हर मजहब, धर्म का सार प्रेम है: अनुपमा सिंह

हर मजहब, धर्म का सार प्रेम है: अनुपमा सिंह

पेरिस घटना में मारे लोगों की याद में अनुपमा फाउन्डेशन की श्रद्धांजलि सभा

लखनऊ: कैप्टन मनोज पॉडे चौराहा गोमती नगर लखनऊ अनुपमा फाउन्डेशन, जमी अपनी आसमान मेरा व सर्च फाउन्डेशन के संयुक्त तत्वाधान में पेशावर व पेरिस में आतंकवादी घटना मे मारे गये बच्चों व महिलाओं व पुरुषों के लिये श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।  बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों ने हिस्सा लेकर संवेदना व्यक्त की व मृतक लोगो को श्रद्धांजली देते हुये मोमबत्ती जलायी ।

श्रद्धांजलि सभा का आरम्भ डा0 मनोरमा लाल(अध्यक्षा जमी अपनी आसमान मेरा) के व्याख्यान से हुई। उन्होने आतंकवादी घटनाओं की पुरजोर निंदा करते हुये कहा कि कैसे कोई मनुष्य का दिल इन मासूम बच्चो को मारने के लिये गवाही देता है, वैसे भी बच्चे समाज में इतना अमानवीयता का शिकार है उस पर आंतकवाद का कहर बेहद निंदनीय है । 450वर्ष पहले कबीर दास जी ने लिखा था ढ़ाई आखर प्रेम का पड़े सो पंडित होय ,जब सबसे पहले दिल बना होगा तो प्रेम ही आया होगा फिर क्यों इंसान मजहब के नाम पर लडता है क्यों नही यही प्रेम लेकर इंसान चलता है। 

अनुपमा सिंह (अध्यक्षा,अनुपमा फाउन्डेशन) ने आतंकवादी घटनाओं में बच्चों को शिकार बनाने की घटनाओं की पुरजोर निंदा करते हुये कहा कि हर मजहब, धर्म का सार प्रेम है, फिर क्यों इंसान धर्म के नाम पर लड़ता झगड़ता है और जिन बच्चों को खुदा ने फरिश्तों का दर्जा दिया है फिर कैसे खुदा के फरिश्तों को ये आंतकवादी मार सकते है।समाज के हर वर्ग को इस का विरोध करना चाहिए । उनहों ने कहा क् िहर मजहब प्यार सिखाता है हिंसा नहीं सिखाता।

श्री सर्वेष अस्थाना अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि व सर्च फाउन्डेषन के अध्यक्ष ने मासूम फारिश्तों को आतंकवाद का शिकार बनाये जाने पर मार्मिक ढ़ंग से कविता के माध्यम से अभिव्यक्ति प्रकट की व आतंकवाद को मानव जाति के लिये खतरा बताया और समाज से इसके विरुद्ध खड़े होने का आहावन् किया।

आये हुये सभी माता एवं पिता ने मोमबत्ती जला कर आतंकवाद की चपेट में मारे गये बच्चों को श्रद्धांजलि दी व शपथ ली क् िवे सभी लोग मिल कर आतंकवाद का विरोध करेगें ।

Lucknow, Uttar Pradesh, India