बजट के बाद औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

बजट के बाद औद्योगिक उत्पादन में गिरावट

नई दिल्ली: विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के चलते देश का औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) दिसंबर, 2019 में 0.3 प्रतिशत घट गया। एक साल पहले दिसंबर, 2018 में औद्योगिक उत्पादन 2.5 प्रतिशत बढ़ा था। पिछले साल अगस्त, सितंबर और अक्टूबर लगातार तीन माह गिरावट में रहने के बाद नवंबर में औद्योगिक उत्पादन 1.8 प्रतिशत बढ़ा था।

अगस्त 2019 में इसमें 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि सितंबर में 4.6 प्रतिशत और अक्टूबर में 4 प्रतिशत नीचे आया था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 1.2 प्रतिशत घट गया। एक साल पहले इसी महीने में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 2.9 प्रतिशत बढ़ा था।

इसी तरह दिसंबर, 2019 में बिजली उत्पादन में भी 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई। जो कि एक साल पहले इसी महीने में 4.5 प्रतिशत बढ़ा था। हालांकि, खनन क्षेत्र का उत्पादन दिसंबर 2018 के एक प्रतिशत घटने के मुकाबले दिसंबर 2019 में 5.4 प्रतिशत बढ़ गया।

चालू वित्त वर्ष के पहले नौ माह (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई। जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 4.7 प्रतिशत रही थी। दिसंबर माह के आंकड़ों के अनुसार पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 18.2 प्रतिशत घट गया। एक साल पहले इसी महीने में यह 4.2 प्रतिशत बढ़ा था। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन आंकड़े निवेश का संकेत देते हैं। इस्तेमाल आधारित वर्गीकरण के अनुसार दिसंबर, 2019 में प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन एक साल पहले इसी महीने से 2.2 प्रतिशत बढ़ गया।

मध्यवर्ती वस्तुओं के लिए इसमें 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं बुनियादी ढांचा-निर्माण वस्तुओं का उत्पादन 2.6 प्रतिशत घट गया। इसी तरह टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन 6.7 प्रतिशत घटा। गैर टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में 3.7 प्रतिशत की गिरावट आई। उद्योगों की बात की जाए,तो विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 16 में गिरावट रही।

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों पर डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में गिरावट से पिछले महीने से उद्योग गतिविधियों में जो सुधार दिखना शुरू हुआ है, उसके टिकने को लेकर चिंता बढ़ी है। यह समूची अर्थव्यवस्था की दृष्टि से अच्छा नहीं है क्योंकि वैश्विक स्तर पर दिक्कतें पहले से उद्योग के लिए चुनौती बनी हुई हैं।’बजट के बाद