विज्ञान और मानविकी में छः शीर्ष शोधकर्ताओं को इंफोसिस प्राइज का पुरस्कार

विज्ञान और मानविकी में छः शीर्ष शोधकर्ताओं को इंफोसिस प्राइज का पुरस्कार

फरीदाबाद: इंफोसिस साइंस फाउंडेशन (आईएसएफ) ने आज बैंगलोर में आयोजित पुरस्कार समारोह में इंफोसिस प्राइज 2016 के विजेताओं को सम्मानित किया और उनकी विज्ञान तथा अनुसंधान की प्रेरणादायी यात्रा और योगदानों की जानकारी दी। छः क्षेत्रों में यह पुरस्कार दिए जाते हैंः इंजीनियरिंग और कम्प्यूटर विज्ञान, मानविकी, जीवन विज्ञान, गणित विज्ञान, भौतिक विज्ञान और सामाजिक विज्ञान। मुख्य अतिथि, रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष, नोबल पुरस्कार विजेता और पदम विभूषण, डॉ. वेंकटरमन रामकृष्णन ने 6 श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया और प्रत्येक विजेता को 65 लाख रुपए, 22 कैरिट की स्वर्ण मंजूषा और एक सम्मान प्रमाणपत्र प्रदान किया।

इंफोसिस साइंस फाउंडेशन के न्यासी, श्री एस. डी. शिबुलाल, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष, श्री एन. आर. नारायण मूर्ति, श्री मोहनदास पाइ, श्री कृष गोपालकृष्णन, श्री श्रीनाथ बातनी, श्री के. दिनेश और श्री आर शेषशायी, समारोह में उपस्थित थे। इस समारोह में प्रख्यात वैज्ञानिकों और विभिन्न उद्द्योगों और शैक्षणिक समुदाय के नेताओं ने भी भाग लिया।

अपने स्वागत भाषण में श्री एस. डी. शिबुलाल, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष, इंफोसिस साइंस फाउंडेशन ने कहा ‘‘हम इंफोसिस प्राइज 2016 के विजेताओं की असाधारण प्रतिभा को मान्यता देने के लिए यहां आए हैं, जिनके उल्लेखनीय कार्य वैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक प्रक्षेत्रों में चुनौतियों को सुलझाने के उल्लेखनीय प्रयास करते हैं। इस वर्ष के विजेताओं द्वारा किए गए कार्य विभिन्न विषयों की सीमाओं से पार गए हैं। इनके अनुसंधान के क्षेत्र ग्रहीय खोज, विस्तृत रेंज वाले गणित के सिद्धांतों, मानव प्रवास और समुदाय नेटवर्क के साथ संक्रामक रोगों के लिए टीकाकरण तक हैं। इनके कार्य बहु विषयक हैं, अतः इनके प्रभाव भी बहु भौगोलिक हैं। इंफोसिस साइंस फाउंडेशन में हमें इन विजेताओं को सम्मानित करते हुए खुशी है और इनके उत्कृष्ट योगदान सीमाओं और समय सीमाओं से परे सभी के लिए लाभकारी होंगे, केवल इस क्षण के लिए नहीं। मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि इनके कार्य के बारे में पढ़ें और छात्रों तथा युवा अनुसंधानकर्ताओं को उत्सुक तथा बड़े सपने देखने का प्रोत्साहन दें। आज अनुसंधान एक विचारोत्तेजक क्षेत्र है।’’

डॉ. वेंकटरमन रामकृष्णन, रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष और नोबल पुरस्कार के विजेता ने विजेताओं को सम्मानित किया और इंफोसिस साइंस फाउंडेशन द्वारा भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे असाधारण कार्य की प्रशंसा की। उस समारोह पर बोलते हुए, डॉक्टर रामकृष्णन ने कहा, “इस जटिल और तकनीकी दुनिया में, हम सभी को साक्ष्य आधारित तथ्यों को परिकल्पना और मिथक से अलग करने के लिए बहुत आवश्यक है कि हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आधार को समझे। वैज्ञानिक शुद्ध गणित और भौतिक विज्ञान से हर तरह से चिकित्सा और इंजीनियरिंग के लिए के लिए क्षेत्रों में हमारे राज्य की प्रगति लिए चुपचाप काम करते हैं, और इंफोसिस पुरस्कार कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों और जनता की रूचि को विज्ञान में प्रोत्साहित करने के लिए एक अच्छा तरीका है।

विजेताओं को 6 जूरी चेयर द्वारा किए गए 250 से अधिक नामांकनों में से चुना गया : प्रो. प्रदीप के. खोसला (कैलिफोर्निया सैन डिएगो विश्वविद्यालय) इंजीनियरिंग और कम्प्यूटर विज्ञान के लिए; डॉ. अमर्त्या सेन (हार्वर्ड विश्वविद्यालय) मानविकी के लिए; डॉ. इंदर वर्मा (साल्क जीव विज्ञान संस्थान) जीवन विज्ञान के लिए; प्रो. श्रीनिवास एस. आर. वर्धान (न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय) गणित विज्ञान के लिए; प्रो. श्रीनिवास कुलकर्णी (कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान) भौतिक विज्ञान के लिए; और प्रो. कौशिक बासु (कॉर्नेल विश्वविद्यालय) सामाजिक विज्ञान के लिए।

इंफोसिस प्राइज 2016 के विजेता इस प्रकार हैं : इंजीनियरिंग और कम्प्यूटर विज्ञान प्रो. वी. कुमारन, प्रोफेसर, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बैंगलोर, भारत प्रो. वी. कुमारन ने नरम दीवार वाली नलियों में तरल के प्रवाह पर कार्य किया जो एक चिप पर प्रयोगशाला युक्ति की नवाचारी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण है जिसे खास तौर पर हृदय संबंधी स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। इन युक्तियों से समय पर निदान करने में मदद मिलती है जिससे जीवन बचाया जा सकता है।

मानविकी प्रो. सुनील अमृत, मेहरा फैमिली प्रोफेसर, साउथ एशियन स्टडीज़, इतिहास के प्रोफेसर, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज, यूएसए प्रो. सुनील अमृत एक इतिहासकार हैं जो दक्षिणी और दक्षिण पूर्वी एशिया के आपस में जुड़े इतिहास का अध्ययन करते हैं। उनकी पुस्तकें इस क्षेत्र में मानव प्रवास के समृद्ध इतिहास को बताती हैं। प्रो. अमृत विशेष रूप से प्रवास, इसके प्रभाव और परिणामों के अनुभव के साथ कार्य करते हैं।

जीवन विज्ञान प्रो. गगनदीप कांग, ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) में कार्यकारी निदेशक, फरीदाबाद, भारत प्रो. गगनदीप कांग ने घातक रोटावायरस के प्राकृतिक इतिहास को बेहतर रूप से समझने में योगदान देकर अग्रणी कार्य किया है, जो भारत और दुनिया भर में हजारों शिशुओं की मौत का कारण है। उनके कार्य इन संक्रामक रोगों के खिलाफ प्रभावी टीकों को बनाने तथा इनकी रोकथाम में मदद के लिए जन स्वास्थ्य नीतियों को तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

गणित विज्ञान प्रो. अक्षय वेंकटेश, प्रोफेसर, गणित विभाग, स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए प्रो. अक्षय वेंकटेश अंक सिद्धांतवादी हैं, जिनके कार्य में वैश्लेषिक अंक सिद्धांत, एगोर्डिक सिद्धांत और होमोटोपी सिद्धांत शामिल हैं। प्रो. वेंकटेश पूर्णांक में नए पैटर्न पर कार्य करते हैं। उनके कार्य से पहली सुलझाने की व्याख्या करने में मदद मिली है और ऐसा करते हुए गणित की अनिवार्य एकात्मकता को समझाया गया है।

भौतिक विज्ञान डॉ. अनिल भारद्वाज, निदेशक, अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, तिरुवंनतपुरम, भारत डॉ. अनिल भारद्वाज, एक ग्रहीय वैज्ञानिक हैं, वे एक मात्र ऐसे भारतीय वैज्ञानिक हैं जिन्हें प्रत्येक भारतीय अंतरिक्ष मिशन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। चंद्रयान 1 और मंगल यान मिशन पर उनके प्रयोगों से चंद्रमा की सतह पर सौर पवन अंतःक्रियाओं के बारे में नई अंतर दृष्टि प्राप्त हुई है तथा मार्टियन वातावरण के बारे में अनेक नई जानकारियां मिली हैं। वे हमारे अपने ग्रह और समय में इसकी यात्रा को समझने का भी प्रयास करते हैं।

सामाजिक विज्ञान प्रो. कैवियन मुंशी, अर्थशास्त्र के फ्रैंक रामसी प्रोफेसर, अर्थशास्त्र के संकाय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, यूके प्रो. कैवियन मुंशी एक अर्थशास्त्री हैं, जिनके अनुसंधान से अनौपचारिक समुदाय नेटवर्क की जटिल भूमिका आर्थिक विकास की प्रक्रिया में दर्शाई गई है। यह कार्य महत्वपूर्ण है, जब बाजार ठीक तरह काम नहीं करता, सामाजिक तौर पर जुड़े व्यक्तियों का नेटवर्क जटिल तरीकों से आर्थिक दक्षता में बाधा और वृद्धि दोनों ही ला सकता है। वे जटिल आर्थक विश्लेषण और सामाजिक तथा ऐतिहासिक विवरणों पर ध्यान देकर इसके संयोजन का उपयोग करते हैं जो अर्थशास्त्र में दुर्लभ है।