देश अपनायें ने एक्टिजेन कंटेस्ट शुरू किया

देश अपनायें ने एक्टिजेन कंटेस्ट शुरू किया

अलाभकारी संगठन, देश अपनायें सहयोग फाउंडेशन जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाली व सामुदायिक विकास की पहल है, पिछले चार वर्षों से भारत के 800 से अधिक स्कूलों के साथ मिलकर काम करता रहा है। इस फाउंडेशन का उद्देश्य युवाओं को नागरिक शिक्षा के लाभों के बारे में बताना और उन्हें प्रेरित करना है। इस फाउंडेशन ने प्रमुख रूप से एक नई पहल की घोषणा की है।

देश अपनायें एस फाउंडेशन (इनाम समूह के सह-संस्थापक और चेयरमैन) के संस्थापक, चीफ मेंटर, वल्लभ भंसाली ने कहा, ‘‘मुझे एक्टिजेन कंटेस्ट की घोषणा करते हुए बेहद खुशी महसूस हो रही है। यह कंटेस्ट भारत के हजारों स्कूलों में शुरू किया जायेगा, जिसका राष्ट्रीय महत्व का एक ही लक्ष्य हैः सजग, समझदार और सक्रिय नागरिकों का निर्माण। इसमें विद्यालयों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और अभिभावकों को आमंत्रित किया जायेगा, जो 7वी, 8वीं और 9वीं कक्षा के किशोर छात्रों को इस दो चरणों वाले कंटेस्ट में भाग लेने और आसपास की समस्याओं के लिए प्रभावी स्वैच्छिक कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करेंगे। इस द्विचरणीय कंटेस्ट के जरिए उनकी नागरिक समझ की जांच. की जायेगी। यह वार्षिक विशेषता होगी।

प्रख्यात खेल आइकन और पद्मश्री पुरस्कार विजेता गगन नारंग, जिन्होंने 2012 में शूटिंग के लिए कांस्य पदक के साथ भारत को ओलंपिक पदक दिलाया, ने कहा, “देश अपनायें फाउंडेशन द्वारा स्कूली छात्रों के लिए आयोजित एक्टिजेन प्रतियोगिता उन्हें कम उम्र से ही सही मायने में लोकतंत्र का अनुभव कराने और सतर्क रहने में मदद करेगी। मैं इसे लेकर बहुत उत्साहित हूं और इसका पूरा समर्थन करता हूं।’’

डॉ. पार्थ जे शाह, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के संस्थापक और अध्यक्ष और इंडियन स्कूल ऑफ़ पब्लिक पॉलिसी के निदेशक, “नागरिकता शिक्षा, स्वयंसेवा और सामुदायिक कार्य के साथ संयुक्त होने पर अच्छी नीतियां और शासन महत्वपूर्ण रूप से एक राष्ट्र को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले 25 वर्षों से एक शिक्षाविद् और पाॅलिसी एक्टिविस्ट के रूप में, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि भारत के हजारों स्कूलों में ऑन-बोर्डिंग छात्र, एक्टिजेन® प्रतियोगिता एक बेहतर भारत के लिए सतर्क, सूचित और सक्रिय युवा नागरिकों को बनाने और एकजुट करने के लिए गेम-चेंजिंग मिशन हो सकते हैं। “

एचवीबी ग्लोबल एकेडमी की पिं्रसिपल डॉ. सुश्री पाठक ने कहा, “एक पिं्रसिपल के रूप में, मैं अपने छात्रों को बाहरी लोगों के साथ मिलकर ऐसे मूल्यों को विकसित करने के सबसे व्यावहारिक और रोमांचक तरीके कोे उजागर करने के लिए तत्पर हूं, जैसे कि, सहयोगात्मक तरीके से प्रतियोगिता, समस्या समाधान और व्यावहारिक गतिविधि।“