संस्कृति विश्वविद्यालय शीघ्र शुरू करेगा आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन

संस्कृति विश्वविद्यालय शीघ्र शुरू करेगा आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत संस्कृति आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल शीघ्र ही उन्नत एवं नवीन तकनीकों का इस्तेमाल कर उच्च गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन करने जा रहा है। यह सर्व विदित है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा के क्षेत्र में मरीजों के बेहतर एवं कारगर इलाज में आयुर्वेदिक दवाओं का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहता है।

संस्कृति आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल के निदेशक एवं अन्य कर्मी उत्पादन सम्बन्धी प्रक्रियाओं एवं अन्य विधि सम्मत अनुमतियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन आयुर्वेदिक कॉलेज के निदेशक के देख रेख में समस्त अनुमतियाँ प्राप्त करने के पश्चात यथाशीघ्र किया जाएगा। संस्कृति आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल में आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन से मरीजों को नवीन तकनीक से तैयार दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। बैचलर ऑफ़ आयुर्वेदिक मेडिसिन एवं सर्जरी में अध्यनरत छात्रों को उन्नत एवं नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल कर उच्च गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन प्रक्रियाओं को जीवंत रूप से देखने तथा इंटर्नशिप के दौरान सीखने का मौका भी मिलेगा।

कुलाधिपति श्री सचिन गुप्ता ने हर्ष प्रकट करते हुए कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय के संस्कृति आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल एवं स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के छात्रों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन की शुरुआत एक सौगात के रूप में है जिसमें शिक्षकों और छात्रों को आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन के बारे में सम्पूर्ण जानकारी तथा उत्पादन प्रक्रिया के जीवंत रूप को देखने एवं सीखने का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा जो कि संस्कृति विश्वविद्यालय के आउटकम बेस्ड शिक्षण प्रणाली में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। उप कुलाधिपति श्री राजेश गुप्ता ने अपने सन्देश में कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली तथा प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए उन्नत एवं नवीन तकनीकों का इस्तेमाल कर उच्च गुणवत्ता युक्त आयुर्वेदिक दवाओं से मरीजों को कम कीमत में अच्छी एवं कारगर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिया आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन का शुरुआत किया गया है।

एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री पी सी छाबड़ा ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन छात्रों को उपलब्ध प्रयोगशालाओं के अलावा असली दवाओं के उत्पादन प्रक्रियाओं को देखने एवं सीखने का स्वर्णिम अवसर मिलेगा। कुलपति डॉ. राणा सिंह ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन छात्रों एवं शिक्षकों को आयुर्वेद दवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता के क्षेत्र में अनेक शोध करने तथा नयी दवाओं के विकास तथा उपलब्ध दवाइयों के उन्नत स्वरुप का विकास करने के काफी मौके प्रदान करेगा जिससे संस्कृति आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल के छात्रों एवं शिक्षकों के शोध एवं प्रकाशन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।