लखनऊ कैंट: क्या अखिलेश देंगे प्रतीक की पत्नी को वोट?

लखनऊ कैंट: क्या अखिलेश देंगे प्रतीक की पत्नी को वोट?

लखनऊ: आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में लखनऊ सीट पर सबकी नज़र रहेगी अगर सीएम अखिलेश यादव वहां से मुलायम सिंह द्वारा सुझाए उम्मीदवार को खड़ा करते हैं. बीजेपी ने लखनऊ कैंट सीट से रीता बहुगुणा जोशी का नाम आगे किया है जो पिछले चुनाव में यहीं से जीती थीं और उन्होंने कुछ वक्त पहले ही कांग्रेस का दामन छोड़ा है. सपा ने यहां से अभी तक अपने उम्मीदवार को नाम सामने नहीं किया है लेकिन मुलायम सिंह चाहते हैं कि उनकी दूसरी बहू अपर्णा यादव यहां से चुनाव लड़ें.

लेकिन इससे पहले की मुलायम सिंह के दूसरे बेटे प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव, रीता जोशी का सामना करें, उन्हें अपने परिवार के भीतर भी एक लड़ाई को जीतना होगा. गौरतलब है कि मुलायम सिंह ने करीब एक साल पहले ही 2017 के यूपी चुनाव के लिए लखनऊ कैंट से अपर्णा का नाम आगे कर दिया था. यह निर्वाचन क्षेत्र जहां से सपा कभी नहीं जीत पाई है, वहां अपना आधार मज़ूबत करने के लिए अपर्णा काफी मेहनत भी कर रही हैं.

लेकिन चुनाव से कुछ वक्त पहले ही मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच हुई अनबन ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट पर बड़ा असर डाला है. अखिलेश यादव ने पहले ही 300 सीटों में से ज्यादातर पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं जहां वह कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है लेकिन लखनऊ कैंट से कौन लड़ेगा यह अभी साफ नहीं हुआ है.

अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच हुई खींचतान में टीम शिवपाल का तगड़ा सदस्य अपर्णा को माना जा रहा है जिन्हें अब पार्टी ने किनारे कर दिया है. अखिलेश के करीबियों का मानना है कि अपर्णा यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपने जेठ की जगह सपा का चेहरा बनने की हैं और आगे चलकर वह यूपी मुख्यमंत्री की उम्मीदवार के रूप में भी खुद को देखती हैं.

अगर लखनऊ कैंट से अखिलेश उन्हें चुनते हैं - जैसे कि उन्होंने बाकी की सीटों पर भी अपने पिता की पसंद को ध्यान में रखा है और चाचा शिवपाल का नाम जसवंतनगर के लिए दिया है - तो अपर्णा यादव को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है. रीता बहुगुणा जोशी भी यूपी की राजनीति की रग रग से वाकिफ हैं और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री एचए बहुगुणा जोशी की बेटी हैं. इसके अलावा वह कांग्रेस की राज्य प्रमुख भी रही हैं जिस पार्टी को उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में 24 साल के साथ के बाद छोड़ दिया था.