उपचुनाव के नतीजे अनुकूल नहीं रहे तो कर्नाटक में बदल सकती है सत्ता

उपचुनाव के नतीजे अनुकूल नहीं रहे तो कर्नाटक में बदल सकती है सत्ता

नई दिल्ली: एनडीए से अलग होकर महाराष्ट्र में शिवसेना के एनसीपी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद भाजपा का शासन एक राज्य में और कम हो गया है। महाराष्ट्र से देश में विपक्षी एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है। महाराष्ट्र के बाद एक और राज्य में भाजपा की सरकार गिर सकती है।

दक्षिण भारत के बड़े राज्यों में एक कर्नाटक में कांग्रेस एक बार फिर से जनता दल सेक्यूलर के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिशों में जुट गई है। कांग्रेस ने रविवार को स्पष्ट किया कि 5 दिसंबर को होने वाले उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को बहुमत के लिए जरूरी सीटें नहीं मिल पाने की स्थिति में वह एक बार फिर जद (एस) के साथ हाथ मिलाने के विरूद्ध नहीं है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वरा के हवाले से कहा कि कांग्रेस ने राज्य में गठबंधन को लेकर जनता दल सेक्यूलर से अभी भले ही कोई बात नहीं हुई है लेकिन पार्टी ने यदि स्थितियां बनती हैं तो पार्टी ने गठबंधन का विकल्प खुला रखा है। उपचुनाव के परिणाम के बाद की रणनीति पर बोलते हुए परमेश्वरा ने कहा कि उपचुनाव परिणाम के बाद दो संभावनाएं हैं। पहला की हम जेडीएस के साथ जाएं और सरकार बनाए। दूसरा विकल्प है कि हम शांत हो जाएं और सरकार को ही यह निर्णय लेने दें कि भाजपा सरकार के अल्पमत में आने की स्थिति में वे राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय लेती है या फिर दुबारा चुनाव करवाने का फैसला करती है।

कांग्रेस और जद (एस) कर्नाटक में 14 महीने तक गठबंधन सरकार चला चुकी है और दोनों ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, 17 विधायकों की बगावत के बाद जुलाई में एच डी कुमारस्वामी सरकार गिर गयी थी और अब दोनों पार्टियां अलग-अलग उपचुनाव चुनाव लड़ रही हैं। जेडीएस-कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद भाजपा ने येदियुरप्पा के नेतृत्व में सरकार बनाई है।

पूर्व डिप्टी सीएम परमेश्वरा का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से कांग्रेस और जेडीएस एक समान है। इसीलिए दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी… हालांकि अभी इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है। हम उपचुनाव के परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में कोई भी निर्णय पार्टी हाईकमान ही लेगा।

मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ भाजपा को राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 15 निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव में कम से कम छह सीटें जीतने की जरूरत है । सदन में दो- मास्की और आर आर नगर की सीटें भी रिक्त हैं ।

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