंखें खोल देने वाले आंकड़े दिखाए गए जिनके मुताबिक 2013 में जून तक इंग्लैंड और वेल्स में रेप के 17096 और अन्य यौन अपराध के 22116 मामले दर्ज किए गए थे लेकिन 2014 में जून तक इनकी संख्या बढ़कर क्रमशः 38819 और 45689 तक पहुंच गई।

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