लखनऊ की इन तीन सेटों पर जो अटल नहीं कर पाए क्या मोदी कर दिखाएंगे

लखनऊ की इन तीन सेटों पर जो अटल नहीं कर पाए क्या मोदी कर दिखाएंगे

लखनऊ: वैसे तो भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को अपना क्षेत्र ही मानती आई है. कारण ये है कि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में पार्टी ने यहां लगभग हर चुनाव में तगड़ा प्रदर्शन किया है, लेकिन इसी जिले की तीन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां अटल का जादू भी नहीं चल पाता. पिछले कई दशकों से ये सीटें बीजेपी की पकड़ से दूर ही रहीं है. यहां काफी कोशिश के बाद भी पार्टी मुख्य लड़ाई तक में शामिल नहीं हो पाती है. हम बात कर रहे हैं, लखनऊ की सरोजनीनगर, मलिहाबाद की सुरक्षित और मोहनलालगंज विधानसभा सीट की.

इन सीटों पर स्थिति ये है कि 1977 से लेकर अब तक यहां भाजपा की स्थिति कमजोर ही रही है. ऐसा नहीं है कि पार्टी इन सीटों की गणित को समझती नहीं है, लेकिन इसके बावजूद काफी कोशिश और तमाम प्रयोग करने के बाद भी भाजपा के नेता जीत को तरसते ही रहे हैं. इस बार भी भाजपा ने प्रमुख रणनीति के तहत मोहनलालगंज की सीट से आरके चौधरी को टिकट दिया है. 2012 चुनाव को अगर छोड़ दें तो आरके चौधरी का इस सीट पर खासा प्रभाव रहा है. वह इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. 1996 में पहली बार आरके चौधरी इस सीट से बसपा के टिकट पर विधायक बने, इसके बाद 2002 में वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विजेता हुए. 2007 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी से चुनाव लड़ा और तीसरी बार विधानसभा पहुंचे. साल 2012 में इस सीट पर सपा की चंद्रा रावत ने उनका वर्चस्व तोड़ते हुए जीत दर्ज कर ली. आरके चौधरी का मुकाबला मोहनलालगंज में बसपा के राम बहादुर से होगा. समाजवादी पार्टी ने अभी तक इस सीट से किसी नाम का ऐलान नहीं किया है. सरोजनीनगर विधानसभा सीट की बात करें तो बीजेपी ने अभी तक यहां से टिकट की घोषणा नहीं की है. वैसे तो पार्टी में दावेदारों की कमी नहीं, लेकिन सपा विधायक शारदा प्रताप शुक्ला का नाम तेजी से चर्चा में आया है. मुलायम सिंह यादव ने शारदा प्रताप शुक्ला को सपा का प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन अखिलेश की ताजपोशी के बाद जारी की गई फाइनल लिस्ट में अभी तक इस विधानसभा सीट से किसी नाम का ऐलान नहीं किया गया है.

शारदा प्रताप शुक्ला को शिवपाल खेमे का माना जाता है. ऐसी स्थिति में उनके सपा से टिकट कटने के कयास लगाए जा रहे हैं. बीजेपी इस मौके को भुनाने की जुगत में है. कारण ये है कि बीजेपी ने दूसरे दलों से आए कई नेताओं को लखनऊ की अन्य सीटों से उतारा है. इनमें कांग्रेस से आईं रीता बहुगुणा जोशी और पूर्व सांसद व बसपा से आए बृजेश पाठक व नीरज बोरा का नाम प्रमुख है. सिर्फ पिछले चुनाव में ही भाजपा के प्रदर्शन की बात करें तो वह इन तीनों सीटों पर जीत से कोसों दूर ही रही. बसपा ने यहां से शिवशंकर सिंह उर्फ शंकरी सिंह को उतारा है.

मलिहाबाद ​सीट का भी यही हाल है, भाजपा और सपा ने अभी तक यहां से प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है, वहीं बसपा ने मलिहाबाद से सत्य कुमार गौतम को मैदान में उतारा है. पिछले चुनाव में मलिहाबाद से समाजवादी पार्टी ने अपनी जीत बरकरार रखी. यहां से पार्टी के प्रत्याशी इंदल कुमार विजयी हुए. इस सीट से बीजेपी ने राकेश कुमार को मैदान में उतारा लेकिन उन्हें जीत नसीब नहीं हुई. सरोजनीनगर से सपा ने शारदा प्रताप शुक्ला को उतारा और वह विजयी रहे. भजपा के वीरेंद्र तिवारी यहां काफी कोशिश के बाद भी जीत तक नहीं पहुंच सके.

यही हाल मोहनलालगंज का हुआ. यहां सपा ने चंद्रा रावत की अगुवाई में मैदान मार लिया. बीजेपी की पूर्णिमा वर्मा यहां ज्यादा कुछ नहीं कर सकीं.