यूपी में महागठबंधन को तोड़ना मोदी के लिए बना चुनौती

यूपी में महागठबंधन को तोड़ना मोदी के लिए बना चुनौती

यूपी के सियासी संग्राम में अमर सिंह का तड़का नए तूफ़ान की धमक

बुआ से दोस्ती को बरक़रार रखना व परिवार की रार से पार पाना अखिलेश के लिए मुश्किल

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

यूपी के सियासी संग्राम में अमर सिंह के तड़के से नए तूफ़ान आने की सम्भावनाओं से इंकार नही किया जा सकता।मोदी की भाजपा ने उत्तर प्रदेश को फिर से जीतने के लिए रणनीतिक व कुटनीतिक जाल बिछाना शुरू कर दिया सबसे पहला वार सपा की कमज़ोरी पर किया है पारिवारिक लडाई को एक बार फिर हवा देकर सड़कों पर लाया जा सकता है उसके बाद बसपा की दुखती रग पर वार करने की तैयारी हो चुकी है|

मोदी की भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव के लिए संभावित कांग्रेस-बसपा-सपा व रालोद गठबंधन को रोकने की भरपूर्व कोशिश करेंगी और करनी शुरू कर दी है।पहली कोशिश कि गठबंधन न हो दूसरी और अंतिम कोशिश होकर भी कारगर न हो इसके लिए मोदी की भाजपा ने एक ऐसे विभीषण का चयन किया है जिसके फ़िल्म में आते ही कुछ न कुछ होने की सम्भावनाओं से इंकार नही किया जा सकता है।जहां चर्चित नेता अमर सिंह विभीषण की भूमिका निभा सकते हैं वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में साइकिल के ट्यूब में हवा के अनियंत्रित होने से पैदा फुग्गे का उदाहरण देकर यादव कुनबे में उफान लाने के संकेत दिए हैं। इस नए घटनाक्रम से राजनीतिक गलियारे में खूब चर्चा है। मोदी की भाजपा की इस रणनीति से कांग्रेस-सपा-बसपा व राष्ट्रीय लोकदल में हलचल तेज हो गई है।ख़ासकर कांग्रेस-सपा-बसपा व रालोद के इस संभावित गठबंधन से डरी भाजपा ने 2019 के किले को फतेह करने से पहले इन दलों में सेंध लगाने के लिए भाजपा ने सपा के पूर्व नेता अमर सिंह को मैदान में उतार दिया है। राजनीतिक गलियारों में इन दिनों सपा के पूर्व नेता अमर सिंह फिर से सक्रिय हो गए हैं।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह से पता है कि अगर कांग्रेस-सपा-बसपा व रालोद का गठबंधन हो गया तो 2019 में सरकार बनाना तो दूर की बात है यूपी में दो अंकों में सीटों को पहुँचना भारी हो जाएगा।यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा कंपनी के कुनबे में छिड़े सियासी झगड़े का लाभ भाजपा को मिला था।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब मोदी की भाजपा ने फिर से सपा कंपनी के कुनबे में रार करवाने के लिए हवा देना शुरू कर दिया है।अभी 28 जुलाई को हुए समाजवादी कंपनी सीईओ के राष्ट्रीय अधिवेशन में सपा के पूर्व मालिक व अब संरक्षक मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव अनुपस्थिति रहे है। इससे संकेत मिलते हैं कि समाजवादी कंपनी के परिवार में अभी झगड़े का गुब्बारा फूला हुआ है। बस इसमें थोड़ी सी हवा भरने की जरूरत है,जिससे गुब्बारा फूट जाए।

राजनीतिक विश्लेषक और यूपी की सियासत पर बारीक नज़र रखने वाले बदर काज़मी का कहना है कि कांग्रेस-सपा-बसपा व रालोद के संभावित गठबंधन को तोडऩे के लिए मोदी की भाजपा ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि आज की भाजपा में बहुत फ़र्क़ आ गया है भाजपा अब एक पार्टी नही रही दो लोगों की पार्टी है जिसकी पहंचान मोदी की भाजपा बन गई है वह जो फ़ैसला करते उसका विरोध करने की किसी में हिम्मत नही है।राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि महागठबंधन को रोकने के लिए मोदी की भाजपा इसकी स्क्रिप्ट भी तैयार कर चुकी है। इसमें अमर सिंह एक अहम कड़ी निभा सकते हैं।

सबको पता है कि सपा के बागी नेता शिवपाल सिंह यादव से अमर सिंह की दांत काटी दोस्ती है। सपा कंपनी को डैमेज करने के लिए दो विकल्प हैं। पहला अमर सिंह शिवपाल सिंह यादव को भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार कर सकते हैं या नई पार्टी बनवाकर सपा की ताकत कम करवा सकते हैं। जबकि मोदी की भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बसपा की पैसे की कमजोरी अच्छी तरह से जानते हैं। इस वजह से कई डमी कंडीडेटों को बसपा से टिकट दिलवाने की तैयारी है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अमर सिंह की काबिलियत से अच्छी तरह से परिचित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में अमर सिंह की काबिलियत की तारीफ कर चुके हैं। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सपा कंपनी के सियासी कुनबे में झगड़ा और भडक़ने वाला है। सपा मुखिया अखिलेश यादव की अब असल परीक्षा शुरू हुई है।

सपा मुखिया के तौर पर अखिलेश यादव का यह पहला लोकसभा चुनाव है। यूं तो विपरीत परिस्थितियों में बसपा की पीठ पर सवार होकर गोरखपुर,फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट व बिजनौर की नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा को विजय दिलाकर अपने नेतृत्व का परिचय दे चुके हैं।आगामी 2019 के चुनाव में अगर कांग्रेस-सपा-बसपा व रालोद गठबंधन बनाकर मैदान में जाते हैं तो यह मोदी की भाजपा के साम्प्रदायिक ग़ुब्बारे की हवा ऐसी फुस कर देगा कि मोदी की भाजपा सपने में भी नही सोच सकती है क्या हश्र होने जा रहा है इस गठबंधन होने के बाद के हालात से पार पाना मोदी की भाजपा के लिए चुनौती बनकर सामने आ रही है।