छात्रों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर हुआ मंथन

लखनऊ: छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति की सबसे बड़ी वजह उनके परिजनों द्वारा दबाव बनाना है। न्युक्लियर परिवार की वजह से दबाव में रहने वाला छात्र अपनी बातें मां-बाप से शेयर नहीं कर पाता है। इसकी वजह से उसके पास रास्ते कम या नहीं बचते हैं, जिसकी वजह से वह आत्महत्या को मजबूर हो जाता है। ये बातें मशहूर समाजशास्त्री प्रो रमेश दीक्षित ने कहीं।

प्रो रमेश दीक्षित “छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति- आखिर क्यों” विषय पर आयोजित चर्चा में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन छात्रों से जुड़ी राष्ट्रीय संस्था एसआईओ की सेंट्रल यूनिट ने किया था। इस चर्चा में बोलते हुए प्रो दीक्षित ने कहा कि हमें ये तय करना पड़ेगा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है। हमें हर शिक्षा ग्राहण करने वालों को कोई रोजगार परख ट्रेनिंग देनी चाहिए। प्रो दीक्षित ने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां शहर से लेकर गांव तक युवाओं के लिए काम की व्यवस्था सरकार की तरफ से तय है। प्रो रमेश दीक्षित ने कहा कि सरकारें परिवारों का बोझ कम करने के लिए शिक्षित युवा बेरोजगारों को भत्ता दें।

कार्यक्रम में बोलते हुए CORD के निदेशक अतहर हुसैन ने कहा कि आज के आधुनिक युग में आत्महत्या के डेटा तो सभी के पास है पर ये बेहद दुखद है कि इसके निदान के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सरकारें को इसको लेकर बेद उदासीन हैं और उन्होंने रोजगार उपलबंध कराने पर हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन्नोवेटिव शिक्षा की कमी हर तरफ दिख रही है। शिक्षा के साथ इन्नोवेशन की जानकारी भी दी जाए तो एक तरफ बेरोजगारी कम होगी तो दूसरी तरफ छात्रों पर दबाव भी घटेगा। ऐसे में आत्महत्या की दर कम होगी। अतहर हुसैन ने कहा कि सरकार यूनिवर्सिटी, कॉलेजों में छात्रों के हेल्थ और उनकी मनोदशा के लिए काउंसिलिंग सेंटर स्थापित करें।
कार्यक्रम में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लॉ डिपार्टमेंट के हेड प्रो नसीम अहमद जाफरी ने कहा कि हम अपने बच्चों को आम दुश्वारियों से जूझने की कवायद को रोकने का काम कर रहे हैं। हम उन्हें हर तरह की सुविधाएं देकर उनकी सहन शक्ति को कम कर रहे हैं। ऐसे में बच्चे आने वाली परेशानियों और प्रेशर को सहन करने की शक्ति ही नहीं बची है। प्रो नसीम ने कहा कि आत्महत्या की दर कमज़ोर छात्रों के मुकाबले मेधावी छात्रों में ज़्यादा है।

कार्यक्रम के अन्त में डॉ सिकंदर अली इस्लाही ने कहा कि आत्महत्या की दर बढ़ने और छात्रों में तनाव की वजह जानने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे में एसआईओ जैसे संगठन की भुमिका बढ़ जाती है कि वो छात्रों के बीच जाकर काम करें। प्रो इस्लाही ने कहा कि जनाव में रहने वाले छात्रों को धर्मगुरुओं से भी मदद लेनी चाहिए। कार्यक्रम में एपीसीआर के नजमुस्साकिब, अब्दुल्लाह सहीमी, असिफ अकरम समेत दर्जनों छात्र मौजूद रहे।