नई दिल्ली। 2009 के जिगिशा घोष मर्डर केस में दो दोषियों को दिल्ली के साकेत कोर्ट ने आज फांसी की सजा सुनाई जबकि एक को उम्र कैद की सजा दी गई है। कोर्ट ने जिगीशा घोष मर्डर केस को रेयर ऑफ रेयरेस्ट क्राइम माना है। अदालत ने अमित शुक्ला और रवि कपूर को मौत की सजा जबकि बलजीत मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई।
गौरतलब है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में काम करने वाली जिगिशा घोष की साल 2009 के मार्च में अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने दोषी करार दिए गए रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक की सजा तय करने के लिए 22 अगस्त की तिथि तय की थी।

अभियोजन पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया था कि ये अपराधी इंडिया टुडे समूह की पत्रकार सौम्या विश्वनाथन और एक टैक्सी चालक की हत्या के मुकदमे का भी सामना कर रहे हैं। वहीं बचाव पक्ष के वकील ने इनके साथ यह कहकर नरमी बरतने का आग्रह किया कि दोषी अभी कम उम्र के हैं।

28 साल की जिगिशा हेवेट एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड में संचालन प्रबंधक के पद पर थी। उसका 18 मार्च, 2009 को दफ्तर की गाड़ी से दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार इलाके में स्थित घर के पास उतरने के बाद सुबह लगभग चार बजे अपहरण कर लिया गया था। उसका शव 20 मार्च को हरियाणा में सूरजकुंड के पास मिला था। बाद में पुलिस ने कपूर, शुक्ला और मलिक को इस मामले में गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने 14 जुलाई को तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302(हत्या), धारा 201(सबूत मिटाने), धारा 364 (हत्या करने के लिए अपहरण), धारा 394(डाका डालने के दौरान जानबूझकर चोट पहुंचाने का कारण बनना), धारा 468 (धोखा देने के लिए जालसाजी), धारा 471 (फर्जी दस्तावेज को असली रूप में या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड के रूप में इस्तेमाल करना), धारा 482 (संपत्ति के नकली मुहर का इस्तेमाल करना) और धारा 34(समान इरादा) के तहत दोषी माना।