गुजरात चुनावों में नैतिक पतन का दर्शन

गुजरात चुनावों में नैतिक पतन का दर्शन

मृत्युंजय दीक्षित

गुजरात के विधानसभा चुनावों का दौर समाप्त हो चुका है। चुनाव प्रचार में सभी दलांे ने अपनी ताकत झोंक दी थी। गुजरात चुनाव मंे कई चीजें देखने को मिली हैं। सभी दलों के नेताओं ने एक दूसरे पर वार - पलटवार जमकर किये। इन चुनावों में एक चीज यह भी देखने को मिली की सभी नेता अपनी मर्यादा भूल गये । जिसमें सबसे अधिक बार यदि किसी दल ने अपनी मर्यादा को लांघा है तो वह कांग्रेस पार्टी या फिर उसके समर्थन मंे चुनाव प्रचार करने उतरे नेताओं ने। गुजरात मंे 2002 के दंगांे के बाद पीएम नरेंद्र मोदी लगातार विरोधी दलों के निशाने पर रहे है। वह विरोध अब नोटबंदी और जीएसटी तक पहंुच गया है।

अभी तक कहा जा रहा था कि चुनावों में कोई भावनात्मक मुददा नहीं उठ रहा है लेकिन चुनाव के दौरान ही कांगं्रेस के बड़े नेता मणिशंकर अय्यर ने पीएम मोदी के खिलाफ नीच और असभ्य जैैसे शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। बस फिर क्या था ? जो बीजेपी गुजरात के चुनावोें में प्रथम चरण के दौरान बेहद रक्षात्मक मूड में आ गयी थी वह अब कांग्रेस के खिलाफ पूरी ताकत के साथ हमलावर हो चुकी थी तथा पीएम मोदी ने एक बार फिर अपने खिलाफ कांग्रेसी नेताओं की बदजुबानी को मुददा बना लिया और कहा कि यह मेरा ही नहीं अपितु पूरे गुजरात का अपमान है इस कारण उनकी रैलियों में मोदी - मोदी के नारे लगने लग गये। अब यह तो चुनाव परिणाम ही बतायेगा कि मणि उवाच ने चुनावों को किस हद तक प्रभावित किया है। लेकिन इन चुनावों पर यदि गहराई से नजर डाली जाये तो सबसे अधिक बार यदि किसी दल को बार -बार सफाई देनी पड़ रही हो ,माफी मांगनी पड़ रही हो या फिर किसी को पार्टी से ही निकालना पड रहा हो तो वह कांग्रेस पार्टी ही रहीं है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तभी से कांग्रेस उन पर हमले करती रही है। 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रियंका ने पीएम पद के उम्मीदवार मोदी जी को नीच ओर असभ्य कहा था तब से अब तक कांग्रेस केवल पंजाब के चुनावों को छोड़कर एक के बाद एक चुनाव में हारती जा रही है। अब मणिशंकर अय्यर ने यही गलती गुजरात चुनावों के दौरान ही कर डाली जिसका असर 18 दिसम्ंबर को ही पता चलेगा। राजनैतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि कुछ न कुछ तो असर पड़ेगा ही। यही कारण है कि डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस को मणि को पार्टी से बेमन से ही बाहर का रास्ता दिखलाना पड़ गया। इन चुनावों में प्रचार प्रारम्भ होने के प्रारम्भ में ही पीएम मोदी के खिलाफ गुजरात यूथ कांग्रेस की पत्रिका में चायवाले का अपमान करते हुए 15 कार्टून प्रकाशित किये गये थे । जिसके कारण भी राहुल गांघी को माफी मांगनी पड़ी थी तथा पत्रिका को खेद व्यक्त करते हुए अपने कार्टून डिलीट करने पड़े थे। मणिशंकर पहले से ही पीएम मोदी के खिलाफ काफी जहर उगल चुके थे ।उप्र विधानसभा चुनावों के दौरान भी कांग्रेस ने पीएम मोदी का अपमानजनक तरीके से मजाक बनाया था नतीजा सामने है। पीएम मोदी को कांग्रेसाअध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने 2007 के चुनावों में मौत का सौदागर कहा था उसके बा कांग्रेस चुनाव की रेस से ही बाहर हो गयी थी। यहीं नहीं गुजरात चुनावों में इस बार कांग्रेस के नये सहयोगी हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश ठाकोर भी अपमान करने में पीछे नहीं रहे। अल्पेश ने चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में तसो पीएम मोदी के लाल होते गालों ंपर ही सवालिया निशान उठा दिया और कह डाला कि पीएम मोदी विदेश से महंगा मशरूम मंगाकर खाते हैं जिसके कारण उनके गाल लाल हो रहे है तथा हार्दिक पटेल पीएम मोदी के शासन की तुलना रावण की लंका से कर रहे हैं। यह एक पकार से पूरी तरह से दिवालिया और नैतिक पतन से विकृत हो चुके भविष्य के नेता हंै यदि इन नेताओं के हाथों में देश व राज्यों की बागडोर आ गयी तो यह देश के लिए कितना बड़ा दुर्भाग्य होगा , यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।

मणिशंकर अय्यर सरीखे नेताओं का बयान दर्शाता हेै कि जब इन लोगोें हाथों से 70 साल पुरानी सत्तायें चली जाती हैं तथा उसकी पुर्नवापसी का रास्ता नहीं दिखलायी पड़ता है तो इन लोगों के मन मस्तिष्क कितना बुरा प्रभाव पड़ता है यहां तक कि ये लोग पाकिस्तान व आतंकवादियों की गोद तक में बैठने को तैयार हो जाते हैं। मणि उवाच का यह असर हुआ कि देश के प्रबुद्ध वर्ग और मीडिया में पीएम मोदी के खिलाफ की जा रही बदजुनाबी का पूरा इतिहास ही खंगाल डाला गया और काफी तीखी आलोचना तक कांग्रेस व सहयोगी दलों की गयी। इस विषय पर सर्वे भी किये गये जिससे पता चला कि यहां तो कांग्रेस ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है लेकिन यह तो चुनाव परिणामों के बाद ही पता चलेगा कि गुजरात की जनता ने सरकार विरोधी लहर के बावजूद क्या पीएम मोदी के अपमान को मुददा बनाते हुए एक बार फिर कांग्रेस को दरकिनार कर दिया या फिर बीजेपी को स्वीकार कर लिया। मणि उवाच के बाद जितनी भी रैलियां हुई उन सभी में कांग्रेस ने जिन बीस नेताआंे व सहयोगी दलों के नेताओं ने जितनी गालियां दी उन सभी को पीएम मोदी ने जनता के बीच जमकर सुनाया। पीएम मोदी ने बकायदा नेताओं के नाम ले लेकर एक- एक गाली जनता को याद दिलायी और कहा कि यह उनका अपमान नही गुजरात का अपमान है, गरीबों, दलितों समाज के कमजोर लोगों व वंचितों का अपमान किया गया है।

पीएम मोदी ने अपनी रैलियों के दौरान जनता को बताया कि कांग्रेसी नेताओं ने मुझे कभी चायवाला, नीच, पागल कुत्ता, भस्मासुर, रावण, नाली का कीड़ा, सांप बिच्छू और न जाने क्या क्या कहा।

आज अगर देश में कहीं भी कुछ हो जाता हेै तो यही असभ्य नेतागण देश में असहिष्णुता फैल रही है का नाटक रचने लग जाते हैं तथा यह भी कहने लग जाते हैं कि देश मे बोलने की आजादी पर बैन लगा हुआ है । अब जनता को ही आगामी चुनावों में तय करना है कि क्या इस प्रकार की गंदी औेर विकृत मानसिकता वाली भाषा शैली ही अभिव्यक्ति की आजादी रह गयी है। राहुल गांधी पीएम मोदी व सरकार की नीतियों की आलेचना करते हुए उनकी विकास यात्रा को फ्लाप बताकर मजाक बना रहे हैं। लेकिन राहुल के पास भी देश के विकास के लिए कोई वास्तविक रोडमैप है क्या। वह महंगाई और बेरोजगारी की बात कर रहे हैं। आज देश के किसान और व्यापार के जो हालात खराब हो रहे हैं वह भी 70 साल के शासन की ही देन है। विगत 70 साल के शानकाल में आप लोगों ने क्या किया नहीं बता पा रहे। राहुल गांधी के पास क्या योजनायें है नहीं बता पाये। राहुल गांधी ने मंदिर- मंदिर का नकली खेल खेलकर हिदुंओं को जाति के आधार पर बांटकर अपना राजनैतिक गणित बैठाने का प्रयास किया है यह कितना कारगार हाने वाला है जिसका परिणाम 18 दिसंबर को ही पता चलेगा। लेकिन गुजरात के चुनावों में इस बार नैतिकता के पतन का दर्शन बहुत बार देखने को मिला। क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी ?