यूपीईएस के विद्यार्थियों ने आईआईजीपी 2.0  में जीता इनोवेशन चैलेन्ज

यूपीईएस के विद्यार्थियों ने आईआईजीपी 2.0 में जीता इनोवेशन चैलेन्ज

यूपीईएस ने ऐलान किया है कि युनिवर्सिटी चैलेन्ज आॅफ इण्डिया इनोवेशन ग्रोथ प्रोग्राम 2.0 आईआईजीपी 2.0 में हिस्सा लेने वाली इसकी दो टीमें टाॅप फाइनलिस्ट्स में चुनी गईं हैं। दोनों टीमों को स्पेस डेबरिस मैनेजमेन्ट सिस्टम और सबमर्सिबल अनमैन्ड एरियल व्हीकल के प्रोटोटाईप बनाने के लिए 10-10 लाख रु की धनराशि दी गई है। यह कुछ ही हफ्तों में यूपीईएस में इंजीनियरिंग एवं डिज़ाइन के विद्यार्थियों की दूसरी बड़ी उपलब्धि है; इससे पहले यूपीईएस ने ग्लोबल कैन सैट 2017 प्रतियोगिता में भी जीत हासिल की थी।

आईआईजीपी 2.0भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग; लाॅकहीड मार्टिन कोरपोरेशन; टाटा ट्रस्ट; इंडो-यूएस साइन्स एण्ड टेकनोलोजी फोरम; फेडरेशन आॅफ इण्डियन चैम्बर्स आॅफ काॅमर्स एण्ड इंडस्ट्री; एमआईटी एनर्जी इन्सटीट्यूट; आईआईटी बाॅम्बे; आईआईएम अहमदाबाद की संयुक्त पहल है जो विश्वस्तरीय रणनीतियों का इस्तेमाल करते हुए अत्याधुनिक भारतीय तकनीकों को विश्वस्तरीय बाज़ार में लाने में मदद करती है।

यूपीईएस के 6 विद्यार्थियों की टीम अब कम लागत पर सबमर्सिबल अनमैन्ड एरियल व्हीकल का प्रोटोटाइप बनाएगी। आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टीफिशियल इन्टेलीजेन्स और इमेज प्रोसेसिंग तकनीक के इस्तेमाल से बने इस प्रोटोटाईप को अंडरवाॅटर प्लैटफाॅर्म से लाॅन्च किया जा सकता है, जिसके बाद यह निर्धारित मिशन पूरा करने के लिए हवा में उड़ान भर सकता है और दोबारा अंडरवाॅटर प्लेटफाॅर्म पर लौट सकता है। अपनी सबमर्सिबल क्षमता के चलते यूएवी प्रोटोटाईप पानी के अंदर के वातावरण में सुरक्षित रहता है। छह विद्यार्थियों की इस टीम में शामिल हैं-बी. टेक एविओनिक्स इंजीनियरिंग से रजत सिंघल, एन अदथियन, एस एम हमज़ा हसन, वैभव भाटिया; एम. टेक एरोस्पेस इंजीनियरिंग से क्रिस थाॅमस और बी. डेस प्रोडक्ट डिज़ाइन से वर्तिका सक्सेना।

आईआईजीपी 2.0 युनिवर्सिटी चैलेन्ज के दूसरे विजेता हैं बी. टेक एविओनिक्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थी सिद्धार्थ ओझा, जो लो अर्थ आॅर्बिट में स्पेस डेबरिस मैनेजमेन्ट के लिए सिमिट्रिकल हाइपरलूप का प्रोटोटाईप बनाएंगे। स्पेस डेबरिस यानि अंतरिक्ष में मलबा एक बड़ी समस्या है जो समय के साथ बढ़ती जाएगी। स्पेस जंक यानि अंतरिक्ष में इकट्ठा होने वाले व्यर्थ पदार्थ लगातार बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में आने वाले समय में सैटेलाईट के इस मलबे से टकरा कर नाकाम हो जाने की सम्भावना बढ़ सकती है।