योग दिवस इतिहास नहीं परम्परा बने: सौरभ मिश्रा

योग दिवस इतिहास नहीं परम्परा बने: सौरभ मिश्रा

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राजधानी लखनऊ स्थिति श्री श्याम मंदिर, खाटू श्याम वाटिका में स्वयंसेवी संगठन यूनाइट फाउण्डेशन द्वारा आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम अाज सम्पन्न हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबोले की अध्यक्षता में सम्पन्न हुये कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केजीएमयू के कुलपति पद्मश्री डा. रविकान्त और विशिष्ट अतिथि परमानन्द पाण्डेय, राष्ट्रीय महासचिव, आईएफडब्लूजे, हेमन्त तिवारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईएफडब्लूजे, विजयकांत दीक्षित, वरिष्ठ पत्रकार, प्रो.एस.सी.तिवारी, वरिष्ठ विशेषज्ञ-मानसिक रोग, केजीएमयू, लखनऊ, संदीप पाण्डेय, सामाजिक कार्यकर्ता, राजपाल कश्यप, राजमंत्री, उ.प्र. सरकार समेत सैकड़ों की संख्या में लोगों ने योग किया। अल सुबह भारी बारिश के बाद भी योग के लिए लोगों के उत्साह को दखते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने गीता के उद्धरणों के साथ योगाभ्यास के बाद आयोजित स्वास्थ्य, समाज और सरोकार विषय पर आयोजित सम्वाद में हर परिस्थिति में समभाव रखने को योग से जोड़ा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुये कहा कि योग भारतीय प्राचीन संस्कृति की परम्पराओं को समाहित करता है। गीता में योग की महत्ता को योगेश्वर श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताते हुये कहा कि समत्वंयोग उच्चते अर्थात् दु:ख-सुख, लाभ-हानि, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि में सर्वत्र समभाव रखना ही योग है। आईएफडब्लूज के राष्ट्रीय महासचिव परमानन्द पाण्डेय ने पतंजलि योग दर्शन का हवाला देते हुये कहा कि- योगश्चित्तवृत्त निरोध: अर्थात चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। केजीएमयू के कुलपति पद्मश्री डा. रविकान्त ने बताया कि योग एक सीधा प्रायोगिक विज्ञान है, एक पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। योग मनुष्य जीवन की विसंगतियों पर नियन्त्रण का माध्यम है। उसी बात को आगे बढ़ाते हुए आईएफडब्लूज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमन्त तिवारी ने कहा कि चित्त और शरीर को जोडऩा ही योग है। हमने विदेशियों को लंबे अर्से से भारत आकर योग सीखते देखा है किंतु विडम्बना है कि हमने योग की महत्ता को देर से पहचाना। प्रख्यात समाजसेवी सन्दीप पाण्डेय ने योग को महज दस फीसदी लोगो की आवश्यकता बताते हुए कहा कि हमारे देश में 90 प्रतिशत लोग शारीरिक श्रम करते हैं और उन्हे योग की आवश्कता नहीं होती। यदि शेष दस फीसदी भी श्रम करें तो उन्हें स्वस्थ रहने के लिए अलग से कुछ करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। केजीएमयू के वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. एस.सी.तिवारी ने कहा कि आपके तन-मन के जुड़ाव की प्रक्रिया ही योग है। अगर यह जुड़ाव बना रहता है तो जीवन की प्रत्येक परिस्थिति पर विजय पायी जा सकती है। राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद के कुलपति प्रो.जी.सी.आर जयसवाल ने बताया कि एक प्रसिद्ध उक्ति है- 'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनमÓ! इसके अनुसार निरोग एवं दृढ़ता से युक्त-पुष्ट शरीर के बिना साधना सम्भव नहीं। इसलिए योग को इस प्रकार गूंथ दिया गया है कि शरीर की सुडौलता के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रगति भी हो। शरीर की सुदृढ़ता के लिए आसन एवं दीर्घायु के लिए प्राणायाम को वैज्ञानिक ढंग से ऋषियों ने अनुभव के आधार पर प्राथमिकता दी है। इससे व्यक्ति एक महान संकल्प लेकर उसे कार्यान्वित कर सकता है। अत: योग इस जीवन में सुख और शांति देता है और मुक्ति के लिए साधना का मार्ग भी प्रशस्त करता है। उ.प्र. सरकार में राज्यमंत्री राजपाल कश्यप ने कहा कि योग के द्वारा हम आज के परिवेश में अपने जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना सकते हैं। आज के प्रदूषित वातावरण में योग एक ऐसी औषधि है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। योगवेत्ता पियूषकान्त मिश्र के निर्देशन में कराये गये योगाभ्यास में सम्मलित बाल प्रशुक्षुओं को स्वयंसेवी संगठन यूनाइट फाउण्डेशन के सचिव सौरभ मिश्रा द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। सौरभ मिश्रा ने पधारे हुए समस्त अतिथि गणों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि 'ज्ञानादेव तु कैवल्यÓ इस उक्ति के अनुरूप आपके शरीर एवं मन को उस ज्ञानानुभूति के योग बनाना ही योग का प्रमुख लक्ष्य है। विश्व योग दिवस की निरन्तरता बनी रहे, यह अपेक्षित है। यह इतिहास न बने, बल्कि परम्परा बने। रूको, भीतर झांको और जीवन को बदलो- यही योग दिवस का उद्घोष हो, इसी से लोगों को नयी सोच मिले, नया जीवन-दर्शन मिले।

Lucknow, Uttar Pradesh, India