गोरखपुर त्रासदी: मासूमों के लिए 'फरिश्ता' बने डॉ. कफील को इंसेफेलाइटिस वॉर्ड से हटाया गया

गोरखपुर त्रासदी: मासूमों के लिए 'फरिश्ता' बने डॉ. कफील को इंसेफेलाइटिस वॉर्ड से हटाया गया

गोरखपुर : गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत मामले में रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के दौरे के फौरन बाद इंसेफेलाइटिस वॉर्ड प्रभारी डॉ. कफील को हटा दिया गया है. उनकी जगह डॉ. भूपेंद्र शर्मा को नया प्रभारी बनाया गया है.

सूत्रों के अनुसार, डॉ. कफील खान पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप है. वैसे डॉ. कफील दो साल पहले ही संविदा पर तैनात हुए थे. 6 माह पहले ही वह असिस्टेंट प्रोफेसर बने थे, जिसके बाद उन्हें इंचार्ज बनाया गया था.

दिलचस्प बात यह है कि गुरुवार रात को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चे तड़प-तड़प कर मर रहे थे, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स में डॉ. कफील को कुछ बच्चों के लिए 'फरिश्ता' बताया गया था. इन रिपोर्ट में काफिल खुद की परवाह नहीं करते हुए बच्चों को जिंदगी देने के लिए पूरी रात जूझते रहे.

दरअसल गुरुवार रात करीब दो बजे उन्हें अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की सूचना मिली. सूचना मिलते ही डॉ. कफील समझ गए कि स्थिति भयावह होने वाली है.

आनन-फानन में वह अपने मित्र डॉक्टर के पास पहुंचे और ऑक्सीजन के तीन सिलेंडर अपनी गाड़ी में लेकर शुक्रवार रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे. तीन सिलेंडरों से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकी.

रात भर किसी तरह से काम चल पाया, लेकिन सुबह सात बजे ऑक्सीजन खत्म होते ही एक बार फिर स्थिति गंभीर हो गई. डॉक्टर ने शहर के गैस सप्लायर से फोन पर बात की. बड़े अधिकारियों को भी फोन लगाया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया.

डॉ. कफील एक बार फिर अपने डॉक्टर मित्रों के पास मदद के लिए पहुंचे और करीब एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर का जुगाड़ किया. इस बीच उन्होंने शहर के करीब 6 ऑक्सीजन सप्लायर को फोन लगाया. सभी ने कैश पेमेंट की बात कही. इसके बाद कफील अहमद ने बिना देरी किए अपने कर्मचारी को खुद का एटीएम दिया और पैसे निकालकर ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को कहा.

इस बीच डॉक्टर ने एम्बु पंप से बच्चों को बचाने की कोशिश भी की. डॉ. कफील के इस प्रयास की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हुई थी.

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