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बालश्रम के खिलाफ ठोस उपाय करनें की जरूरत: अमित

अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर "बाल अधिकार : स्थिति व चुनौतियां" विषय पर सेमिनार का आयोजन

लखनऊ। ह्यूमन राइट्स मानिटरिंग फोरम HRMF तथा वादा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अन्तरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर "बाल अधिकार : स्थिति व चुनौतियां" विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के बाद मार्च फार चिल्ड्रेन का आयोजन किया गया जिसे डालसा की सचिव व जज श्रीमती पूर्णिमा सागर व उ प्र बाल आयोग की सचिव प्रीति वर्मा ने नीला झंडा दिखा कर उक्त मार्च को रवाना किया।

मार्च का मुख्य स्लोगन था बच्चों के खिलाफ हिंसा समाप्त करो। उक्त मार्च एपी सेन रोड स्थित एचआरएमएफ आफिस से चारबाग रेलवे स्टेशन तक निकाला गया। मार्च में शामिल बच्चों व कार्यकर्त्ताओं ने अपने हाथों में बच्चों के अधिकारों से सम्बंधित तख्तियां लहराते हुए

बच्चों के खिलाफ हिंसा बंद करो। हमें भी पढ़ना है -आसमान में उड़ना है।” “बच्चों को पढ़ाना है-देश को आगें बढ़ना है”, “बाल मजदूरी बंद करों” जैसे जोरदार नारे लगाये।

मार्च से पूर्व एपी सेन रोड स्थित आफिस में आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए वादा फाउंडेशन निदेशक एवं एचआरएमएफ सचिव अमित ने कहा की आज के दिन पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस मनाया जाता है। बाल अधिकार देश के हर बच्चे को प्राप्त अधिकार हैं। उन्होंने कहा की आज बालश्रम के खिलाफ सरकार को ठोस उपाय करनें की जरूरत है जिससे देश में करोड़ों की संख्या में फंसे बाल मजदूरों को बाल मजदूरी से निकालकर शिक्षा के द्वार तक पहुंचाया जा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों के लिए योजना तो बना देती है लेकिन उसे जमीन तक पहुचाने के लिए ठोस उपाय नहीं करती है। उन्होंने बताया कि जनगणना 2011 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश 1 करोड़ से ज्यादा बच्चे स्कूल जाने की बजाय बालश्रम करते है और देश मे जिनकी उम्र पढ़ने और खेलने की हैं उन बच्चों का बाल विवाह हो होता हैं। हमारे देश के शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, बच्चों में कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी मानको का स्तर बेहद खराब हैं जिसमें रोजाना सैकड़ों बच्चों की मौत हो रही और तमाम कानून होने के बावजूद भी बाल मजदूरी, बाल विवाह, बच्चों में कुपोषण खत्म होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है। वह दिन कब आएगा जब कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बच्चों के अधिकारों की संरक्षण के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की हैं।

संचालन करते हुए HRMF पैनल अधिवक्ता वी के त्रिपाठी ने कहा कि दुनिया के सभी अधिकारों में बाल अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है और अगर हम एक बेहतर दुनिया देखना चाहते है तो हमें बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे जो हिंसा का शिकार है या दिव्यांग है या समाज में हासिये पर है हमें उन बच्चों के अधिकारों और उनकी बेहतरी के लिए आगे आना होगा तभी हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर पायेंगे।

उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकार से जुड़ें अनगिनत क़ानून होने के बाद भी आज सबसे ज्यादा बच्चों के साथ ही हिंसा हो रही हैं “बच्चे आज ना तो घर में सुरक्षित हैं ना ही बाहर” बच्चों के साथ हो रहें हिंसा,उत्पीडन,लैंगिक हिंसा,शोषण,बाल मजदूरी,बाल विवाह जैसे गंभीर अपराध से उनके ऊपर बहुत बुरा असर पड़ रहा हैं जिसके कारण बच्चों का भविष्य खराब हो रहा हैं जो काफी चिता का विषय है।

उक्त अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ की सचिव श्रीमती पूर्णिमा सागर ने कहा की बड़े अक्सर अपने अधिकारों के बारे में बहुत जागरूक रहते हैं। उन्हें अपने सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक सभी अधिकारों की जानकारी होती है और वे अपने अधिकारों का उपयोग करते भी हैं। अधिकारों का जरा-सा हनन होने पर आवाज भी उठाते हैं। तथा बच्चों के अधिकारों को लेकर भी लोग जागरूक हो रहे है। हर बच्चे को भोजन, शिक्षा,स्वास्थ्य के साथ ही खुशनुमा माहौल में रहने और पूर्ण सुरक्षा पाने का अधिकार है।

उन्होंने आगे कहा की हिंसा के शिकार बच्चों सहित सभी वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता पाने का अधिकार हैं. अब अधिकारों का हनन होने पर आप चुप ना बैठे अपने अधिकारों का उपयोग कर शिकायत दर्ज कराये। आपको निःशुल्क मदद उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण काम करता हैं।जब भी आपको कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो आप मदद ले सकते हैं।

राज्य बाल आयोग उ.प्र. की सचिव श्रीमती प्रीति वर्मा ने कहा की आज जितना बड़ों को अधिकार मिले है उससे कहीं ज्यादा आप सभी बच्चों को भी अधिकार मिले हैं। आप सभी बच्चे अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर खूब पढ़े और आगे बड़े। बच्चों के लिए शि‍क्षा विकास की पहली सीढ़ी है। शि‍क्षा पाना हर बच्चे का अधिकार है। हर बच्चे को प्रारंभिक शि‍क्षा पूरी करने का अधिकार है। उसके पहले स्कूल छुड़वाना गलत है। सरकार स्कूलों में निःशुल्क शि‍क्षा के साथ मध्यान्ह भोजन, यूनिफार्म और पुस्तकें भी प्रदान की करती हैं। जिसे देश के हर बच्चे को पाने का हक है।

HRMF के सदस्य सुरेश भारती ने कहा की बच्चों को बेहतर शिक्षा और घर-परिवार के साथ समाज में रहने और स्वस्थ विकास के लिए दिए गए अधिकारों का हनन ना हो उसके लिए सरकार को ठोस उपाय करनी चाहिए। आज समाज में लड़के-लड़की में जो भेदभाव की घटना सामने आ रही हैं उस पर रोक लगाने के लिए सख्त क़ानून बनाने की जरुरत हैं भेदभाव करना गलत हैं। संविधान में दिए हुए बाल अधिकार क़ानून का सही पालन हो ताकि बच्चों के जीवन, शिक्षा,संरक्षण,स्वतंत्रता,सहभागिता के अधिकार को सुनिश्चित कर बच्चों के बेहतरी के साथ-साथ स्वच्छ समाज का निर्माण हो।

इस अवसर पर डा. सतीश श्रीवास्तव, के के शुक्ला, अजय शर्मा, पूजा रावत,इन्द्रजीत,सहित अन्य लोगों ने भी सेमिनार में अपने बहुमूल्य विचार रखे।

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