दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार, कहा--जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं

दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार, कहा--जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं

नई दिल्ली: पुरानी दिल्ली के दरियांगज में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा मामले में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की जमानत याचिका पर सुनवाई दिल्ली की एक अदालत ने टाल दी है। अब इस मामले पर सुनवाई बुधवार यानी 15 जनवरी को की जाएगी। इस बीच कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार भी लगाई है।

बता दें कि चंद्रशेखर को दरियागंज में हिंसक प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उनको 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। इस मामले में चंद्रशेखर ने तीस हजारी कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी, जिसपर अदालत ने सुनवाई कल तक के लिए टाल दी।

तीस हजारी कोर्ट ने चंद्रशेखर के खिलाफ सहारनपुर में दर्ज सभी FIR की जानकारी मांगी है। चंद्रशेखर की जमानत याचिका पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा कि अभी तक आपने इस मामले में क्या कार्रवाई की है। कोर्ट ने कहा कि लोग कहीं भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं है जहां हमें विरोध करने की अनुमति नहीं है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान में भी होते हैं। साथ ही, कोर्ट ने पुलिस से ये भी कहा कि किस कानून में उल्लेख है कि किसी भी धार्मिक स्थान के सामने विरोध करना प्रतिबंध है।

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि चंद्रशेखर ने क्या आपत्तिजनक टिप्पणी की है, आप अदालत को बताइए। कोर्ट ने कहा कि भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर एक उभरते हुए राजनेता हैं। विरोध करने में क्या गलत है। कई मामले में देखा गया है जहां विरोध प्रदर्शन संसद के बाहर भी हुए हैं। इस मामले में कोर्ट ने चंद्रशेखर के खिलाफ सहारनपुर में दर्ज सभी एफआईआर की जानकारी मांगी है। चंद्रशेखर की जमानत याचिका पर अब कल यानी 15 जनवरी को तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई होगी।

बता दें कि दरियागंज हिंसा मामले में चंद्रशेखर को गिरफ्तार करने के बाद 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, उनकी जमानत की अर्जी को दिल्ली की अदालत ने खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसके अलावा 15 अन्य को भी दरियागंज हिंसा के मामले में दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। जामा मस्जिद इलाके और दरियागंज से पुलिस ने चंद्रशेखर समेत करीब 40 लोगों को हिरासत में लिया था, इनमें कुछ नाबालिग भी हिरासत में थे, जिन्हें अगले दिन छोड़ दिया गया था।

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