सुलतानपुर: बड़े नेताओं की बांट जोह रहे प्रत्याशी

चुप्पी साधे बैठे मतदाता, प्रत्याशियों में मची खलबली

सुलतानपुर। सूबे के मुख्यमंत्री जहां टोटके के चलते जनपद की जयसिंहपुर (सदर) विधानसभा में अपनी पहली चुनावी रैली का शंखनाद किया तो अब देखना यह है कि उनका यह टोटका सफल होगी या नहीं ये तो भविष्य के गर्त में छिपा हुआ है। वहीं पिछले विधानसभा में बसपा के पूर्व सांसद ने जहां सपा का दामन थामा था शुक्रवार को उन्होंने सपा का दामन छोड़ते हुए दोबारा बसपा में वापसी की है। जिससे सपा को करारा झटका लग सकता है। फिर भी पाॅचों विधानसभाओं में अजीबो गरीब नजारा देखने को मिल रहा है जैसे-जैसे चुनाव की तिथियां नजदीक आती जा रही है वैसे-वैसे राजनीतिक पार्टियांे के प्रत्याशी अपने-अपने वादे और पार्टी के घोषणा पत्र की दुहाई देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है। फिर भी मतदाता सबको सुन अपनी मर्जी करने को बेताब दिख रहा है। आने वाली 27 फरवरी को जागरूक मतदाता क्या गुल खिलाएगा इसका पता तो 11 मार्च को ही चलेगा। सभी पार्टी के प्रत्याशी बड़े-बड़े नेताओं को लाने के लिए प्रयासरत है।

जनपद की पाॅच विधान सभा सीटों में जहां कादीपुर सुरक्षित सीट है वहीं चार विधानसभाएं अनारक्षित हैं। कादीपुर विधानसभा में भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आये पूर्व मंत्री जयराज गौतम के पुत्र राजेश गौतम जिन्होंने पिछला चुनाव कांग्रेस से लड़ा था उनको अपना प्रत्याशी बनाया है, तो बसपा ने पूर्व विधायक भगेलू राम को टिकट दिया है तो वहीं सपा कांग्रेस गठबन्धन ने निवर्तमान सपा विधायक रामचन्दर चैधरी के पुत्र अंगद चैधरी को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाकर भरोसा जताया है। तो वहीं राष्ट्रीय लोकदल ने रामनायक को टिकट दिया है जबकि कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में अपने भाग्य की आजमाइश करते नजर आ रहे है। भले ही यह सीट सुरक्षित है फिर भी सभी प्रत्याशियों की निगाहें सामान्य वर्ग के साथ मुस्लिम वोटरों पर टिकी है।

बहुचर्चित विधानसभा जयसिंहपुर (सदर) के लिए कहावत है कि जो जीता वहीं सिकन्दर माना जाता है। इस कहावत का मतलब यह है कि जिस पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीतता है उसी की सरकार प्रदेश में बनती है। ऐसा भाग्य आजमाने के लिए सभी पार्टियों ने बड़े-बड़े दिग्गजों को उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही नहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चुनाव की शुरूआती रैली इसी विधानसभा से की और सपा ने निवर्तमान विधायक अरूण वर्मा को प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा ने सीताराम वर्मा को बनाया है तो बसपा ने राजबाबू उपाध्याय को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं रालोद ने अवधेश नारायण पाण्डेय पर भरोसा जताया है।

सुलतानपुर विधानसभा में पार्टियों ने बड़े-बड़े दिग्गजों को जहां टिकट दिया है वहीं बसपा ने नये प्रत्याशी पर दांव लगाया है। भाजपा ने पूर्व विधायक सूर्यभान सिंह, सपा कांग्रेस गठबन्धन ने निर्वतमान विधायक अनूप सण्डा को, बसपा ने मुजीब अहमद, रालोद से बसन्तलाल समेत दर्जनों प्रत्याशी मैदान में अपने भाग्य की आजमाईश करते जूझ रहे है।

इसौली विधानसभा में पार्टियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है जहां पर सपा को एक बड़ा झटका लगा है पूर्व सांसद मो. ताहिर खाॅं ने सपा का दामन छोड़ते हुए बसपा का दामन फिर से थाम लिया है, इससे इसौली व सुलतानपुर सीट पर बसपाईयों का हौसला बुलन्द होते दिख रहा है। फिर भी यहां बागी बने प्रत्याशियों से उनको खतरा झेलना पड़ रहा है। सपा से निर्वतमान विधायक अबरार अहमद, बसपा से डाॅ. शैलेन्द्र त्रिपाठी, भाजपा से ओमप्रकाश पाण्डेय बजरंगी, रालोद से यशभद्र सिंह मोनू और सपा से बागी बने समाजसेवी शिवकुमार सिंह चुनाव मैदान में है। जिससे यहां मुकाबला दिलचस्प बना दिखाई दे रहा है।

धोपाप की धरती पर अपने-अपने भाग्य की आजमाईश करने के लिए लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र से सपा ने निर्वतमान विधायक सन्तोष पाण्डेय, तो भाजपा ने देवमणि दूबे और बसपा ने पूर्व मंत्री विनोद सिंह समेत दर्जनों निर्दलीय उम्मीदवार अपने भाग्य आजमा रहें है। पाॅचों विधानसभाओं में पार्टी प्रत्याशी अपने दिग्गजों को आने की आस लगाये है और जी तोड़ मेहनत के साथ मतदाताओं को रिझाकर अपने पाले में मतदान करने अपील करते नजर आ रहे है। आने वाली 27 फरवरी को मतदाताओं की चुप्पी ईबीएम मशीन तोड़ेेगी। इसका खुलासा 11 मार्च को देखने को मिलेगा।

Uttar Pradesh, India