संगकारा, थिरुमाने के आगे इंग्लैंड बेबस

संगकारा, थिरुमाने के आगे इंग्लैंड बेबस

श्रीलंका ने इंग्लैंड को 9 विकेट से रौंदा 

वेलिंगटन : अनुभवी कुमार संगकारा और युवा लाहिरू तिरिमाने की शतकीय पारियों से श्रीलंका ने आज यहां जो रूट और इंग्लैंड के प्रयासों पर पानी फेरकर 9 विकेट की शानदार जीत से विश्व कप क्रिकेट में अपना विजय रथ क्वार्टर फाइनल के करीब पहुंचा दिया।

शीर्ष क्रम के बल्लेबाज रूट की 121 रन की दर्शनीय पारी से इंग्लैंड ने पूल ए के मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए छह विकेट पर 309 रन का मजबूत स्कोर बनाया। लेकिन इंग्लैंड के गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक फिर से फिसड्डी साबित हुए और इस बड़े स्कोर का बचाव करने में नाकाम रहे।

संगकारा (नाबाद 117) और तिरिमाने (नाबाद 139) ने दूसरे विकेट के लिये 212 रन की अटूट साझेदारी करके इंग्लैंड को टूर्नामेंट में करो या मरो की स्थिति में पहुंचा दिया। श्रीलंका ने 47.2 ओवर में एक विकेट पर 312 रन बनाये और अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इस जीत से श्रीलंका के चार मैचों में छह अंक हो गये हैं। इंग्लैंड ने भी इतने ही मैच खेल लिये हैं लेकिन उसके केवल दो अंक हैं।

इंग्लैंड अब भी नाकआउट चरण में पहुंच सकता है लेकिन उसे अपने बाकी बचे दोनों मैचों में बांग्लादेश और अफगानिस्तान पर जीत दर्ज करने के साथ अन्य मैचों में भी अनुकूल परिणाम की दुआ करनी होगी। संगकारा ने अपने करियर का 23वां और सबसे तेज शतक लगाया। उन्होंने अपनी पारी में 86 गेंद खेली तथा 11 चौके और दो छक्के लगाये। संगकारा ने 70 गेंद में शतक पूरा किया जो श्रीलंका की तरफ से विश्व कप में सबसे तेज शतक भी है।

दूसरी तरफ 25 वर्षीय तिरिमाने इस टूर्नामेंट में सैकड़ा जड़ने वाले सबसे कम उम्र के श्रीलंकाई बल्लेबाज बने। उन्होंने 143 गेंद खेली तथा 13 चौके और दो छक्के लगाये। श्रीलंका के आउट होने वाले एकमात्र बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान (44) रहे। उन्होंने और तिररिमाने ने पहले विकेट के लिये 100 रन जोड़े।

मैन ऑफ द मैच संगकारा ने बेदाग पारी खेली। तिरिमाने ने जीवनदान मिलने के बाद अगले ओवर में शतक पूरा किया। वोक्स के इसी ओवर में संगकारा तीन चौके जड़कर 90 रन के पार पहुंचे और फिर उन्होंने 70 गेंदों पर शतक पूरा कर दिया। तिरिमाने ने वोक्स पर ही विजयी छक्का लगाया। यह वनडे में दूसरा अवसर है जबकि किसी टीम ने 300 से अधिक रन के लक्ष्य को केवल एक विकेट गंवाकर हासिल किया। इससे पहले भारत ने 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह कारनामा किया था। इंग्लैंड की तरफ से एकमात्र विकेट मोइन अली (50 रन देकर एक विकेट) ने लिया।

इससे पहले वेस्टपैक स्टेडियम में टास जीतकर बल्लेबाजी करने वाला इंग्लैंड एक समय चार विकेट पर 161 रन के स्कोर पर संकट में दिख रहा था लेकिन रूट और जेम्स टेलर (25) ने 98 रन की साझेदारी करके पारी को संभाला। रूट ने अपनी पारी में 108 गेंद खेली तथा 14 चौके और दो छक्के लगाए। यह विश्व कप में इंग्लैंड की तरफ से पांचवें विकेट के लिये रिकार्ड साझेदारी है जो केवल 11 ओवर में बनी। श्रीलंकाई गेंदबाज तब रन प्रवाह रोकने में नाकाम रहे। बाद में जोस बटलर ने 19 गेंदों पर 39 रन की नाबाद पारी खेली जिससे इंग्लैंड 300 रन के पार पहुंच पाया।

श्रीलंकाई कप्तान और मध्यम गति के गेंदबाज एंजेलो मैथ्यूज (43 रन देकर एक विकेट) ने मोइन को आउट करके पहली सफलता दिलायी। ऑफ स्पिनर (29 रन देकर एक विकेट) ने इसके तुरंत बाद गैरी बैलेन्स (छह) को अपनी ही गेंद पर कैच किया। बेल ने कुछ समय तक एक छोर संभाले रखा लेकिन सुरंगा लखमल (71 रन देकर एक विकेट) ने उन्हें अर्धशतक बनाने से रोक दिया। मोर्गन (27) ने भी अच्छी शुरुआत की लेकिन वह इसे बड़े स्कोर में नहीं बदल पाये। तिसारा परेरा (55 रन देकर एक विकेट) ने उन्हें बल्लेबाजी पावरप्ले शुरू होने से पहले 35वें ओवर में आउट कर दिया।

इसके बाद रूट और टेलर ने सतर्कता और आक्रामकता दोनों में अच्छा तालमेल बिठाकर रन बटोरे। रूट ने 52वें मैच में अपना चौथा वनडे शतक जड़ा। उन्होंने पारी के 45वें ओवर में परेरा पर एक छक्का और तीन चौके लगाये। ओवर के शुरू में टेलर ने भी छक्का जड़ा था। इस तरह से इस ओवर में 25 रन बने। टेलर को लेसिथ मालिंगा (63 रन देकर एक विकेट) ने आउट किया जबकि रूट की पारी का अंत रंगना हेराथ (35 रन देकर एक विकेट) ने किया। इंग्लैंड ने आखिरी पांच ओवरों में 52 रन बनाए। अंतिम ओवर में ही 22 रन बने। लखमल ने आखिरी ओवर में एक बीमर डाला जिसके कारण उन्हें गेंदबाजी से रोक दिया गया। इस ओवर की आखिरी दो गेंदें दिलशान ने डाली।