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पुस्तक खरीदकर पढ़े: राज्यपाल

लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित ‘प्रभाश्री साहित्य महोत्सव’ में वरिष्ठ आई0ए0एस0 अधिकारी सुरेश कुमार सिंह की ‘देवी काव्य परम्परा’ तथा डाॅ0 जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ की पुस्तक ‘शब्दार्थ का सौहित्य’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो0 सदानन्द प्रसाद गुप्त, पूर्व मंत्री डाॅ0 सरजीत सिंह डंग सहित अन्य साहित्य अनुरागी उपस्थित थे। राज्यपाल ने इस अवसर पर साहित्य, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले 51 शक्तिपीठ तीर्थ के संस्थापक रघुराज दीक्षित, साहित्यकार एवं भाषाविद् डाॅ0 अनुज प्रताप सिंह, रचनाकार सुरेश कुमार सिंह आई0ए0एस0, उत्तर प्रदेश कलाकार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजेश कुमार जायसवाल, पत्रकार यदुनाथ सिंह मुरारी तथा लेखिका पदमिनी श्वेता सिंह को ‘शब्दार्थ गौरव सम्मान’ देकर सम्मानित किया।

राज्यपाल ने लोकार्पण के उपरान्त अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तकों का लोकार्पण महर्षि वाल्मिकी जयंती एवं शरद पूर्णिमा के दिन हुआ है जो वास्तव में सुखद है। महर्षि वाल्मिकी ने रामायण जैसे अद्भुत ग्रंथ की रचना की जिसका विद्वानों के साथ-साथ अल्प ज्ञान रखने वालों के लिए भी महत्व है। उन्होंने कहा कि पुरातन साहित्य से आज के लिखे जाने वाले साहित्य में काफी बदलाव आया है।

श्री नाईक ने कहा कि पुस्तक लिखना लेखक के लिए एक अभ्यास होता है। पुस्तक खरीदकर पढ़े। पुस्तक पढ़ने का अपना लाभ होता है लेकिन खरीदकर पढ़ी जाने वाली पुस्तक का अलग आनन्द होता है। खरीदकर पढ़ने से पुस्तक के लेखक को लगता है कि उसकी मेहनत को पहचान मिली है। मुफ्त में मिली पुस्तक लोग कम पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि जगत वंदनीय होने के लिए ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के मर्म का अनुपालन करें।

राज्यपाल ने अपने संस्मरण ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ पुस्तक की शक्ल में कैसे आयी, उस पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे कोई साहित्यकार नहीं हैं लेकिन अपने राजनैतिक संस्मरणों को मराठी भाषा में संकलित किया, जो बाद में हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, गुजराती भाषाओं में भी प्रकाशित हुई। राज्यपाल ने बताया कि शीघ्र ही ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का संस्कृत अनुवाद भी प्रकाशित होगा जिसकी प्रस्तावना डाॅ0 कर्ण सिंह ने लिखी है। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तक को सिंधी, बांग्ला, जर्मन और फारसी भाषा में भी अनुवाद करने के प्रस्ताव आए हैं।

कार्यक्रम में हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो0 सदानन्द प्रसाद गुप्त ने सुरेश कुमार सिंह की ‘देवी काव्य परम्परा’ तथा डाॅ0 जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ की पुस्तक ‘शब्दार्थ का सौहित्य’ पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। डाॅ0 सरजीत सिंह डंग ने कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन दिया।

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