नितीश फिर बनेंगे बिहार के सीएम, 22 फरवरी को लेंगे शपथ

नितीश फिर बनेंगे बिहार के सीएम, 22 फरवरी को लेंगे शपथ

पटना : बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार 22 फरवरी को शपथ लेंगे। राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू विधायक दल के नेता नीतीश कुमार को राजभवन बुलाकर मुख्यमंत्री बनने का न्योता दिया। आज बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जद-यू विधायक दल के नेता नीतीश कुमार ने आज शाम एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने का न्योता दिया है। मैं 22 फरवरी को शाम पांच बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लूंगा।'

ज्ञात हो कि आज मांझी को लगा कि वह सदन में बहुमत हासिल नहीं कर पाएंगे। अपनी हार को देखते हुए मांझी ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मांझी के इस्तीफे के बाद नीतीश की मुख्यमंत्री बनने की राह आसान हो गई।

इसके पहले नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जमकर हमला किया। उन्‍होंने कहा कि इस पूरे खेल की स्क्रिप्‍ट बीजेपी के इशारे पर लिखी गई। नीतीश कुमार ने सुबह एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जीतन राम मांझी ने बिहार विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले ही मैदान छोड़ दिया। उन्‍हें पहले ही इस्‍तीफा देना चाहिए था। बहुमत नहीं था तो पहले ही मांझी इस्‍तीफा देना चाहिए था और उन्‍हें पार्टी (जेडीयू) के फैसले का सम्‍मान करना चाहिए था। नीतीश ने कहा कि मांझी ने इस दौरान काफी हास्‍यास्‍पद बातें कहीं और बीजेपी के इशारे पर काम किया। लेकिन वे बीजेपी का गेम प्‍लान समझ नहीं पाए। बीजेपी का गेम प्‍लान एक्‍सपोज हो गया है। बीजेपी के इशारे पर ही अनैतिक काम हुए। यहां तक कि बीजेपी के नेताओं ने बीते दिनों जुगाड़ शब्‍द का इस्‍तेमाल किया। जाहिर है कि बीजेपी जुगाड़ से सरकार बनाना चाहती थी। बीजेपी हमारे मोर्चा बनने से भी डरी हुई है। नीतीश ने कहा कि स्‍पीकर पर लगाए गए आरोप दुर्भाग्‍यपूर्ण है। हमारी पार्टी (जेडीयू) को तोड़ने की पूरी कोशिश की गई। सारे तिकड़मों के बाद भी वे हमारी पार्टी को नहीं तोड़ पाए। पूरे खेल की स्क्रिप्‍ट बीजेपी के इशारे पर लिखी गई और अब वे खुद पीछे हट गए।

उन्‍होंने कहा कि बीजेपी पहले मांझी को समर्थन दे रही थी, फिर खुलकर सामने आ गई। नीतीश ने कहा कि बुधवार रात तक सारा ड्रामा चल रहा था। मांझी ने कोई प्रयत्‍न नहीं छोड़ा। कल बीजेपी खुलकर सामने आ गई, उसके बावजूद मांझी ने सत्र से पहले मैदान छोड़ दिया। जबकि हमने बार बार बहुमत होने का दावा किया। आज जब मांझी ने इस्‍तीफा देने की पेशकश की तो वो हास्‍यास्‍पद है। मांझी ने अनावश्‍यक जाति कार्ड खेला। जाति की आईडेंटिटी बंद होनी चाहिए वरना इसके काफी दुष्‍परिणाम सामने नहीं आएंगे। जाति का कार्ड समाज में विभेद पैदा करने के लिए खेला जा रहा है।